Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • कच्चे घर से पक्के आशियाने तक : पीएम जनमन आवास योजना ने सरिता बैगा के जीवन में भरी खुशियों की नई रोशनी
    • चिंतन शिविर 3.0 से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को मिलेगी नई दिशा : मुख्यमंत्री
    • “बंगाल की जनता अपना फैसला दे चुकी है”, संजय झा ने साधा ममता बनर्जी पर निशाना
    • सफलता की कहानी-गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बना PHC चेरपाल
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 112 करोड़ से अधिक के कार्यों का करेंगे लोकार्पण-भूमिपूजन
    • डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी: राष्ट्र प्रथम का अमर संदेश
    • जामुन खाकर न करें गुठली को फेंकने की गलती, इन 5 बीमारियों में मददगार
    • भारत की सबसे अनोखी ट्रेन, 145 साल से लगातार ढो रही है नमक
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Tuesday, July 7
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»यूरोप के साथ मुक्त व्यापार आसान नहीं… 
    लेख-आलेख

    यूरोप के साथ मुक्त व्यापार आसान नहीं… 

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inFebruary 6, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    इस सप्ताह के अंत तक, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जो गणतंत्र दिवस परेड की मुख्य अतिथि थीं, संभवत: उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेंगी, जिसे उन्होंने ‘ऐतिहासिक’ बताया है-भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता। ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहे जाने वाले इस मुक्त व्यापार समझौते का परिणाम 2 दशकों से रुकी हुई बातचीत के बाद सामने आया है। लेकिन क्या यह सफल होगा? या फिर (अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा यूरोप और भारत दोनों पर टैरिफ का हथियार रखने के कारण) जल्दबाजी में किए गए इस समझौते की संतान जन्मजात रूप से दोषपूर्ण है?

    यूरोपीय संघ और भारत द्वारा पहली बार ‘रणनीतिक’ संबंध की घोषणा के 3 साल बाद, 2007 में मुक्त परमाणु समझौते (एफ.टी.ए.) की वार्ता शुरू हुई। उस समय भारत नहीं, बल्कि चीन यूरोपीय संघ का सबसे पसंदीदा सांझेदार था। इसके बाद 15 दौर की वार्ताओं से कुछ खास हासिल नहीं हुआ। यूरोप भारत के प्रति अपने एकतरफा रवैये पर अड़ा रहा। कृषि जैसे पहलुओं और यूरोपीय उत्पादों पर भारत द्वारा लगाए गए अत्यधिक शुल्क को लेकर वास्तविक चिंताएं थीं। भारत कार्बन उत्सर्जन कम क्यों नहीं करता, अपने औद्योगीकरण को क्यों नहीं रोकता और पश्चिमी देशों की मांगों को क्यों नहीं मानता? क्या भारतीय चुपके से यूरोपीय संघ के उच्च श्रम और पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करेंगे?

    भारत ने चीन के कहीं अधिक सकल घरेलू उत्पाद (2007 में भारत के 1.2 ट्रिलियन डॉलर की तुलना में लगभग 3.4 ट्रिलियन डॉलर), तेजी से सस्ते सामान का उत्पादन और वितरण करने की उसकी क्षमता तथा उसके बढ़ते उपभोक्ता बाजार को नजरअंदाज कर दिया। चीन-यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और निवेश फलता-फूलता रहा लेकिन ब्रसेल्स में चीन के ‘गैर-लोकतांत्रिक’ स्वरूप और ‘मानवाधिकार’ रिकॉर्ड का शायद ही कभी जिक्र हुआ। 2013 तक, भारत-यूरोपीय संघ वार्ता अधर में लटक गई। हालात तब बदले, जब चीन से आर्थिक और भू-रणनीतिक खतरे का सामना कर रहे अमरीका ने ‘इंडो-पैसिफिक’ नामक एक नए महासागर की खोज की और उस देश को लुभाना शुरू किया जो इसके सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर प्रभुत्व रखता था-भारत। यूरोप ने भी इसका अनुसरण किया और भारत-यूरोपीय संघ एफ.टी.ए. पर बातचीत 2022 में फिर से शुरू हुई।

    यूरोपीय लोग आमतौर पर अतिशयोक्ति नहीं करते, लेकिन पिछले सप्ताह दिल्ली में चिंतन फाऊंडेशन द्वारा आयोजित एक भरे हुए सैमीनार में, यूरोपीय संघ के 3 सबसे छोटे राज्यों-इटली, माल्टा और एस्टोनिया-के प्रतिनिधियों और भारतीय विश्लेषकों ने इस बात पर जोर दिया कि मुक्त व्यापार समझौता लगभग पूरा हो चुका है। हालांकि, समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। यूरोपीय संघ के लिए, भारत द्वारा शराब, स्पिरिट और डेयरी उत्पादों पर लगाए गए 150 प्रतिशत तक के उच्च टैरिफ एक समस्या है। भारत के लिए, यूरोपीय संघ के कड़े बौद्धिक संपदा अधिकार नियम उसके अपने अधिक लचीले पेटैंट कानूनों से टकराते हैं, जिनके कारण सस्ती जैनरिक दवाएं संभव हो पाती हैं। यूरोप खरीद प्रक्रियाओं तक अधिक पहुंच चाहता है लेकिन ‘आत्मनिर्भर भारत’ स्थानीय आपूर्तिकत्र्ताओं को प्राथमिकता देता है। इसके अलावा, यूरोप का कार्बन बॉर्डर एडजस्टैंंट मैकेनिज्म (सी.बी.ए.एम.) भी है, जिसे सस्ते, पर्यावरण के लिए हानिकारक उत्पादों को यूरोपीय संघ में प्रवेश करने से रोकने के लिए बनाया गया है। स्टील, एल्यूमीनियम, सीमैंट आदि पर लगाए गए भारी गैर-टैरिफ अवरोधों के कारण भारतीय लघु एवं मध्यम उद्यमों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।

    शराब, स्पिरिट और डेयरी उत्पादों पर टैरिफ कम करने से घरेलू किसानों, स्थानीय शराब उद्योग और राज्य सरकार के राजस्व को खतरा होगा। यूरोपीय ऑटोमोबाइल पर टैरिफ कम करने से भारत में विनिर्माण क्षेत्र की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी। यूरोपीय संघ के कृषि उत्पादों के लिए कड़े मानक (उदाहरण के लिए बासमती चावल पर कीटनाशकों की सीमा) और जटिल प्रमाणन प्रक्रियाएं भी अनुपालन के लिए कठिन होंगी। मानव संसाधन का सवाल भी है। यूरोप एक स्पष्ट एकीकृत आव्रजन नीति के बिना भारतीय नर्सों, तकनीशियनों, आई.टी. प्रतिभाओं आदि को लुभाने की कोशिश कर रहा है। भारत ऐसे कामगारों के लिए आसान वीजा प्रक्रिया और निर्बाध आवागमन चाहता है। अंतत:, यूरोपीय संघ की संरचना और उसकी जटिल प्रक्रियाएं एक बड़ी खामी हैं। ऑब्जर्वर रिसर्च फाऊंडेशन के अर्थशास्त्री संजीव आहलूवालिया बताते हैं कि जब तक सभी 28 यूरोपीय संघ के सदस्य देश इसकी पुष्टि नहीं कर देते, तब तक यह समझौता केवल कागजों पर ही रहेगा। लेकिन भारत के यूरोपीय संघ के अलग-अलग देशों के साथ संबंध भिन्न-भिन्न हैं। पुष्टि प्रक्रिया के दौरान इनमें टकराव हो सकता है। तो क्या भारत-यूरोपीय संघ के मुक्त व्यापार समझौते को दस्तावेज पर हस्ताक्षर होते ही एक सफल और आवश्यक विवाह का परिणाम घोषित किया जा सकता है? इसका जवाब जानने में कम से कम एक साल और लगेगा।-पद्मा राव सुन्दरजी

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी: राष्ट्र प्रथम का अमर संदेश

    July 6, 2026

    साहित्य और राष्ट्रबोध शब्दों से निर्मित होती है राष्ट्र की आत्मा

    July 5, 2026

    भूकंप से लोगों को कैसे बचाएंगी सरकारें?…

    July 4, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.