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    Home»राष्ट्रीय»सहमति से शारीरिक संबंध, फिर यौन उत्पीड़न का केस, बढ़ते ट्रेंड पर हाई कोर्ट ने जताई चिंता
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    सहमति से शारीरिक संबंध, फिर यौन उत्पीड़न का केस, बढ़ते ट्रेंड पर हाई कोर्ट ने जताई चिंता

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inFebruary 26, 2026
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    बेंगलुरु : कर्नाटक हाई कोर्ट ने चिंता जताई है कि सहमति से फिजिकल रिलेशन और बाद यौन उत्पीड़न का केस दर्ज कराने वाले मामले बढ़ रहे हैं। हाई कोर्ट ने कहा किभारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 69 के तहत शिकायतें दर्ज करके सहमति से बने यौन संबंधों को अपराध घोषित किया जा रहा है। धारा 69 महिलाओं को छल-कपट से यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित करने पर दंड का प्रावधान करती है, जिसमें विवाह के झूठे वादे भी शामिल हैं।

    धारा 69 के तहत आरोपी एक व्यक्ति की ओर से दायर याचिका पर कर्नाटक हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा था। हाई कोर्ट ने कहा कि न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने ऐसे मामलों के पंजीकरण और गिरफ्तारी के तरीके पर चिंता व्यक्त की। न्यायाधीश ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, ‘सहमति से बने संबंध के 2-3 साल बाद, अपराध दर्ज किया जाता है और व्यक्ति जेल में होता है। राज्य, इस आधार पर कि कथित अपराध 10 साल के कारावास से दंडनीय है, अपराध दर्ज होने के समय ही प्रत्येक आरोपी को हिरासत में ले रहा है।’

    याचिकाकर्ता और सरकारी वकील का दावा

    याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उसकी मुलाकात शिकायतकर्ता से एक ऑनलाइन डेटिंग एप्लिकेशन के माध्यम से हुई थी और उनका संबंध सहमति से था। उनके वकील ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया कि शिकायतकर्ता ने स्वयं इस संबंध की सहमति को स्वीकार किया था और इस विषय पर एक कविता भी लिखी थी। हालांकि, सरकारी वकील ने तर्क दिया कि इस मामले में विवाह का वादा शामिल है, जो धारा 69 के अंतर्गत अपराध के दायरे में आता है।

    हाई कोर्ट ने क्या कहा

    न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने नए दंड प्रावधान के लागू होने के बाद अदालत के समक्ष आने वाले ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि जब कोई रिश्ता टूट जाता है, तो याचिकाकर्ता के खिलाफ यह अपराध दर्ज हो जाता है कि उसने विवाह का वादा करके शिकायतकर्ता के साथ धोखे से यौन संबंध बनाए। धारा 69 (बीएनएस की) के लागू होने के बाद से इस अदालत में ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह मामला ऐसे ही बढ़ते मामलों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसलिए, अगली सुनवाई की तारीख तक याचिकाकर्ता के खिलाफ जांच पर अंतरिम रोक लगाई जाए।

    अदालत ने आगे की जांच पर रोक लगाते हुए यह टिप्पणी की। चूंकि याचिकाकर्ता न्यायिक हिरासत में था, इसलिए अदालत ने उसे कुछ शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।

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