अंतर्राष्ट्रीय

ईरान की राजधानी तेहरान में हमलों के बाद आसमान में काला धुआं फैल गया ,सांस लेना भी मुश्किल…

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच लंबे समय से बंद रही सीमा खुलने के बाद रविवार को दर्जनों ईरानी नागरिक उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र में दाखिल हुए. लोग इराक के हाजी ओमेरान सस्ती खाद्य सामग्री खरीदने, इंटरनेट का उपयोग करने, परिजनों से संपर्क साधने और काम की तलाश में पहुंचे. यात्रियों के अनुसार, लगातार हो रहे हवाई हमलों और खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने ईरान में आम लोगों का जीवन बेहद कठिन बना दिया है. जैसे ही बॉर्डर खुला, तो लोग अपनी जरूरत की चीजें लेने, संबंधियों से बात करने और काम की तलाश में निकले.

इराक के कुर्द क्षेत्र से सामान से लदे ट्रक हाजी ओमेरान सीमा चौकी के रास्ते ईरान की ओर जाते दिखाई दिए. इससे महंगाई से जूझ रहे ईरानी नागरिकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. हाजी ओमेरान, ईरान-इराक सीमा पर ईराकी कुर्दिस्तान के एरबिल गवर्नरेट की एक बॉर्डर सिटी है.  

अमेरिका और इजराइल के साथ युद्ध शुरू होने से पहले भी ईरानी कुर्द अक्सर इराकी कुर्दिस्तान आते-जाते रहे हैं. दोनों क्षेत्रों के बीच पारिवारिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं. खुली सीमा के कारण व्यापार और लोगों का आवागमन भी नियमित रूप से होता रहा है.अब युद्धग्रस्त हालात में ईरानियों के लिए बाहरी दुनिया से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम इराक का कुर्द क्षेत्र बन गया है.

ईरान की ओर सामान लेकर जा रहे ट्रक चालक खिदेर चोमानी ने कहा, ‘जब यह सीमा बंद थी, तब इसका असर गरीबों, अमीरों और मजदूरों सभी पर पड़ा.’

क्षेत्रीय सैन्य तनाव बढ़ने के बाद इस सीमा को बंद कर दिया गया था. इराकी कुर्द प्रशासन लंबे समय से अपने ईरानी समकक्षों द्वारा इसे फिर से खोलने का इंतजार कर रहा था.

समाचार एजेंसी एपी से बात करने वाले लगभग सभी ईरानी कुर्दों ने अपनी पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध किया. उनका कहना था कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर डर है और आशंका है कि ईरानी खुफिया एजेंसियां मीडिया से बात करने वालों पर नजर रखती हैं.

कुछ लोगों ने दावा किया कि हालिया हमलों में कई ईरानी सैन्य ठिकाने, खुफिया कार्यालय और अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठान नष्ट हो गए हैं. बमबारी के कारण सुरक्षा बलों की गतिविधियां भी सीमित हो गई हैं.ईरान के पिरानशहर शहर की एक कुर्द महिला रविवार को अपने रिश्तेदारों से संपर्क करने और जरूरी सामान खरीदने के लिए सीमा पार कर आई. उसने बताया कि वह करीब 15 किलोमीटर की यात्रा करके हाजी ओमेरान पहुंची.महिला ने कहा, ‘मैं हाजी ओमेरान फोन करने आई हूं. ईरान के अधिकतर हिस्सों में इंटरनेट नहीं है. पिछले 16 दिनों से मेरे रिश्तेदारों को मेरी कोई खबर नहीं मिली है और वे चिंतित हैं.’

उसके अनुसार इंटरनेट बाधित होने के कारण कई ईरानी लोग इराकी सिम कार्ड खरीदते हैं और सीमा के पास जाकर विदेश में रह रहे अपने परिजनों और दोस्तों से संपर्क करते हैं.

वह सीमा के पास बाजार में अपने शहर की तुलना में कम कीमत पर चावल और खाने का तेल जैसे जरूरी सामान खरीदने भी गई थी. उसके मुताबिक युद्ध के कारण महंगाई बढ़ने से ईरान में इन बुनियादी वस्तुओं की कीमतें बहुत ज्यादा हो गई हैं.महिला ने कहा, ‘ईरान में हालात बहुत खराब हैं. लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे, चीजें महंगी हैं और लोग घरों से निकलना नहीं चाहते.’करीब आधे घंटे बाद वह दो प्लास्टिक बैग में सामान लेकर जल्दी-जल्दी वापस ईरान लौट गई, क्योंकि उसके बच्चे घर पर उसका इंतजार कर रहे थे.

ईरान के उरमिया शहर में रहने वाले और इराक के इरबिल में काम करने वाले एक पेंटर ने बताया कि लगातार बमबारी अब आम जीवन का हिस्सा बन गई है. वह हाल ही में अपनी मां को सांत्वना देने के लिए घर लौटा था, जो विस्फोटों से डर गई थीं.

इराकी कुर्द क्षेत्र में काम करने वाले एक अन्य ईरानी कुर्द फैक्टरी मजदूर ने बताया कि हालात इतने खराब हो गए हैं कि उसने उरमिया में रह रहे अपनी पत्नी और तीन बच्चों को भी हाजी ओमेरान बुला लिया. वे रविवार को हाजी ओमेरान पहुंचे और सड़क किनारे एक रेस्तरां में आराम करते देखे गए.

उसने कहा कि लगातार हमलों के कारण सुरक्षा बल अब अपने ठिकानों में नहीं रुकते. कई सैन्य, खुफिया और पुलिस ठिकाने खंडहर में बदल चुके हैं.उसने बताया, ‘वे अब अपने दफ्तरों में नहीं रहते. वे कारों में, पुलों के नीचे, स्कूलों और अस्पतालों में रहते हैं और लगातार इधर-उधर घूमते रहते हैं. उनके ठिकाने नष्ट हो चुके हैं.

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