
रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में क्रिकेट सट्टेबाजी का अवैध कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। खासकर इंडियन प्रीमियर लीग के नजदीक आते ही सटोरियों की गतिविधियां और तेज हो गई हैं। भले ही बड़े सट्टा संचालक सामने नहीं आ रहे हों, लेकिन उनके नेटवर्क से जुड़े लोग शहर के अलग-अलग इलाकों, गली-मोहल्लों, किराए के मकानों और होटलों से खुलेआम सट्टा चला रहे हैं।
देश-विदेश के बड़े सट्टा नेटवर्क का सीधा कनेक्शन
हालांकि पुलिस द्वारा समय-समय पर कार्रवाई कर कई सट्टा कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन जमानत मिलने के बाद ये लोग दोबारा उसी नेटवर्क को सक्रिय कर लेते हैं। यही कारण है कि इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगाना चुनौती बना हुआ है। लगातार कार्रवाई के बावजूद सट्टा माफियाओं में कानून का डर कम होता नजर आ रहा है, जिससे यह समस्या और गंभीर होती जा रही है। राजधानी के कई प्रमुख इलाकों जैसे शुक्रवारी बाजार, गुढ़ियारी, समता कॉलोनी, कटोरा तालाब, शंकर नगर, शैलेन्द्र नगर, न्यू राजेंद्र नगर, अमलीडीह और भाठागांव सहित कई पॉश कॉलोनियों में किराए के फ्लैटों के जरिए सट्टे का संचालन किया जा रहा है। अब यह नेटवर्क केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्स के जरिए संचालित हो रहा है, जिनका सीधा जुड़ाव देश-विदेश के बड़े सट्टा नेटवर्क से बताया जाता है।
सेटअप का खुलासा
सूत्रों के मुताबिक, सट्टेबाजों के तार मुंबई, दिल्ली जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ दुबई तक जुड़े हुए हैं। विवाद या पैसों के लेन-देन में गड़बड़ी होने पर इन नेटवर्क से जुड़े लोग धमकी देने जैसे तरीकों का भी इस्तेमाल करते हैं। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने इस कारोबार को और आसान बना दिया है। सटोरिये अब मोबाइल, लैपटॉप और विभिन्न ऑनलाइन एप्स के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन कर रहे हैं। कुछ मामलों में इंस्टेंट बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें कुछ ही मिनटों में खोलकर भारी रकम का ट्रांजैक्शन किया जाता है और फिर तुरंत बंद कर दिया जाता है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए इन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। हालांकि बैंकिंग सिस्टम भी अब ऐसे संदिग्ध लेन-देन पर नजर रखने लगा है। सट्टेबाज अब एक ही स्थान पर टिके रहने के बजाय लगातार अपने ठिकाने बदलते रहते हैं। वे अलग-अलग इलाकों में किराए के मकान या होटल लेकर अपना नेटवर्क चलाते हैं, जिससे पुलिस की पकड़ से बचना आसान हो जाता है। हाल के कई मामलों में इसी तरह के सेटअप का खुलासा हुआ है।
आर्थिक और मानसिक रूप से प्रभावित
यह नेटवर्क अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि तिल्दा, भाटापारा, धमतरी, कांकेर, जगदलपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई और राजनांदगांव जैसे जिलों और कस्बों तक फैल चुका है। बड़े सट्टा संचालक अपने गुर्गों के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंच बनाकर लोगों को इसमें शामिल कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अवैध कारोबार युवाओं के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है, क्योंकि यह उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से प्रभावित करता है। ऐसे में जरूरत है कि पुलिस और प्रशासन सट्टा नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचकर कड़ी कार्रवाई करे, ताकि इस समस्या पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सके और समाज को इसके दुष्प्रभाव से बचाया जा सके।



