Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • रायपुर-मंत्रिपरिषद की बैठक 05 अगस्त को
    • पांच दिवसीय संभागीय सरस मेला का उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने किया उद्घाटन
    • ​महानदी के तट पर आस्था का महाकुंभ: बनारस की तर्ज पर गूंजे वैदिक मंत्र
    • सफलता की कहानी-तेन्दूपत्ता संग्रहण की नई पहल से अबुझमाड़ के 22 गांवों को मिला लाभ
    • वन मंत्री श्री केदार कश्यप की पहल पर दुर्लभ पैंगोलिन का सुरक्षित रेस्क्यू
    • पुनर्वास नीति के तहत नक्सली हिंसा के 13 पीड़ितों को 32 लाख रुपये की सहायता
    • पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने युवाओं को दिलाया नशामुक्त भारत का संकल्प, विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का किया आह्वान
    • विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया ‘सत्याग्रह‘ किताब का विमोचन
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Tuesday, August 4
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»खाड़ी देशों के युद्ध के परिणाम और भारत की स्थिति
    लेख-आलेख

    खाड़ी देशों के युद्ध के परिणाम और भारत की स्थिति

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMarch 29, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    खाड़ी देशों के युद्ध के भयानक परिणाम न केवल संबंधित क्षेत्र के लोगों को, बल्कि दुनिया के सभी देशों के लोगों को भुगतने होंगे। यह प्रक्रिया बड़े स्तर पर शुरू भी हो चुकी है। अमरीका-इसराईल ने बिना किसी उकसावे या उचित कारण के ईरान पर हमला बोल दिया। युद्ध छेडऩे का बहाना बेशक ईरान के पास मौजूद परमाणु हथियारों के भंडारों से अमरीका-इसराईल को संभावित खतरे का बनाया गया है, पर अब न केवल दुनिया भर के लोगों, बल्कि अमरीका के भीतर राष्ट्रपति के करीबी मित्रों ने भी यह बात खुलेआम स्वीकार कर ली है कि ईरान से अमरीका को कोई खतरा नहीं था। सब जानते हैं कि डोनाल्ड ट्रम्प ने यह युद्ध अपने चहेते इसराईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की उत्तेजना भरी सलाहों से शुरू किया है।

    अमरीकी राष्ट्रपति की तमाम धमकियों के बावजूद ‘नाटो’ के सांझेदार देशों ने अमरीका का साथ देने और इस युद्ध में शामिल होने से साफ इंकार कर दिया है। इससे भी आगे, कमाल की बात यह पता चली है कि ट्रम्प ने यह युद्ध अमरीकी संसद से आवश्यक मंजूरी लेने की बजाय, अपने दामाद, बेटी, बेटे और एक मित्र की सलाह पर छेड़ा है। जब दुनिया के सबसे शक्तिशाली समझे जाने वाले देश अमरीका की कमान ट्रम्प जैसे मूर्ख के हाथ में हो, तो दुनिया के लोग शांति से मिल-जुल कर रहने के बारे में कैसे सोच सकते हैं?  इस युद्ध से दुनिया भर के देशों की बहुसंख्यक आबादी को खाद्य वस्तुओं की भारी कमी, तेल-गैस और इससे संबंधित वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि, महंगाई और बेरोजगारी जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। युद्ध के कारण हजारों बेगुनाहों की मौतें (इनमें ईरान के स्कूल में पढऩे वाली सैंकड़ों छोटी बच्चियां भी शामिल हैं), मानवीय और प्राकृतिक संसाधनों की भारी तबाही और पर्यावरण में फैल रहा जहर पूरी मानवता के लिए जी का जंजाल बनेगा। इस युद्ध ने दुनिया के सारे कायदे-कानून ताक पर रखकर किसी भी स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र (जैसे इराक और वेनेजुएला) पर हमला करके कब्जा करने की अमरीका की लालसा को भी उजागर किया है।

    इस युद्ध ने भारत की मोदी सरकार द्वारा अमरीकी साम्राज्यवाद के साथ की गई रणनीतिक सांझेदारियों के परिणामस्वरूप अपनाई गई वर्तमान विदेश नीति का दुनिया भर में दीवाला निकाल दिया है। भारत ने 2 सैन्य गुटों (‘नाटो’ और ‘वारसा’) से अलग रहकर गुटनिरपेक्ष देशों का सांझा मंच खड़ा करने में बहुमूल्य योगदान दिया था। परंतु अब भारत ने डटकर ईरान के साथ खड़े होने की बजाय अमरीका-इसराईल युद्धबाज गुट का पक्ष लिया है। डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले समय में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के लोगों का ऐसा मजाक उड़ाया, जिसे कोई भी स्वाभिमानी स्वतंत्र देश कतई बर्दाश्त नहीं कर सकता। इससे दुनिया भर में भारतीय राजनेताओं की नपुंसक राजनीति भी बेपर्दा हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रम्प के इन अपमानजनक बयानों के खिलाफ अपनी जुबान से एक शब्द तक नहीं बोला। भारत के निमंत्रण पर नौसेना के अभ्यास में हिस्सा लेने आए ईरान के समुद्री जहाज में सवार 97 सैनिकों को अमरीकी सेनाओं द्वारा हमला करके तब मार दिया गया, जब वे अपने देश ईरान वापस लौट रहे थे। अमरीका की इस अत्यंत निंदनीय कार्रवाई की निंदा करना तो दूर, भारत द्वारा सैनिकों की मौत पर शोक का औपचारिक प्रकटीकरण तक नहीं किया गया। 

    अमरीका के साथ मोदी सरकार की दोस्ती का ‘परिणाम’ भारत-अमरीका के बीच होने वाले ‘मुक्त व्यापार समझौते’ में भारत के लिए कई प्रतिकूल शर्तें स्वीकार किए जाने के भयानक नतीजे भारत के किसानों, छोटे और मध्यम श्रेणी के उद्योगपतियों और व्यापारियों की तबाही के रूप में सामने आने वाले हैं। स्पष्ट है कि अमरीका अपने किसानों को भारी सबसिडी देकर तैयार की गई कृषि वस्तुएं जैसे मक्का, सोयाबीन का तेल, फल, सूखे मेवे आदि भारतीय बाजार में उतारकर हमारी किसानी को खेती से बाहर कर देने की तैयारियां किए बैठा है। हमारा देश साम्राज्यवादी गुलामी के ‘नव-उपनिवेशवादी’ दौर में पहुंचने जा रहा है, जहां सरकार तो भारतीय लोगों की ही होगी, परंतु आॢथक नीतियां, व्यापारिक और राजनीतिक फैसले अमरीका की मंजूरी से ही लिए जाएंगे। इसकी ताजा मिसाल खाड़ी युद्ध के दौरान ऊर्जा की कमी के मद्देनजर अमरीका द्वारा बड़े अहंकारी ढंग से भारत को सिर्फ 30 दिनों के लिए रूस से तेल खरीदने की इजाजत दिए जाने से मिलती है। ङ्क्षचता इस बात की है कि भारत को साम्राज्यवादी देश अमरीका और इसके सांझेदारों द्वारा बनाए गए आर्थिक और राजनीतिक ‘चक्रव्यूह’ से बाहर निकलने के लिए हमें आजादी की एक और जंग लडऩी पड़ सकती है। यह जंग 1947 में प्राप्त की गई आजादी के लिए लड़े गए लंबे राष्ट्रीय मुक्ति संग्राम की तुलना में कहीं अधिक कठिन और खतरनाक होगी।-मंगत राम पासला

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    आंदोलन की हिंसा, उच्चतम न्यायालय का मत उचित

    August 1, 2026

    क्या सचमुच नारीवाद हार रहा है?

    July 31, 2026

    पीएम विद्यालक्ष्मी योजना-भारत में शैक्षिक समावेशिता को बढ़ावा देना

    July 30, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.