मजदूरों की मौत पर लापरवाह ठेकेदार पर हुई सख्त कार्रवाई

बरनाला : जिला बरनाला के गांव फरवाही में एक निर्माणाधीन मकान के अचानक ढह जाने से मलबे के नीचे दबकर तीन बेकसूर मजदूरों की मौत के मामले में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला पुलिस ने इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदार संबंधित ठेकेदार के खिलाफ लापरवाही बरतने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है। वहीं, श्रम विभाग (लेबर डिपार्टमेंट) ने भी मृतकों के परिवारों को मुआवजा दिलाने के लिए ठेकेदार को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
गांव फरवाही में विशाल गोयल नामक व्यक्ति के मकान को ऊंचा उठाने का काम चल रहा था। यह तकनीक काफी जोखिम भरी होती है, जिसमें जैक की मदद से पूरे ढांचे को ऊपर उठाया जाता है। रविवार की रात काम खत्म करने के बाद मजदूर उसी निर्माणाधीन ढांचे के नीचे सो रहे थे। सोमवार सुबह अचानक मकान का ढांचा ढह गया और गहरी नींद में सो रहे मजदूर मलबे के नीचे दब गए। मलबे के भारी बोझ के कारण तीन मजदूरों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलते ही बरनाला के डिप्टी कमिश्नर हरप्रीत सिंह ने तुरंत संज्ञान लिया। उनके निर्देशों पर तहसीलदार बरनाला कुलदीप सिंह और असिस्टेंट लेबर कमिश्नर नरेश गर्ग पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि ठेकेदार ने सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की थी। मजदूरों को जोखिम भरे ढांचे के नीचे सुलाना और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न करना उसकी बड़ी लापरवाही मानी गई।
जांच के आधार पर, थाना सदर बरनाला में ठेकेदार रणजीत सिंह, निवासी मोगा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 (1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इस हादसे में जान गंवाने वाले तीनों मजदूर जिला मोगा से संबंधित थे, जो अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए बरनाला आए थे। मृतकों की पहचान वरिंदर उर्फ बॉबी निवासी गांव दुसांझ जिला मोगा, रजनीश सिंह निवासी गांव डाला जिला मोगा, प्रिंस निवासी मोगा के रूप में हुई है। इन युवा मजदूरों की मौत की खबर फैलते ही गांव फरवाही और उनके पैतृक गांवों में शोक की लहर दौड़ गई है।
मुआवजे के लिए श्रम विभाग की पहल
हादसे की गंभीरता को देखते हुए श्रम विभाग ने मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाए हैं। असिस्टेंट लेबर कमिश्नर नरेश गर्ग ने बताया कि लेबर एक्ट के तहत ठेकेदार को नोटिस जारी किया जा रहा है। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि पीड़ित परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा मिले। इसके साथ ही ठेकेदार के खिलाफ चालान की कार्यवाही भी अमल में लाई जा रही है।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
शहर के बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मकानों को ऊंचा उठाने या स्थानांतरित करने वाली तकनीक में अक्सर सुरक्षा नियमों को ताक पर रख दिया जाता है। इस तरह के हादसों को रोकने के लिए प्रशासन को सख्त गाइडलाइंस जारी करनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी और गरीब मजदूर की जान न जाए।



