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मैरी कॉम और भूटिया ने कहा: “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स कैसे प्रतिभा और उत्कृष्टता के बीच की खाई को पाट सकते हैं”

  • भविष्य के चैंपियन तैयार करने के लिए दोनों दिग्गजों ने कहा कि भारतीय परिवारों को बच्चों को स्क्रीन से दूर रखकर मैदान में भेजना चाहिए
  • भूटिया ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को शुरुआती दौर में ही चीन और अमेरिका जैसे देशों की तरह सुनियोजित प्रशिक्षण से गुजरना चाहिए
  • मैरी कॉम ने केंद्र सरकार से अपील की कि भविष्य में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में और अधिक खेलों को शामिल किया जाए, ताकि आदिवासी खिलाड़ियों की क्षमता को निखारा जा सके

रायपुर- छह बार की विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता एमसी मैरी कॉम और भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने शुक्रवार को यहां खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के दौरान संवाददाताओं से बातचीत करते हुए जमीनी स्तर पर निवेश और संरचित विकास प्रणाली के महत्व पर जोर दिया।

भविष्य के चैंपियन तैयार करने के लिए दोनों दिग्गज खिलाड़ियों ने कहा कि भारतीय परिवारों को बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से दूर रखने और उन्हें विभिन्न खेलों का अनुभव लेने के लिए मैदान में भेजने की जरूरत है।

भारतीय फुटबॉल के सबसे प्रतिष्ठित खिलाड़ियों में से एक भूटिया ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KIBG) जैसे पहल एक मजबूत शुरुआत जरूर हैं, लेकिन दीर्घकालिक सफलता के लिए देश में खेलों की बुनियाद को और मजबूत करना बेहद जरूरी है। अपने करियर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उस समय जब खेल ढांचा अभी विकसित हो रहा था, तब भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने युवा खिलाड़ियों को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

भूटिया ने कहा, “मैं साई का प्रोडक्ट रहा हूँ। 1986 के पहले बैच का साई प्रोडक्ट। जमीनी स्तर पर निवेश करना बहुत जरूरी है, लेकिन हम अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं और केवल शीर्ष स्तर पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं।”

साथ जी भूटिया ने खेलों की पिरामिड संरचना के आधार को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में, लेकिन उसे निखरने के लिए सही माहौल और व्यवस्था की जरूरत होती है।
वह कहते हैं, “आदिवासी समुदायों में स्वाभाविक रूप से खेल प्रतिभा बहुत अधिक होती है, और हमने इसे खासकर पूर्वोत्तर भारत में साफ तौर पर देखा है, जहां से कई खिलाड़ियों ने भारत का शानदार प्रतिनिधित्व किया है और हमें विश्व मंच पर पहुंचाया है। युवाओं को मंच देना बहुत जरूरी है। मुझे लगता है कि आने वाले समय में आदिवासी समुदायों से और भी अधिक खिलाड़ी उभरकर सामने आएंगे। यह तो बस शुरुआत है, आने वाले वर्षों में हम आदिवासी पृष्ठभूमि से और भी ज्यादा प्रतिभा देखेंगे।”

भूटिया ने यह भी बताया कि किसी खिलाड़ी के विकास में माहौल और अवसर की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, और अपने शुरुआती दिनों को याद किया।

वह बोले, “देखिए, जब मैं अपने बारे में बात करता हूँ, तो हमेशा कहता हूँ कि जब आप पूर्वोत्तर से होते हैं, तो आप दो ही चीजें करते हैं—फुटबॉल या संगीत। यही मेरा माहौल था। बचपन में मेरे आसपास के बच्चे कोई और खेल नहीं खेलते थे। सिक्किम में हर गांव और हर कस्बे में फुटबॉल एक संस्कृति की तरह था।”

उनके विचारों से सहमति जताते हुए मैरी कॉम ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) की सराहना की और इसे एक परिवर्तनकारी पहल बताया, जो लंबे समय से चली आ रही अवसर और जागरूकता की कमी को दूर कर सकती है।

2012 लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज़ ने कहा, “सबसे पहले, मैं छत्तीसगढ़ सरकार को बधाई देना चाहती हूँ। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत यहीं से हुई है और मुझे इस पर बहुत खुशी है। मुझे इस पहल का समर्थन करने के लिए आमंत्रित किया गया और मैं पूरे दिल से इसका समर्थन करती हूँ, क्योंकि हमारे आदिवासी समुदायों में अपार क्षमता है। पहले उन्हें इस तरह के मंच नहीं मिलते थे और न ही पर्याप्त जागरूकता थी। शायद यही कारण था कि कई प्रतिभाशाली बच्चे आगे नहीं बढ़ पाए।”

मणिपुर की इस स्टार मुक्केबाज़ ने यह भी बताया कि सरकार द्वारा समर्थित कार्यक्रमों ने अब परिदृश्य को बदलना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, “लेकिन आज, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के खेलो इंडिया और फिट इंडिया कार्यक्रमों की बदौलत बच्चे धीरे-धीरे आगे आ रहे हैं, भाग ले रहे हैं और देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह भारत के खेलों के भविष्य के लिए बहुत बड़ी बात है।”

मैरी कॉम ने दोहराया कि भले ही अवसर बढ़े हैं, लेकिन सफलता के लिए अनुशासन और धैर्य सबसे महत्वपूर्ण हैं, और उन्होंने युवा खिलाड़ियों से अपील की कि वे उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाएं।

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