Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • नन्हे दिल को मिली नई धड़कन,’चिरायु योजना’ ने धमतरी के भाव्यांश को दिया नया जीवन
    • सेवा_संकल्प_अभियान”
    • 100 साल बाद खोजी गई बिल्ली की नई प्रजाति, तेंदुए जैसी खाल; वजन घरेलू बिल्ली से भी कम
    • गणपति विसर्जन के दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान  हुए भावुक,बप्पा को विदाई देते समय उनकी आंखों से छलक पड़े आंसू…
    • पूर्व सरपंच के घर से 70 तोला सोना और ढाई किलो चांदी उड़ाई, दीवार कूदकर फरार हुए चोर…
    • ‘वाइब’ ने पहले दिन कमाए ₹2.25 करोड़,‘मडगांव एक्सप्रेस’ की ओपनिंग कलेक्शन को पछाड़ा
    • हाईकोर्ट में एक हिंदू और मुस्लिम लड़कियों का समलैंगिक जोड़ा सुरक्षा की मांग लेकर पहुंचा, हाईकोर्ट ने मामले पर कह दी बड़ी बात…
    • सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर राजा डी किंग यानी राकेश त्रेहान 22 सितंबर को चंडीगढ़ में आईफोन लंगर का करेंगे आयोजन…
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Saturday, September 19
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»धर्म आस्था»राहु-केतु कान छिदवाने से शांत होते हैं ? जानिए कर्णवेध संस्कार के फायदे
    धर्म आस्था

    राहु-केतु कान छिदवाने से शांत होते हैं ? जानिए कर्णवेध संस्कार के फायदे

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMay 21, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    सनातन परंपरा में 16 संस्कारों का विशेष महत्व बताया गया है और कर्णवेध संस्कार उनमें से एक माना जाता है। आज भले ही लोग इसे फैशन या सामान्य रस्म समझें, लेकिन ज्योतिष और वेदों में इसे मानसिक संतुलन, ऊर्जा प्रवाह और ग्रहों के प्रभाव से जोड़कर देखा गया है। मान्यता है कि सही समय पर कान छिदवाने से राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और बुध ग्रह मजबूत होता है, जिससे याददाश्त, संवाद क्षमता और एकाग्रता बेहतर हो सकती है।

    राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम करने की मान्यता

    राहु-केतु हमारे ज्योतिषीय नक्शे में छाया ग्रह माने जाते हैं। कहते हैं, अगर इनका असर नकारात्मक हुआ तो मन में डर, कन्फ्यूजन, बेचैनी और फैसले लेने की परेशानी बढ़ सकती है। लोगों का विश्वास है कि कान छिदवाने से शरीर की ऊर्जा लाइनें संतुलित होती हैं और इन ग्रहों की परेशानी थोड़ी हल्की लगने लगती है। कई ज्योतिषाचार्य यही मानते हैं कि इससे ध्यान केंद्रित रहता है और मन को स्थिर करने में मदद मिलती है।

    बुध ग्रह को मजबूत करने से जुड़ा है संबंध

    अब बात करें बुध ग्रह की ये हमारी बुद्धि, तर्क और संवाद की क्षमता का स्वामी माना जाता है। मान्यता यही है कि कान छिदवाने से बुध ग्रह की ताकत बढ़ती है, इससे सोचने-समझने और बोलने में फर्क महसूस होता है। खासकर पढ़ने-लिखने वाले, शिक्षक या दिमागी मेहनत करने वालों के लिए इसे आज भी फायदेमंद माना जाता है। कई घरों में बच्चों के पढ़ाई शुरू करने से पहले कर्णवेध करवाना अब भी एक आम बात है।

    सोना और तांबा पहनने की परंपरा क्यों है खास?

    कर्णवेध के बाद सोने या तांबे की बालियां पहनाने की प्रथा भी खास है। सोना हमेशा से सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक रहा है, समृद्धि का संकेत। तांबा शरीर की ऊर्जा संतुलन में मदद करता है आयुर्वेद भी ये बात दोहराता है। इसलिए पुराने जमाने में बच्चों को सोने या तांबे के झुमके पहनना आम था।

    सही मुहूर्त में ही क्यों कराया जाता है कर्णवेध?

    एक और जरूरी बात हर संस्कार की तरह कर्णवेध के लिए भी सही शुभ मुहूर्त चुना जाता है। लोग मानते हैं कि यदि नक्षत्र, तिथि और दिन अनुकूल हों तो संस्कार का असर ज्यादा सकारात्मक और टिकाऊ रहता है। इसी वजह से कई परिवार अपने पंडित या ज्योतिषाचार्य से राय जरूर लेते हैं।

    धार्मिक ही नहीं, स्वास्थ्य से भी जोड़ा जाता है संबंध

    कान छिदवाने को धार्मिक ही नहीं, सेहत से भी जोड़कर देखा गया है। पारंपरिक मान्यताओं के मुताबिक कान के कुछ बिंदु ऐसी नसों और ऊर्जा केंद्रों से जुड़े हैं, जिनका सीधा असर शरीर और दिमाग पर पड़ता है। यही कारण है कि आयुर्वेद और एक्यूप्रेशर दोनों में कान की खास जगह को अहमियत दी जाती है।

    आज भी क्यों कायम है यह परंपरा?

    सच कहें तो मॉडर्न साइंस इन सभी बातों की पुष्टि नहीं करता। मगर भारतीय समाज में आस्था और विश्वास के चलते ये परंपरा आज भी बरकरार है। समय बदला है, बहुत सी परंपराएं फीकी पड़ी हैं, लेकिन कर्णवेध आज भी धूमधाम से किया जाता है। किसी के लिए ये धार्मिक अहमियत रखता है, किसी के लिए मानसिक और ऊर्जा से जुड़ा विकास।

    इसीलिए कान छिदवाने की रस्म सिर्फ सजावट की बात नहीं रही ये ज्योतिष, आध्यात्मिकता और शरीर की जीवन ऊर्जा से गहराई से जुड़ी परंपरा है, जिसे आज भी लोग खास मानते हैं।

    अस्वीकरण : इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    कल मनाई जाएगी राधा अष्टमी, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

    September 18, 2026

    विश्वकर्मा पूजा कब है, 17 या 18 सितंबर? जानें सही तारीख, मुहूर्त, शुभ योग

    September 16, 2026

    सोमवार को गणेश चतुर्थी, गणपति को कितने दिन घर में रखना चाहिए? जानें डेढ़, 3, 5, 7 या 10 दिन की परंपरा

    September 12, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.