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    Home»संपादकीय»बंदर अब्बास बंदरगाह पर हमले, हज के बाद जंग!
    संपादकीय

    बंदर अब्बास बंदरगाह पर हमले, हज के बाद जंग!

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMay 28, 2026
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    अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ‘अच्छी खबर’ तो दे नहीं सके और न ही ईरान के साथ समझौता कर पाए, लेकिन उनके लड़ाकू विमानों ने ईरान के नौसेना बेस पर तीन हमले जरूर कर दिए। इस तरह ट्रम्प ने युद्धविराम तुड़वा दिया। अमरीकी सेना ने ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह पर हमले कर ईरानी स्पीड नौकाओं को समंदर में डुबो दिया। मिसाइल लॉन्च साइट्स पर भी हवाई हमले कर उन्हें नष्ट कर दिया गया। अमरीकी सेना की दलील है कि ईरानी नौकाएं समंदर में बारूदी सुरंगें बिछा रही थीं, लिहाजा आत्मरक्षा में अमरीका को हमले करने पड़े। इन हमलों और धमाकों में ईरानी आईआरजीसी के 4 जवान हताहत हुए और कुछ घायल भी हुए हैं। ईरान ने इसे युद्धविराम का ‘साक्षात उल्लंघन’ करार दिया है और अमरीका को ‘महान शैतान’ माना है। ईरान बेहद गुस्से में है। चूंकि यह ‘पवित्र हज’ का दौर है, दुनिया भर से 15 लाख से अधिक जायरीन हज यात्रा के लिए मक्का पहुंच चुके हैं। भारत के जायरीनों (तीर्थयात्रियों) का अधिकृत कोटा भी 1.75 लाख से ज्यादा का है, लिहाजा ईरान किसी संभावित युद्ध के दोबारा आगाज के मद्देनजर खामोश है, लेकिन उसने हमलों की पुष्टि की है। युद्धविराम के दौरान अमरीका ने ऐसे हमले किए हैं, लिहाजा युद्धविराम टूट चुका है। सवाल है कि क्या हज के बाद युद्ध नए सिरे से छिड़ेगा? यह बेहद गंभीर, संवेदनशील, मानवीय सवाल है, क्योंकि पूरा विश्व इससे प्रभावित हुआ है। हाहाकार मचा है। ऊर्जा के अलावा खाद्य संकट, उर्वरक संकट, माल के आयात-निर्यात का संकट और अंतत: भुखमरी का संकट इस युद्ध के नतीजतन ही है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और विश्व बैंक ‘महामंदी’ की चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन अमरीका और ईरान वैश्विक तबाही को आमादा हैं। अमरीका ने आदतन फिर दोगला प्रहार किया है। एक ओर कतर की राजधानी दोहा में कथित मध्यस्थ देश शांति-समझौते की रूपरेखा पर बातचीत कर रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर अमरीकी सेना ने ईरानी पक्ष पर हमले किए हैं? यह किस किस्म की कूटनीति या शांति-संवाद हैं? राष्ट्रपति ट्रम्पदावा करते रहे हैं कि ईरान के साथ अमरीका की 95 फीसदी सहमति बन चुकी है।

    शेष 5 फीसदी पर बातचीत जारी है, लेकिन साथ में यह धमकी भी देते रहे हैं कि यदि ईरान ने करार नहीं किया, तो पहले से भी भयंकर हमले किए जाएंगे। ईरान ने राष्ट्रपति ट्रम्प के दावों, सहमतियों और सवंर्धित यूरेनियम संबंधी बयानों को सिरे से खंडित किया है। अब हमलों के बाद और बकरीद के मौके पर ईरान के सुप्रीम लीडर मुज़्तबा खामेनेई का संदेश टीवी पर पढ़ा गया है, जिसमें उन्होंने ट्रम्प को चेतावनी दी है कि अब खाड़ी देश अमरीकी सैन्य ठिकानों की ‘ढाल’ नहीं बनेंगे। अब खाड़ी का यह इलाका अमरीका के लिए ‘सुरक्षित पनाहगाह’ नहीं रहा है। खामेनेई ने मुस्लिम देशों को एकजुट होने और नई विश्व-व्यवस्था बनाने की अपील भी की है। हमलों के बाद ईरान ने पलटवार कर अमरीका के एम.क्यू.-9 ड्रोन (कीमत करीब 250 करोड़ रुपए) और आर.क्यू.-4 हॉक ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। अमरीका के बेशकीमती एफ-35 फाइटर जेट पर भी मिसाइल से हमला किया गया है। इससे ईरान और सुप्रीम लीडर के मजबूत और आक्रामक मंसूबों को पढ़ा जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के आकलन हैं कि हज के बाद, यानी आगामी 72 घंटों में, ईरान युद्ध नए सिरे से शुरू हो सकता है। यह भी आकलन है कि 3-4 महीने युद्धविराम का नाटक करने के बाद अमरीका सितंबर-नवंबर के दरमियान फिर हमला कर सकता है। तब तक राष्ट्रपति ट्रम्प पर घरेलू दबाव, मध्यावधि चुनावों का तनाव और अमरीका की आर्थिक स्थिति के मद्देनजर जन-विरोध उतना नहीं रहेगा, जितना अब है। दोनों देशों के बीच समझौते के आसार बहुत कम हैं, क्योंकि यूरेनियम, ईरान की जब्त संपत्तियों, पाबंदियों, हमले की क्षतिपूर्ति, होर्मुज जलमार्ग आदि अहम मुद्दे यथावत अनसुलझे रहे हैं। उधर राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक नया खेल शुरू कर दिया है कि सभी खाड़ी देश और वार्ता में जुटे मुस्लिम देश ‘अब्राहम समझौते’ पर दस्तखत करें और इजरायल को मान्यता दें। खाड़ी के अधिकतर देश सन्नाटे में हैं, क्योंकि वे इजरायल के साथ किसी भी तरह के संबंधों के पक्षधर नहीं हैं। यह युद्ध कब तक जारी रहेगा, यह बात अधिकतर अमरीका के रुख पर निर्भर करती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समझना कठिन है, क्योंकि वह कभी युद्धविराम की घोषणा कर देते हैं, और कभी ईरान पर हमले जारी रखने की बात करने लग जाते हैं। अनिश्चय की जैसी स्थिति बनी हुई है।

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