Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपनी माँ के नाम पर लगाया पीपल का पौधा, वन महोत्सव-2026 का हुआ शुभारंभ
    • रांची में प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत के लिए CM हेमंत ने बनाई 4 मंत्रियों की कमिटी
    • डीपफेक और बाल शोषण पर घिरा मेटा: जुकरबर्ग ने सरकार से मांगी माफी
    • विश्व स्तनपान सप्ताह : स्वास्थ्य मंत्री करेंगे राज्य स्तरीय कार्यक्रम की अध्यक्षता,छत्तीसगढ़ में स्थापित होगा पहला मातृ दूध कोष (मदर मिल्क बैंक)
    • वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने किया सम्मानित, 13,912 आवेदनों के सफल निराकरण से बनाया रिकॉर्ड
    • ‘मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना’के तहत तिल्दा की विभिन्न ग्राम पंचायतों में 41 लाख से 10 नए रंगमंचों का निर्माण
    • डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने बिलासपुर केंद्रीय जेल का किया आकस्मिक निरीक्षण
    • Breaking : राज्यसभा से जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल पास
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Wednesday, August 5
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»संपादकीय»देश का ‘अपारंपरिक पीएम’
    संपादकीय

    देश का ‘अपारंपरिक पीएम’

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJune 11, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    नरेंद्र मोदी बीते 12 लंबे सालों से, यानी 4400 दिनों से, निरंतर तीसरी बार देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं। यह कोई सामान्य घटना या राजनीतिक, लोकतांत्रिक स्वीकृति ही नहीं है, बल्कि देश के जनमत का निष्कर्ष है। भारत का प्रधानमंत्री बनना अपने आप में हिमालय लांघने जैसा कीर्तिमान है। यह लोकतंत्र के सशक्तिकरण का भी प्रमाण है। भारत जैसे बहुक्षेत्रीय, बहुभाषायी, बहुसांस्कृतिक, बहुनस्लीय, बहुधर्मी देश का इतने लंबे कार्यकाल तक प्रधानमंत्री बने रहना विविधता की मुहर भी है। लेकिन प्रधानमंत्रियों की आपसी तुलना नहीं की जानी चाहिए। न तो जवाहर लाल नेहरू ‘महानतम’ थे और न ही नरेंद्र मोदी ‘कमतर महान’ हैं। वे लोकतंत्र के जनादेश के वाहक हैं और देश का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रधानमंत्रियों की राजनीतिक परिस्थितियां, कालखंड भिन्न होते हैं, लिहाजा तुलना बुनियादी और शास्त्रीय आधार पर गलत है। देश में वीपी सिंह, चंद्रशेखर, देवगौड़ा, इंद्रकुमार गुजराल सरीखे प्रधानमंत्री भी हुए हैं, जिन्हें राजनीतिक कारणों से एक साल का कार्यकाल भी नसीब नहीं हुआ, लेकिन वे भी प्रधानमंत्रियों की जमात में शामिल हैं। उनके नाम भी राष्ट्रीय उपलब्धियां दर्ज होंगी! नेहरू इसलिए सर्वाधिक उल्लेखनीय रहे हैं, क्योंकि उन्हें ‘स्वतंत्र भारत’ का सबसे पहले नेतृत्व करने का अवसर मिला। उन्हें राष्ट्रीय निर्माण के ‘बुनियादी पत्थर’ रखने का दायित्व मिला। उन्होंने आईआईटी, आईआईएम, एम्स, भारी उद्योग, भाखड़ा जैसे बांध, रेलवे के शुरुआती विस्तार आदि को आकार दिया। बेशक प्रधानमंत्री मोदी ने उनका खूब विस्तार कराया। आज देश के प्रमुख राज्यों में आईआईटी और एम्स मौजूद हैं। सभी समान स्तरीय हैं। नेहरू को ‘सुई’ से शुरुआत करनी पड़ी। उन्होंने भी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गलतियां कीं, लेकिन यह तो इनसानी फितरत है। लिहाजा प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया, उन्हें पीछे कर दिया, ऐसी हुंकारों से भाजपाई मंत्रियों, नेताओं और काडर को बचना चाहिए। नेहरू के कालखंड में देश की जीडीपी एक ट्रिलियन डॉलर से बहुत कम थी और मोदी को जब सत्ता सौंपी गई, तो जीडीपी 2 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुकी थी और आज 12 साल बाद हम 4 ट्रिलियन डॉलर की, विश्व की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था हैं।

    आजादी के बाद देश की आबादी करीब 5 गुना अधिक हो चुकी है, लिहाजा जीडीपी भी उसी अनुपात में बढ़ रही है। दरअसल कई मायनों में प्रधानमंत्री मोदी ‘अपारंपरिक प्रधानमंत्री’ हैं। उन्होंने जन-धन बैंक खाते, उज्ज्वला गैस, शौचालय, सरकारी मदद से पक्के घर, हर नल में जल, आयुष्मान भारत, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करना, तीन तलाक संबंधी कानून, वैश्विक महामारी कोरोना के संदर्भ में 220 करोड़ से अधिक कोरोना टीके की खुराक मुफ्त देना, कोरोना टीके का भारत में ही आविष्कार आदि ‘अपारंपरिक’ कार्यक्रम और योजनाएं हैं। इनकी व्यवस्था में खामियां हैं, विसंगतियां हैं, जनता को शिकायतें हैं, लेकिन ये नीतिगत अभियान निरंतर जारी हैं। ऐसा किसी भी पूर्व प्रधानमंत्री ने नहीं सोचा। प्रधानमंत्री मोदी को इसका राजनीतिक लाभ मिलता रहा है। कोरोना के दौर से 80 करोड़ से अधिक भारतीयों को 5 किलो मुफ्त राशन हर महीने मुहैया कराया जा रहा है और 2029 तक जारी रहेगा, लेकिन आर्थिक विशेषज्ञ और जानकार सवाल करते रहे हैं कि यदि इन (अब 81.35 करोड़) लोगों को मुफ्त राशन न बांटा जाए, तो क्या ये लोग भूखे मर जाएंगे? यदि देश की यही स्थिति है, तो गरीबी के आंकड़ों का यथार्थ भयावह है। फिर 25 करोड़ लोगों को गरीबी-रेखा से बाहर निकालने के दावे बेमानी हैं। हम मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर निरंतर सवाल उठाते रहे हैं। यह हमारा संवैधानिक, लोकतांत्रिक जनादेश है। प्रधानमंत्री मोदी के कालखंड में नक्सलवाद लगभग समाप्त कर दिया गया है। आतंकवाद कभी-कभार सांसें लेने लगता है, अलबत्ता अलगाववाद के साथ उसका भी सूपड़ा साफ कर दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी को 32 देशों ने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा है, यह भारत का ही सम्मान है। प्रधानमंत्री मोदी ने 15 से अधिक देशों की संसद को संबोधित भी किया है, यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी अभूतपूर्व है। 2014 में जब नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने, तो देश के 8 राज्यों में ही भाजपा-एनडीए की सरकारें थीं, लेकिन आज यह विस्तार 22 राज्यों तक हो गया है और भाजपा-एनडीए देश के 75 फीसदी से अधिक भूभाग पर शासन कर रहे हैं, लेकिन मोदी को अभी लंबा रास्ता तय करना है और भारत को ‘विकसित देश’ बनाना है।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    …अग्निकांडों से’ जा रहे अनमोल प्राण!

    August 5, 2026

    बहस के बिना कानून: लोकतंत्र में संवाद जरूरी

    August 4, 2026

    टूट रहीं संसदीय मर्यादाएं

    July 31, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.