ममता बनर्जी के बागी सासंदों ने आखिरकार नई पार्टी को समर्थन देने की घोषणा कर दी है और अब जल्दी ही उनका गुट NDA को समर्थन देने वाला है। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती का इस मामले को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। चक्रवर्ती ने बंगाल में हिंसक राजनीति को खत्म करने और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने को इस फैसले के पीछे की मूल वजह बताया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब राजनीति बदले और खून-खराबे की जगह विकास और सहयोग के आधार पर होनी चाहिए।
हिंसा के चक्र को रोकना जरूरी – चक्रवर्ती
अरूप चक्रवर्ती ने मीडिया बातचीत के दौरान कहा कि 50 साल बीत गए, लेकिन भारत के लोगों या राज्य को कुछ नहीं मिला। एक पक्ष कहता है कि दिल्ली फंड नहीं देती, दूसरा कहता है कि राज्य काम नहीं करता। अब एक नया तरीका शुरू हुआ है। दोनों सरकारें साथ मिलकर काम कर रही हैं। हम खून-खराबा खत्म करना चाहते हैं ताकि लोग खुलकर राजनीति कर सकें। उन्होंने आगे कहा कि बंगाल में लंबे समय से राजनीतिक हिंसा का एक चक्र चलता रहा है, जिसे अब रोकना जरूरी है। उनके मुताबिक, एक कार्यकाल में एक पक्ष हत्या करता है, फिर अगले कार्यकाल में दूसरा पक्ष बदला लेता है। यह सिलसिला अब नहीं चल सकता। अरूप चक्रवर्ती के इस बयान को बंगाल की राजनीति पर बड़ा संदेश माना जा रहा है।
लोगों को बिना डरे काम करने का अधिकार मिले- चक्रवर्ती
अरूप चक्रवर्ती ने यह भी संकेत दिया कि उनका समर्थन किसी व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक माहौल बदलने के उद्देश्य से है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच टकराव की राजनीति से आम लोगों को नुकसान हुआ है। अब जरूरत सहयोग और विकास की राजनीति की है। उनके अनुसार, अगर दोनों सरकारें मिलकर काम करेंगी तो राज्य के विकास कार्य तेज होंगे और लोगों को सीधे फायदा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में लोगों को बिना डर के अपनी राजनीतिक राय रखने और काम करने का अधिकार मिलना चाहिए।
TMC के 20 बागी सांसदों ने NCPI में विलय किया
बता दें कि, रविवार को बंगाल की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला जब TMC के 20 बागी सांसदों ने अलग गुट बनाकर खुद को नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय करने का फैसला किया। इनमें से 19 सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिले और उन्हें पत्र सौंपकर NDA को समर्थन देने की जानकारी दी। सांसदों ने INDIA गठबंधन से अलग बैठने की भी मांग की। माना जा रहा है कि इस समर्थन से संसद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को संख्या बल में फायदा मिल सकता है।

