छत्तीसगढ़- धमतरी के मोहित पवार एमबीए की पढ़ाई पूरी की, इसके बाद पुणे जैसे बड़े शहर में लाखों की नौकरी का ऑफर मिला, लेकिन इसे ठुकराकर उन्होंने फूलों की खेती को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया. आज मोहित एक एकड़ खेत से सलाना 15 लाख रुपये मुनाफा कमा रहे हैं. साथ ही 8-10 कर्मचारियों को रोजाना रोजगार दे रहे हैं.
1 एकड़ में गुलाब की खेती
धमतरी जिले के ग्राम खरतुली के रहने वाले मोहित पवार पुणे से एमबीए की पढ़ाई की. वहीं मोहित को पुणे में ही सालाना लाखों रुपये के पैकेज पर नौकरी ऑफर हुआ, लेकिन उन्होंने इस नौकरी को ठुकराकर खेती को अपना करियर बनाने का फैसला किया. जिसके बाद मोहित ने डच गुलाब की खेती शुरू की. मोहित ने 1 एकड़ की जमीन पर 33 हजार गुलाब के पौधे लगाए, जिससे हर दिन 12 किलो फूल उत्पादन करते हैं और इससे प्रतिदिन करीब 1000 से 1500 डंडियां बाजार के लिए तैयार होती हैं.

एक बांज या बंडल में 20 स्टिक होते हैं. बंडलों में पैक करके इसे आगे भेजा जाता है. एक बंडल की कीमत 60-400 रुपये तक होती है. आम दिनों में इसकी कीमत कम होती है, लेकिन सीजन के दौर में ज्यादा कीमत मिलती है. इस गुलाब को छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा और झारखंड में सप्लाई करते हैं.
हालांकि शुरुआती दौर में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. 4-5 महीने की कड़ी मेहनत, प्रबंधन और मार्केटिंग रणनीति से आज उन्हें लाखों रुपये का मुनाफा हो रहा है.
सरकार दे रही सब्सिडी
मोहित पवार ने बताया कि मैंने गुलाब की विभिन्न प्रजातियों को लेकर स्टडी शुरू की और तय किया कि डच गुलाब की खेती करना है. इसके लिए पॉली हाउस की जरूरत थी. फिर पॉली हाउस के संबंध में जानकारी एकत्र की, जैसे पॉली हाउस कैसे बनेगा… कहां से सामग्री आएगी. बीज और पौधे कहां से लेना है. पॉली हाउस के लिए सरकार से सब्सिडी मिलती है, उसकी क्या प्रक्रिया रहेगी. पूरी जानकारी लेने के बाद मैंने पॉली हाउस का निर्माण शुरू कराया. इसके बाद अपनी पुश्तैनी जमीन पर एक एकड़ में डच रोज की खेती करने की प्रक्रिया शुरू की.
बैंक से 65 लाख रुपये लिए ऋण
शुरुआती तौर पर मोहित ने बैंक से 65 लाख रुपये का ऋण लिए. अपने पैतृक जमीन पॉलीहाउस में अन्य जरूरी ढांचा तैयार कर अप्रैल 2025 में फूलों की खेती का कार्य शुरू किया. शुरुआती तौर पर उन्हें चार से पांच महीने में पौधे के रखरखाव तकनीकी समझ के कारण उत्पादन प्रभावित भी हुआ. हालांकि इसके बाद उन्होंने प्रबंधन और मार्केटिंग रणनीति के जरिए संचालन में सुधार किया.
मोहित पवार ने बताया कि खरतुली में एक एकड़ पैतृक जमीन काफी समय से खाली पड़ी थी. ऐसे में अचानक इस पर विचार किया और इस कार्य को करना शुरू किया. शुरुआती तौर पर उन्हें काफी दिक्कतें भी हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.
33000 गुलाब के पौधे लगाए
उन्होंने बताया कि एक एकड़ पॉलीहाउस में 33 हजार गुलाब के पौधे लगाए गए हैं. शादियों के सीजन में अच्छी कमाई होती है और बाकी दिनों में सामान्य कमाई होती है. उन्होंने बताया कि इन फूलों की देखभाल के लिए 9 वर्कर को रखा है. ये सभी रोजाना 8 घंटे काम करते हैं. गुलाब की कटिंग, फूलों की पैकिंग और बड़े बॉक्स में डालकर उसे सप्लाई किया जाता है. हर दिन सुबह फूलों को तोड़ा जाता है और उसे पैक कर बजारों में सप्लाई किया जाता है. वहां से एजेंट फूलों को रिसीव करते हैं और आगे डिमांड के अनुसार रांची, भुवनेश्वर, झारखंड, रायपुर अन्य जगहों पर इसकी सप्लाई करते हैं.
एक बंडल की कीमत 400 रुपये तक
एक दिन में लगभग 1000 से 1500 डंडियों का उत्पादन होता है. एक बांज या बंडल में 20 स्टिक रहते हैं. यानी हर दिन 50-75 बंडल तैयार होते हैं. इसकी कीमत 60-400 रुपये तक होती है. हालांकि सीजन के दौर में इसकी कीमत ज्यादा मिलती है. बंडलों में पैक करके आगे भेजा जाता है. वहीं हर दिन गुलाब के टुकड़े भी होते हैं, जिसे किलोग्राम के हिसाब से बेचा जाता है. इसकी कीमत 100-400 रुपये प्रति किलो तक होती है.
मोहित पवार ने बताया कि फूलों को पैक कर रायपुर भेजा जाता है. वहां से अन्य राज्यों में सप्लाई होती है. इस बागवानी के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी भी मिलती है.
पुणे से मंगाए गुलाब के उन्नत पौधे
इस खेती से सालाना 20 लाख रुपये की कुल आय हो रही है. बैंक ऋण की किस्त, जैविक खाद, गुलाब के पौधों का रखरखाव, स्थानीय मजदूरों की मजदूरी जैसे खर्चे निकालने के बाद 10-15 लाख रुपये तक मुनाफा कमा रहे हैं. वहीं फूलों को रासायनिक खाद से मुक्त रखा गया है.
मोहित बताते हैं कि गुलाब के उन्नत पौधे को पुणे से मंगाए गए हैं. तापमान नियंत्रित करने के लिए पॉलीहाउस तैयार किया गया है और सिंचाई के लिए इसराइल ड्रिप सिस्टम लगाया गया है, जिसे पौधों को पानी मिल सके. रोजाना 350 से 400 लीटर तक पानी से पौधों को पानी दिया जाता है.

