Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किए जाने पर दी बधाई
    • आधुनिक तकनीक से वन संरक्षण को नई दिशा
    • जीपीएम का ‘विष्णुभोग’ चावल बना महिलाओं की समृद्धि का नया ब्रांड, आधे घंटे में 45 हजार रुपये से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री
    • छत्तीसगढ़ स्टेट वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन के कर्मचारियों को उपहार
    • माननीय मुख्यमंत्री महोदय की गरिमामयी उपस्थिति में मनाया जाएगा “दीदी के गोठ” का वार्षिकोत्सव
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से झारखंड के वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर से की सौजन्य भेंट
    • रात भर चली जद्दोजहद, सुबह होते ही चोरों का बना ‘कार्टून’ शो…
    • स्वेच्छानुदान मद से सुदूर वनांचल स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल, मांझीगुडा को 10 कंप्यूटर प्रदत्त
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Tuesday, July 7
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»मूल्य श्रृंखला का जुड़ाव: पीएम मित्र पार्क के ज़रिए कैसे भारत के टेक्सटाइल क्षेत्र की बदल रही है तस्वीर
    लेख-आलेख

    मूल्य श्रृंखला का जुड़ाव: पीएम मित्र पार्क के ज़रिए कैसे भारत के टेक्सटाइल क्षेत्र की बदल रही है तस्वीर

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJuly 7, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    श्री पबित्रा मार्गेरिटा

    सदियों से, भारत की पहचान उसके परिधानों से गहराई से जुड़ी रही है। चाहे वह कश्मीर के पश्मीना की लंबे समय तक रहने वाली गर्माहट हो, असम के मूंगा सिल्क की सुनहरी चमक हो, तमिलनाडु की शाही कांजीवरम साड़ियाँ हों, चंदेरी की बुनाई हो या सूरत के कारीगरों की कपड़ों पर मशहूर कारीगरी। आज भी यह क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनकर खड़ा है, जो जीडीपी में 2.3%, औद्योगिक उत्पादन में 13% और निर्यात में 12% का योगदान देता है। खेती के बाद भारत में सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाला यह क्षेत्र 45 मिलियन लोगों को सीधे तौर पर और 100 मिलियन से ज़्यादा लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार देता है। इससे ग्रामीण समुदायों को मजबूती मिलती है और देश भर में लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक आज़ादी का रास्ता खुलता है।
    वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के एक साथ जुड़ी हुई व्यवस्था के उलट, भारत की वस्त्र मूल्य श्रृंखला ऐतिहासिक रूप से अलग-अलग जगहों पर फैले हुए मॉडल के तौर पर विकसित हुई। कताई, बुनाई, प्रोसेसिंग, कपड़े सिलने और निर्यात जैसी गतिविधियाँ अलग-अलग राज्यों में स्वतंत्र रूप से विकसित हुईं, जिसका अर्थ था कि एक कपड़ा बनने के दौरान अक्सर कई राज्यों की सीमाओं से गुज़रता था। इस बिखराव के कारण कई संरचनात्मक बाधाएँ पैदा हुईं। इसने बड़े पैमाने पर काम करने, आधुनिकीकरण, ऑटोमेशन और आखिरकार मज़दूरों की उत्पादकता को सीमित कर दिया।
    इसके साथ ही, मल्टी-मॉडल संपर्क में कमियों की वजह से लॉजिस्टिक्स का बोझ भी बढ़ जाता है। प्रोडक्शन के अलग-अलग चरणों के बीच हर बार सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने या संभालने में अतिरिक्त खर्च और ढुलाई का किराया लगता है। कई चरणों में लंबी दूरी तक सामान को एक जगह से दूसरी जगह भेजने से कुल लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ जाती है और सामान को तेज़ी से बाज़ार तक पहुँचाने की क्षमता खत्म हो जाती है, जो आज की रिटेल व्यवस्था में बार-बार ऑर्डर देने वाले साइकल में एक बहुत बड़ी और नुकसानदायक कमी है।
    वर्तमान में पर्यावरण से जुड़ी ज़रूरतों पर भी ध्यान देने की ज़रुरत है। दुनिया भर में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वस्त्र उद्योग की हिस्सेदारी 8% से 10% और औद्योगिक जल प्रदूषण में 20% है। हज़ारों छोटी-छोटी और अलग-अलग जगहों पर फैली इकाइयों में नियमों को लागू करना और सही तरीके से प्रबंधन करना पहले एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती रहा है।
    इन रुकावटों को व्यवस्थित रूप से दूर करने के लिए, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2021 में पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (पीएम मित्र) योजना शुरू की, जिसके लिए ₹4,445 करोड़ का बजट रखा गया। यह एक अहम कदम था, जो एक ऐसा व्यापक मॉडल पेश करता है, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, उद्योगों से जुड़े लोगों और निजी साझेदारों के साथ मिलकर विकास को आगे बढ़ाती है।
    इस योजना के केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का दूरदर्शी ‘5एफ’ फ़ॉर्मूला है यानी फ़ार्म (खेत) से फ़ाइबर (रेशा) से फ़ैक्टरी (कारखाना) से फ़ैशन और फारेन (विदेश) तक पहुंच। यह सोच सीधे तौर पर उस बात को सामने लाती है, जो भारत को वैश्विक मंच पर अलग बनाती है: हमारी संपूर्ण और बेहद विविध मूल्य श्रंखला। कच्चे माल के आयात या सिर्फ तैयार कपड़ों की बनावट पर निर्भर रहने वाले दूसरे देशों के उलट, भारत वस्त्रों को बनाने की पूरी प्रक्रिया में शामिल है, जिसमें किसानों के खेतों से लेकर हाई-फ़ैशन रनवे तक की प्रक्रिया शामिल है। इस अनोखी समझ की वजह से, हमारी विकास रणनीति को वैश्विक प्रतिस्पर्धा और पूरी तरह से सामाजिक समानता के बीच एक खास संतुलन बनाने की ज़रुरत है। विस्तार करते समय, हमें हर क्षेत्र के कल्याण का ध्यान रखना होगा, ताकि साधारण किसान और ग्रामीण बुनकर से लेकर कपड़े के निर्यातक तक, कोई भी पीछे न छूटे। पीएम मित्र फ़्रेमवर्क इसी संतुलन को हासिल करता है।
    इन पार्कों को कच्चे माल के मुख्य केंद्रों के पास रणनीतिक रूप से बनाने से ट्रांसपोर्ट का खर्च कम होता है और निर्माण के लिए बिना रुकावट आपूर्ति सुनिश्चित होती है। इससे ज़रूरी बात यह है कि इस नज़दीकी से शुरुआत से आखिर तक ट्रैकिंग भी मुमकिन हो पाती है। चूँकि वैश्विक ब्रांड ऑर्गेनिक या सस्टेनेबल प्रमाणीकरण की मांग करते हैं, इसलिए ये एकीकृत पार्क एक सत्यापन योग्य कस्टडी चेन देते हैं। इससे कड़े वैश्विक ईएसजी नियमों का पालन होता है और विदेशों में प्रीमियम कीमत पाने का रास्ता भी बनता है।
    1,000 एकड़ से ज़्यादा के एक ही इलाके में कताई, बुनाई, प्रोसेसिंग और कपड़ा बनाने की सुविधाओं को एक साथ लाने से अलग-अलग राज्यों के बीच सामान ले जाने की ज़रूरत खत्म हो जाती है। इससे माल ढुलाई का खर्च और ट्रांसपोर्ट से होने वाला प्रदूषण भी बहुत कम हो जाता है और सामान तेज़ी से बाज़ार तक पहुँच पाता है। समर्पित माल गलियारे और एक्सप्रेसवे जैसे राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर से जुड़े होने के कारण, विदेशी बाज़ारों तक सामान पहुँचाना बहुत सस्ता और किफायती हो जाता है। हर पार्क में ‘प्लग-एंड-प्ले’ इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर होता है, जिसमें बिजली के खास सब-स्टेशन, लगातार पानी की सप्लाई और तुरंत इस्तेमाल के लिए तैयार फैक्ट्री शेड जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। इसके साथ ही, ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ज़ेडएलडी) तकनीक वाले उन्नत एडवांस्ड कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और आधुनिक सुविधाएँ भी होती हैं, जिससे कारोबारियों पर ढ़ांचागत बोझ कम पड़ता है और कारोबार करने में आसानी होती है।
    पीएम मित्र पार्क तेज़ी से कागज़ी योजनाओं को असल ज़मीनी हकीकत में बदल रहे हैं। इस योजना में सात रणनीतिक पार्क शामिल हैं: पाँच ग्रीनफील्ड डेवलपमेंट विरुधुनगर (तमिलनाडु), नवसारी (गुजरात), कलबुर्गी (कर्नाटक), धार (मध्य प्रदेश) और लखनऊ (उत्तर प्रदेश) और दो ब्राउनफील्ड डेवलपमेंट वारंगल (तेलंगाना) और अमरावती (महाराष्ट्र) में। अब तक, इस योजना में कुल ₹69,899 करोड़ के निवेश की दिलचस्पी दिखाई गई है, जिसमें से ₹27,658 करोड़ का निवेश पहले ही हो चुका है।
    10 मई, 2026 को माननीय प्रधानमंत्री ने तेलंगाना के वारंगल में पहले कार्यरत पीएम मित्र पार्क का उद्घाटन किया। इस पार्क में पहले ही ₹3,862 करोड़ का निवेश हो चुका है और यहाँ विश्व-स्तरीय पर्यावरण अनुकूल बुनियादी ढ़ांचे पर काम किया जा रहा है। ये विशेषताएँ स्थायित्व के उन मानकों को दर्शाती हैं, जिन्हें सभी सात पार्क साइटों पर स्थापित किया जा रहा है।
    पूरे देश में एक साथ काम शुरू होने से सहकारी संघवाद की तेज़ी और सफलता दोनों साफ दिखती है, जहां सभी सात राज्यों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, 100% ज़मीन का अधिग्रहण हो चुका है और पर्यावरण से जुड़ी मंज़ूरी भी मिल गई है। पाँच ग्रीनफ़ील्ड साइट्स के लिए जेवी एग्रीमेंट और एसपीवी पूरी तरह से तैयार हैं, जिससे तेज़ी से काम आगे बढ़ रहा है। 2,158 एकड़ में फैले सबसे बड़े पार्क, धार (मध्य प्रदेश) में ₹21,436.9 करोड़ के निवेश में दिलचस्पी दिखाई गई है। इसी तरह गुजरात (₹13,084 करोड़), महाराष्ट्र (₹12,925 करोड़), तमिलनाडु (₹6,600 करोड़), उत्तर प्रदेश (₹5,345.8 करोड़) और कर्नाटक (₹1,700 करोड़) में भी काम को लेकर तेज़ी देखी गई है। तेज़ी से हो रहे इस काम के पीछे केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह का सक्रिय नेतृत्व है। उनके कुशल नेतृत्व में वस्त्र मंत्रालय अपने कामकाज के तरीकों में तेज़ी लाया है, मंत्रालय ने प्रशासनिक रुकावटों को दूर किया है और राज्य सरकारों के साथ अभूतपूर्व स्तर पर आपसी सहयोग को बढ़ावा दिया है।
    लेकिन आंकड़े तो कहानी का सिर्फ एक हिस्सा बताते हैं, असली पैमाना इसके मानवीय प्रभाव में दिखता है। प्रत्येक पार्क को संरचनात्मक रूप से इस प्रकार तैयार किया गया है कि इससे लगभग 3 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। यानी सभी सात स्थलों को मिलाकर, 21 लाख से अधिक औपचारिक आजीविकाएं हैं, जो हमारे ग्रामीण परिवारों और महिलाओं को अहम सामाजिक-आर्थिक नींव प्रदान करती हैं, जो पारंपरिक रूप से परिधान निर्माण उद्योग की रीढ़ हैं।
    यह व्यापक ढ़ांचागत प्रयास वस्त्र क्षेत्र के महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण 2030 के लिए एक अहम लॉन्चपैड का काम करता है, जिसका लक्ष्य इस दशक के अंत तक भारत के वस्त्र उद्योग को 350 बिलियन डॉलर की वैश्विक महाशक्ति में बदलना है। ऐतिहासिक विखंडन को विश्व स्तरीय, एकीकृत पैमाने से बदलकर करके, पीएम मित्र एक बड़ा संरचनात्मक परिवर्तन ला रहा है। सशक्त नेतृत्व के मार्गदर्शन में, हम भारत को वस्त्रों के निर्विवाद, टिकाऊ और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी केंद्र के तौर पर स्थापित कर रहे हैं।

    (लेखक केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री हैं। व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।)

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    आधुनिक तकनीक से वन संरक्षण को नई दिशा

    July 7, 2026

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी: राष्ट्र प्रथम का अमर संदेश

    July 6, 2026

    साहित्य और राष्ट्रबोध शब्दों से निर्मित होती है राष्ट्र की आत्मा

    July 5, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.