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    Home»लेख-आलेख»इंग्लैंड की नई पार्टी का पैंतरा और बीरबल…
    लेख-आलेख

    इंग्लैंड की नई पार्टी का पैंतरा और बीरबल…

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJuly 17, 2026
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    यदि गहराई से खोजबीन की जाए तो पता चल जाएगा कि इंग्लैंड के आज भी जो चार पांच सौ धनी घराने हैं, वे सभी एशिया और अफ्रीका की लूट से ही बने हैं। बहुत अरसा पहले जब बाबा साहिब अंबेडकर ने इंग्लैंड में ‘रुपए का मूल्य’ विषय पर अपना पीएचडी थीसिस लिखकर सिद्ध किया था कि किस प्रकार इंग्लैंड सरकार हिंदुस्तान को लूट रही है तो वहां के तथाकथित निष्पक्ष परीक्षकों ने लम्बे समय तक उनकी पीएचडी की डिग्री रोके रखी थी। इंग्लैंड के राजवंश में जो कोहिनूर हीरा है, उसके मुकुट में जड़ा हुआ है, जिसे देखे बिना राजवंश को रात्रि की नींद नहीं आती, वह भारत से ही लूटकर ले जाया गया है…

    इंग्लैंड की महज सात साल पुरानी पार्टी यूके रिफॉर्म और वहां की पूर्व गृहमंत्री बरेवरमैन के नए रिश्ते बने हैं और उन्होंने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। ब्रिटेन की सांसद सुएला बरेवरमैन ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के मंत्रिमंडल में गृहमंत्री थीं। उनकी मां उमा तमिल मूल की थीं और उनके पिता गोवा मूल के कैथोलिक ईसाई थे। लेकिन दोनों परिवार अरसा पहले मार्शल और केन्या में जाकर बस गए थे। वहां से कभी इंग्लैंड जाकर बस गए। वहां की राजनीति में सक्रिय हो गए। उनकी बेटी सुएला बरेवरमैन वकील थीं और वह भी माता पिता की विरासत को संभालती हुई इंग्लैंड की राजनीति में रुचि लेने लगीं। वह कंजर्वेटिव पार्टी के टिकट पर वहां की लोकसभा की सांसद चुनी गईं और प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के मंत्रिमंडल में देश की गृहमंत्री बनीं। लेकिन हमास के आतंकियों ने जब इजरायल के सैकड़ों लोगों को अगवा कर उन्हें मारना शुरू किया तो जाहिर है ब्रिटेन में इसको लेकर रोष होता। लेकिन बरेवरमैन ने तब हमास के पक्ष में मोर्चा संभाल लिया। लोगों के विरोध को देखते हुए ऋषि सुनक ने इसे मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया। ऋषि सुनक के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद बरेवरमैन ने प्रधानमंत्री पद के लिए भी जोर आजमाईश की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। 2026 में बरेवरमैन ने पाला बदल लिया। वे 2024 में कंजर्वेटिव पार्टी की टिकट पर सांसद चुनी गई थीं। लेकिन वह 26 जनवरी 2026 को यूके रिफॉर्म पार्टी में शामिल हो गईं। यह पार्टी कोई बहुत पुरानी नहीं है।

    इसका गठन कुछ मित्रों ने आपस में मिल कर 2018 में किया था। बाद में पार्टी का नाम बदल कर यूके रिफॉर्म कर दिया। बरेवरमैन को शायद लगा होगा कि उसके राजीतिक कैरियर और विचारधारा के लिए यही पार्टी उत्तम है। इस नई पार्टी का मत है कि इंग्लैंड में एशिया और अफ्रीका से आकर इतने लोग बस गए हैं कि इससे इंग्लैंड की अपनी संस्कृति और पहचान खतरे में पड़ गई है। इंग्लैंड के आर्थिक साधनों को ये बाहरी लोग खा रहे हैं। इस पर रोक लगनी चाहिए ताकि इंग्लैंड सुरक्षित रह सके। यही कारण है कि इस पार्टी को रेडिकल कंजर्वेटिव भी कहा जाता है। इसी बीच इंग्लैंड में एक नए विषय पर गोरों के कान खड़े होने लगे। लेबर और कंजरवेटिव दोनों ही पार्टियां चौकन्नी होने लगी थीं कि इस नए मामले का सामना कैसे किया जाए। माफी मांग कर या दुख प्रकट कर छुटकारा पा लिया जाए? यह विषय अफ्रीका में उठा है। एक अफ्रीकी देश जमैका में आजकल बहुत हो हल्ला हो रहा है कि इंग्लैंड जमैका से लोगों को धोखे से अमरीका महाद्वीप के देशों में ले गया और वहां उनको गुलाम बना लिया और उनके साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया। लाखों लोगों की मौत हो गई। अब जमैका में मांग उठ रही है कि इंग्लैंड की सरकार इसका मुआवजा दे। अपनी पुरानी पार्टी को छोड़ कर यूके रिफॉर्म में बरेवरमैन कुछ महीने पहले ही शामिल हुई हैं। जाहिर है उसे वहां अपनी उपस्थिति की घोषणा धमाके से ही करनी थी। इतने धमाके से कि पता चले कि वह इस नए मंच पर आने में चाहे लेट हो गई हों, लेकिन वैचारिक लिहाज से वह पुरानों से भी दो कदम आगे है। वैसे भी नया बना मुसलमान अल्लाह अल्लाह ज्यादा करता है। बरेवरमैन ने जोर शोर से कहना शुरू कर दिया कि भूतकाल में इंग्लैंड ने एशिया और अफ्रीका के देशों पर सैकड़ों साल राज किया था, उनका विकास किया, वहां सडक़ें, रेल की पटरियां बिछाईं और भवन बनाए। इस विकास पर इंग्लैंड के साधन लगे।

    अब समय आ गया है कि ये सभी देश इंग्लैंड के इस उपकार का ऋण उतारें और आज की इंग्लैंड सरकार को इसकी भरपाई करें। पैसा नहीं दे सकते तो कम से कम इंग्लैंड के इस उपकार के बदले इंग्लैंड का धन्यवाद तो करें। श्रीमती बरेवरमैन को लगा कि यह मांग अफ्रीका और एशिया के देश इंग्लैंड से मुआवजा मांगना शुरू करें उससे पहले ही इसका जवाब देना चाहिए। यदि वह सबसे पहले जवाब देंगी तो जाहिर है यूके रिफॉर्म पार्टी में उसकी स्थिति मजबूत होगी। तब वह इस नई पार्टी में पिछलग्गू नहीं बल्कि लीडर हो जाएगी। अब सवाल यह है कि यदि यह बात कोई गोरा करता तब तो बात समझ में आती लेकिन बरेवरमैन के पुरखे तो खुद इसी गुलामी या औपनेविशक अत्याचारों का शिकार रहे होंगे, उसे तो इंग्लैंड की सरकार को जिसका वह खुद हिस्सा है, कहना चाहिए था कि भूतकाल में वापस नहीं जाया जा सकता, लेकिन कोई भी सभ्य देश अपने पूर्वजों की अमानवीय कारनामों का शिकार लोगों की नई पीढ़ी से माफी तो मांग ही सकता है। लेकिन बरेवरमैन को तो स्वयं को एकमेव एंग्लो-सैक्सन से भी ज्यादा शुद्ध एंग्लो-सैक्सन सिद्ध करना है। इसलिए वह इतिहास में उन लोगों की कतार में जाकर खड़ी हो गईं जिन लोगों के पूर्वजों ने उनके सीधे साधे ईमानदार बाप-दादा को लूटा था। यदि गहराई से खोजबीन की जाए तो पता चल जाएगा कि इंग्लैंड के आज भी जो चार पांच सौ धनी घराने हैं, वे सभी एशिया और अफ्रीका की लूट से ही बने हैं। बहुत अरसा पहले जब बाबा साहिब अंबेडकर ने इंग्लैंड में ‘रुपए का मूल्य’ विषय पर अपना पीएचडी थीसिस लिखकर सिद्ध किया था कि किस प्रकार इंग्लैंड सरकार हिंदुस्तान को लूट रही है तो वहां के तथाकथित निष्पक्ष परीक्षकों ने लम्बे समय तक उनकी पीएचडी की डिग्री रोके रखी थी।

    इंग्लैंड के राजवंश में जो कोहिनूर हीरा है, उसके मुकुट में जड़ा हुआ है, जिसे देखे बिना राजवंश को रात्रि की नींद नहीं आती, वह भारत से ही लूटकर ले जाया गया है। इसमें कोई शक नहीं कि यूरोप के देशों ने समृद्धि एशिया और अफ्रीका के देशों के उन लोगों, जो मानवीय मूल्यों पर आचरण करने वाले थे, के खून से प्राप्त की है। यह ठीक है कि उनके पास मशीन पहले आ गई थी, लेकिन उस मशीन का उपयोग मानव कल्याण के लिए नहीं बल्कि एशिया और अफ्रीका के देशों का शोषण करने के लिए किया गया। दुर्भाग्य से आज भी अमरीका, जो समस्त यूरोप का समन्वित प्रतिनिधि है, और यूरोप के पश्चिमी जीवन मूल्यों का प्रतिनिधि है, उसी शोषण पर आधारित है। दोनों विश्व युद्ध और अभी मध्य पूर्व एशिया में चल रहा युद्ध अमरीका के इन्हीं शोषण मूल्यों पर आधारित है। इस पूरी लड़ाई में कुछ लोग ‘मोर लायल दान सीजर्ज वाईफ’ बन रहे हैं। बरेवरमैन उसी का उदाहरण है। बरेवरमैन के उदाहरण से यह भी कुछ सीमा तक समझा जा सकता है कि भारत अरबों, तुर्कों, मुगलों व यूरोप वालों का इतने लम्बे अरसे तक गुलाम कैसे रहा। तब भी बहुत से/सी बरेवरमैन दूसरे खेमे के साथ खड़े हो जाते थे। हमारे ही बहुत से बीरबल अकबर के दरबार में उसे चुटकुले सुना कर प्रसन्न करने की भौंडी हरकतें करते रहते थे। श्रीमती बरेवरमैन का दोष नहीं है। वह तो बहुत लम्बा सफर करके अब के अकबर के दरबार में पहुंची हैं और बीरबल बन कर चुटकुले सुना रही है।-कुलदीप चंद अग्निहोत्री

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