Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • राजमेरगढ़ बनेगा छत्तीसगढ़ का नया पर्यटन आकर्षण
    • साय सरकार के सुशासन में अवैध खनिज कारोबार पर सख्त प्रहार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में लगातार जारी कार्रवाई
    • लंबी मूंछों’ वाले  ‘बोरर कीड़े’ कर रहे पेड़ों को खोखला, इन्‍हें पकड़कर ग्रामीणों ने कमाए 20 लाख,कीड़ों की माला बनाकर वन विभाग को सौंप रहे ग्रामीण…
    • छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मानसून ने पकड़ ली रफ्तार,अगले 48 घंटे भारी वर्षा का अलर्ट, रायपुर समेत कई जिलों में झमाझम बारिश
    • सीएम हेल्पलाइन-1076 ने नागरिक-केंद्रित सुशासन की अवधारणा को दिया व्यवहारिक रूप : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
    • सफलता की कहानी-किसानों ने अपनाया लाभकारी फसलों का विकल्पहो रहा है, किसानों की आमदनी में इजाफा
    • आत्मनिर्भर भारत की ऐतिहासिक उड़ान : विक्रम-1 की सफलता पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दी बधाई
    • Breaking News : पटाखा फैक्ट्री में आग लगने से आठ लोगों की मौत, 15 से ज्यादा घायल
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Saturday, July 18
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»धर्म आस्था»विशेष पर्व अष्टान्हिका : 21 जुलाई को नंदीश्वर द्वीप बनेगा जैन धर्म का आस्था केंद्र
    धर्म आस्था

    विशेष पर्व अष्टान्हिका : 21 जुलाई को नंदीश्वर द्वीप बनेगा जैन धर्म का आस्था केंद्र

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJuly 18, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    अष्टानिका पर्व,इसे शाश्वत पर्व भी कहा जाता है यह एक तीर्थ यात्रा का पर्व है। यह पर्व जैन धर्म के सबसे पुराने त्योहारों में से एक है। आठ दिन का यह पर्व साल में तीन बार मनाया जाता है, आषाढ़ (जून-जुलाई), कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) एवं फ़ाल्गुन माह (फरवरी-मार्च) में इस पर्व को मनाया जाता है। इस पर्व के दौरान कई जगहों पर जैन तीर्थों और मंदिरों में सिद्धचक्र विधान भी आयोजित किए जाते हैं। ऐसा ही एक तीर्थ मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में है। आगामी 21 जुलाई से शुरू होने वाले आठ दिवसीय अष्टान्हिका महापर्व के दौरान यहीं पर सभी प्रमुख धार्मिक विधान संपन्न होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास, पूजा व आत्म-साधना करेंगे।

    नंदीश्वर द्वीप का है खास महत्व

    वीरांगना रानी दुर्गावती की राजधानी गढ़ा की पर्वतमालाओं के बीच स्थित पिसनहारी मड़िया जैन तीर्थ का नंदीश्वर द्वीप अपनी भव्य शिल्पकला, अनूठे स्थापत्य और धार्मिक महत्व के कारण देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। जैन समाज का दावा है कि बिना किसी आधार स्तंभ (पिलर) के निर्मित इतना विशाल नंदीश्वर द्वीप देश में अन्यत्र नहीं है।

    आचार्यश्री के सान्निध्य में हुआ था पंचकल्याणक

    पिसनहारी मढ़िया ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष सुबोध जैन ने बताया कि नंदीश्वर द्वीप के निर्माण का संकल्प वर्ष 1982 में जैन समाज के धर्मप्रेमी श्रेष्ठिजनों के सहयोग से लिया गया था। इसके बाद आचार्यश्री विद्यासागर के सान्निध्य में वर्ष 1992 में पंचकल्याणक एवं गजरथ महोत्सव का आयोजन हुआ। तभी से यह स्थल श्रमण संस्कृति, साधना और जैन आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    बिना पिलर का विशाल डोम है विशेष आकर्षण

    नंदीश्वर द्वीप की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशाल डोम है। सुबोध जैन के अनुसार ग्रेनाइट और सफेद संगमरमर से निर्मित इस डोम का दक्षेत्रफल करीब 12 हजार वर्ग फीट है। भूतल से शिखर कलश तक इसकी ऊंचाई 121 फीट है, जबकि मंदिर की सतह से डोम की ऊंचाई 65 फीट है। भवन के चारों ओर 32 सुंदर मंदरियां चार भव्य तोरण द्वार और बाहरी गलियारे में ग्रेनाइट के 63 खम्भे इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।

    132 जिनबिंब और पांच मेरू की रचना

    जैन शास्त्रों के अनुसार नंदीश्वर द्वीप आठवां द्वीप माना गया है, जहां केवल बेव-वेवांगनाएं ही चैत्यालयों की वंचना करते हैं। इसी विव्य अवधारणा को पिसनहारी मढ़िया में मूर्त रूप दिया गया है। यहां संगमरमर की वेदियों पर काले, सफेद और लाल पर्वतों के स्वरूप में जिनालय बनाए गए हैं। चारों वेवियों के मध्य सुमेरु, विजय मेरू, मंदर मेरू अचल मेरू और विद्युतमाली मेफ सहित पांच मेरू पर्वत निर्मित हैं। प्रत्येक मेरू पर 16-16 जिन प्रतिमाएं स्थापित हैं और पूरे परिसर में कुल 132 जिनबिंब विराजमान हैं।

    अष्टान्हिका पर्व और नंदीश्वर द्वीप का महत्व

    मढ़ियाजी की ब्रह्मचारिणी बबली दीदी ने बताया कि जैन धर्म की मान्यता के अनुसार अष्टान्हिका पर्व के दौरान स्वर्ग के देव भी नंदीश्वर द्वीप जाकर अष्लान्हिका विधान और पूजा करते हैं। चूंकि मनुष्य वहां साक्षात नहीं जा सकते, इसलिए पिसनहारी मढ़िया में निर्मित इस कृत्रिम नंदीश्वर द्वीप में समाज के लोग एकत्रित होकर आठ दिनों तक उपवास, नियम और संयम का पालन करते हुए अष्टान्हिका पर्व के सभी धार्मिक विधान संपन्न करेंगे। सुबह-शाम होने वाली महाआरती, संगीतमय पूजन और संतों के प्रवचनों से मढ़िया जी क्षेत्र गुंजायमान रहेगा।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    30 जुलाई से श्रावण का शुभारंभ, कब है कौन सा व्रत-त्योहार?

    July 18, 2026

    गलत उंगली में अंगूठी बदल सकती है आपकी किस्मत!…

    July 18, 2026

    कब से शुरू हो रहा है श्रावण मास? सही तारीख और सावन सोमवार व्रत की पूरी लिस्ट

    July 17, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.