रायपुर । राज्यासभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने छत्तीसगढ़ के रेल परियोजनाओ को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से कई सवाल किए। रेल मंत्री ने सभी सवालों का जवाब सांसद को विस्तार से दी।
सांसद का सवाल– खरसिया-परमलकासा रेल परियोजना की वर्तमान स्थिति क्या है और इसके पूरा होने की समय-सीमा क्या तय की गई है
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का जवाब– खरसिया-नया रायपुर-परमलकासा नई दोहरी लाइन (278 किमी) परियोजना को अप्रैल 2025 में रू 7,854 करोड़ की लागत से मंजूरी दी गई है। यह परियोजना छत्तीसगढ़ के 8 जिलों से होकर गुजरेगी, जिसके लिए 1852 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण में तेजी लाने के लिए इसे विशेष रेलवे परियोजना के रूप में अधिसूचित किया गया है और इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति कर भूमि अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया गया है।
सांसद का सवाल – क्या सरकार ने इस रेल मार्ग के माध्यम से बलौदा बाजार जिले जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्र को जोडऩे के संभावित आर्थिक और औद्योगिक लाभों का मूल्यांकन किया है, विशेष रूप से सीमेंट और खनिज परिवहन के संदर्भ में?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का जवाब – इस मार्ग के माध्यम से बलौदा बाजार जिले जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों को जोडऩे के संभावित आर्थिक और औद्योगिक लाभों का मूल्यांकन इस परियोजना के नियोजन (प्लानिंग) के दौरान किया गया है। तदनुसार, बलौदा बाजार में एक माल गोदाम (गुड्स शेड) के निर्माण की भी योजना बनाई गई है।
सांसद का सवाल – क्या यह सच है कि इस रेल मार्ग के निर्माण से बिलासपुर-रायपुर मुख्य लाइन पर यातायात का दबाव / भीड़ कम होगी और रसद (लॉजिस्टिक्स) लागत में लगभग 2,520 करोड़ की अनुमानित वार्षिक बचत होगी, यदि हां, तो उक्त परियोजना के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही हैं।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का जवाब – इस रेल मार्ग के बनने से बलौदा बाजार जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र को बड़ा फायदा होगा और वहां एक माल गोदाम (गुड्स शेड) के निर्माण का भी प्लान बनाया गया है। इसके अलावा, बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग जैसे व्यस्त स्टेशनों को बाइपास करते हुए यह लाइन बनने से बिलासपुर-रायपुर मुख्य लाइन पर ट्रेन यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने और भी कई अन्य जानकारी बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में रेलवे के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा कार्यों के लिए बजट आवंटन में हाल के वर्षों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। जहां 2009 से 2014 के दौरान प्रति वर्ष औसतन रू 311 करोड़ का बजट परिव्यय मिलता था, वहीं वर्ष 2026-2027 में यह बढक़र रू 7,470 करोड़ (लगभग 24 गुना) हो गया है। बजट में इस भारी बढ़ोतरी के कारण राज्य में रेल परियोजनाओं के कार्यान्वयन को काफी गति मिली है।
रेल मंत्री ने बताया – नए रेल ट्रैक के निर्माण की गति ट्रैक बिछाने और चालू (कमीशन) करने की दर में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। 2009 से 2014 के बीच केवल 32 किमी नया ट्रैक कमीशन किया गया था, जिसका औसत 6.4 किमी प्रति वर्ष था। इसके विपरीत, 2014 से 2026 के बीच कुल 1,311 किमी नया ट्रैक चालू किया गया है, यानी प्रति वर्ष औसतन 109.29 किमी नया ट्रैक बिछाया गया, जो कि पहले की तुलना में लगभग 17 गुना अधिक है।
रेल मंत्री ने बताया- स्वीकृत परियोजनाएं और वर्तमान स्थिति 01 अप्रैल 2026 की स्थिति के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पूर्णत: या अंशत: आने वाली कुल 2,398 किमी लंबाई की 36 परियोजनाएं स्वीकृत हैं, जिनकी कुल लागत रू 2,48,202 करोड़ है। इनमें रू 7,535 करोड़ की लागत वाली 8 नई लाइनें (887 किमी) और रू 11,298 करोड़ की लागत वाली 28 दोहरीकरण परियोजनाएं (1,512 किमी) शामिल हैं। मार्च 2026 तक इनमें से 1,151 किमी ट्रैक कमीशन किया जा चुका है और कुल रू 18,833 करोड़ का व्यय हो चुका है।
रेल मंत्री ने बताया – हाल ही में पूर्ण हुई और चल रही प्रमुख परियोजनाएंराज्य में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ है। हाल ही में पूर्ण हुई प्रमुख परियोजनाओं में दल्लीराजहरा-रावघाट (रू 1,628 करोड़), खोडरी-अनूपपुर दोहरीकरण (रू 1,227 करोड़), रायपुर-टिटिलागढ़ दोहरीकरण (रू 1,171 करोड़) और खरसिया-कोरीछापर नई लाइन (रू 851 करोड़) शामिल हैं। इसके अलावा, वर्तमान में कई बड़े प्रोजेक्ट्स तेजी से चल रहे हैं, जैसे खरसिया-परमलकासा 5वीं और 6ठी लाइन (रू 7,854 करोड़), गेवरा रोड-पेंड्रा रोड नई लाइन (रू 3,724 करोड़), राजनंदगांव-नागपुर 3री लाइन (रू 3,545 करोड़) और खरसिया-धर्मजयगढ़ नई लाइन (रू 3,407 करोड़)।
रेल मंत्री ने बताया – परियोजनाओं की पूर्णता को प्रभावित करने वाले बाधा किसी भी रेल परियोजना के समय पर पूरा होने और उसकी लागत में बदलाव कई व्यावहारिक कारणों पर निर्भर करता है। मुख्य बाधाओ में भूमि अधिग्रहण, फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन स्वीकृति), उपयोगिता सेवाओं का स्थानांतरण, विभिन्न विभागों से वैधानिक मंजूरियां, क्षेत्र की भूगर्भीय व स्थलाकृतिक स्थितियां, कानून-व्यवस्था की स्थिति और साल भर में काम करने योग्य महीनों की संख्या शामिल हैं।

