मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी सविता प्रधान ने एक मासूम के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए अपनी सुंदरता का मोह त्याग दिया. उन्होंने एक कैंसर पीड़ित बच्ची के लिए अपने सिर के बाल दान कर दिए हैं. सिर मुंडवाने के बाद उन्होंने जब सोशल मीडिया पर अपनी नई तस्वीरें शेयर कीं, तो उनके इस रूप और खूबसूरत संदेश ने हर किसी का दिल जीत लिया. सविता प्रधान वर्तमान में सिंगरौली नगर निगम में आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं.
“मैम, मुझे आपके बाल पसंद हैं”… और बदल गया फैसला
सविता प्रधान ने इस कदम के पीछे की दर्दभरी कहानी साझा की. दो दिन पहले उन्होंने अपने बाल कटवाकर उस बच्ची के लिए विग बनवाई, जो कैंसर के अंतिम स्टेज से जूझ रही है. बच्ची से उनकी पहचान फेसबुक के जरिए हुई थी. बातचीत के दौरान बच्ची ने मासूमियत से कहा था, “मैम, मुझे आपके बाल बहुत पसंद हैं.”
मां का दर्द याद आया, अंतरात्मा की आवाज पर उठाया कदम
सविता प्रधान बताती हैं, “वह बच्ची मेरे दिल के बहुत करीब है. मेरी मां ने खुद तीन बार कैंसर झेला है, इसलिए मैं जानती हूं कि कीमोथेरेपी के दौरान बाल झड़ने का दर्द क्या होता है. मुझे यह कदम उठाने के लिए किसी ने नहीं कहा, बल्कि मेरी अंतरात्मा की आवाज थी कि मुझे उस बच्ची को खुश देखना है.”
“सुंदरता गहनों में नहीं, आत्मविश्वास में होती है”
सिर मुंडवाने के बाद सविता प्रधान ने इंस्टाग्राम पर चार तस्वीरें शेयर करते हुए एक बेहद सशक्त संदेश लिखा- “आपकी सुंदरता आपके लंबे बालों या गहनों की वजह से नहीं, बल्कि आपके आत्मविश्वास से झलकती है.” उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि वे बिना किसी झिझक या स्कार्फ के इसी ‘बोल्ड लुक’ में अपने दफ्तर जाएंगी और काम संभालेंगी.
बाल विवाह से अफसर बनने तक का संघर्षपूर्ण सफर
अभावों में बीता बचपन: मूल रूप से नर्मदापुरम के मड़ई गांव की रहने वाली सविता प्रधान का जन्म एक बेहद गरीब आदिवासी परिवार में हुआ था. पिता बीड़ी पत्ते तोड़ने, महुआ बीनने और मजदूरी का काम करते थे.
16 की उम्र में शादी और प्रताड़ना: कम उम्र में ही उनसे 11 साल बड़े व्यक्ति से शादी कर दी गई. ससुराल में उन्हें भयानक घरेलू हिंसा और प्रताड़ना झेलनी पड़ी.
ब्यूटी पार्लर चलाकर बच्चों को पाला: प्रताड़ना से तंग आकर वे अपने दो बेटों अथर्व और यजूस के साथ ससुराल छोड़कर निकल गईं. रिश्तेदार के सहारे रहकर ब्यूटी पार्लर में काम किया और अपने बच्चों का भरण-पोषण किया.
किताबों को बनाया हथियार और रच दिया इतिहास
सविता प्रधान ने विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने ब्यूटी पार्लर चलाने के साथ-साथ अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी की और MPPSC की तैयारी में जुट गईं. साल 2005 में पहली ही बार में MPPSC पास करके डीएसपी पद के लिए चुनी गईं. साल 2006: राज्य में 83वीं रैंक हासिल कर मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा अफसर बनीं. उनकी पहली पोस्टिंग नरसिंहपुर के गोटेगांव में हुई थी.
बता दें कि अक्सर मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें IAS बताया जाता है, जिस पर सविता खुद स्पष्ट कर चुकी हैं कि वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा (MP PCS) की अधिकारी हैं. मासूम बच्ची की आखिरी इच्छा पूरी करने वाली अफसर सविता प्रधान का यह कदम आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है.

