पश्चिम बंगाल में 28.50 करोड़ रुपए नकद और लगभग 15 किलोग्राम सोना बरामद होने के मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक बार फिर चर्चा में आ गई है। एक ओर जांच एजेंसियों का शिकंजा मोहम्मद निजामुद्दीन उर्फ तुलु मंडल पर कसता नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर भाजपा इस मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी पर हमलावर है। इस संबंध में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को बीरभूम पुलिस की कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को नकदी और आभूषणों के अलावा 21 संपत्तियों के सुराग मिले हैं। इनमें मकान, फार्महाउस, दो पेट्रोल पंप, 30 बीघा जमीन और 82 ट्रक-कारें शामिल हैं, जिन्हें जब्त किया जाएगा। इस दौरान शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि तत्कालीन सरकार के संरक्षण के बिना इतना बड़ा रैकेट लंबे समय तक नहीं चल सकता था।
वहीं, ममता बनर्जी के पूर्व सहयोगी मदन मित्रा ने भी इन आरोपों का समर्थन किया, जबकि टीएमसी नेता कुणाल घोष ने मामले में सवाल उठाए हैं। कुणाल घोष ने कहा कि यदि इतनी बड़ी बरामदगी हुई है, तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उन्होंने कहा कि अवैध धन और सोना रखने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यह भी जांच होनी चाहिए कि इतनी देर क्यों हुई। दूसरी ओर, मवेशी तस्करी मामले में 25 महीने जेल में रह चुके अनुब्रत मंडल ने तुलु मंडल से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है।
क्या है पूरा मामला?
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हाल ही में पुलिस ने तुलु मंडल TMC से जुड़े तुलु मंडल और पत्थर कारोबारी मिनार मंडल के घर छापा मारा था। इस कार्रवाई के दौरान करीब 28.50 करोड़ रुपये नकद और लगभग 15 किलोग्राम सोना बरामद हुआ। बरामद सोने की कीमत करीब 21.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके बाद पुलिस ने मिनार मंडल को गिरफ्तार कर लिया।
मिनार पहले राज्य परिवहन विभाग में बस चालक था। हालांकि, बाद में वह पत्थर के कारोबार से जुड़ गया। मामले में उसका सहयोगी पत्थर कारोबारी तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद निजामुद्दीन फरार है। उसके खिलाफ संगठित अपराध और आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है। दोनों पर अकूत संपत्ति जुटाने के आरोप हैं।
क्या बरामद नकदी और सोना तुलु मंडल का है?
मिनार मंडल ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि बरामद नकदी और सोना तुलु मंडल का है। यह दावा सरकारी वकील बिवास चटर्जी ने किया है। उन्होंने कहा कि मामले में जमीन पर अवैध कब्जा, वसूली और आर्थिक अपराधों से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, तुलु मंडल पहले डंपर, ट्रकों और लॉरियों पर पत्थर लादने का काम करता था। बाद में उसने पत्थर खनन, क्रशिंग, आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स के कारोबार में कदम रखा। बताया जाता है कि वर्ष 2014-15 के आसपास उसकी किस्मत तब बदली, जब वह TMC के प्रभावशाली नेता अनुब्रत मंडल के करीबी और उनके निजी सुरक्षा कर्मी साइगल हुसैन के संपर्क में आया।
हालांकि, तुलु मंडल ने कभी भी औपचारिक रूप से टीएमसी की सदस्यता नहीं ली। न ही पार्टी में कोई पद संभाला। इसके बावजूद उसके पास 200 से अधिक वाहनों का बेड़ा हो गया। इन वाहनों का इस्तेमाल पत्थर खनन, कोयला परिवहन और रेत खनन जैसे कारोबारों में किया जाता था। यहां बता दें कि तुलु मंडल को पूर्व TMC नेता अनुब्रत मंडल का करीबी माना जाता है। अनुब्रत जून में TMC के बागी ऋतब्रत बनर्जी गुट में शामिल हो गए थे।

