कभी मुजफ्फरपुर के रेडलाइट एरिया और गरीब बस्तियों में रहने वाले बच्चों के हाथों में किताबें थमाने वाले आईपीएस अधिकारी अवधेश सरोज दीक्षित अब भोजपुर में अपराधियों पर नकेल कसने की जिम्मेदारी संभालेंगे. 2019 बैच के आईपीएस अधिकारी अवधेश दीक्षित को भोजपुर का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है. पुलिस मुख्यालय में कार्मिक-1 में तैनात रहे अवधेश दीक्षित निवर्तमान एसपी राज की जगह लेंगे. करीब 23 महीने तक भोजपुर के पुलिस कप्तान रहे राज को रोहतास का एसपी बनाया गया है. अवधेश दीक्षित की पहचान केवल एक पुलिस अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े अधिकारी के तौर पर भी रही है.
आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई के बाद यूपीएससी में सफलता हासिल कर बिहार कैडर चुनने वाले अवधेश ने बेगूसराय से पुलिस सेवा की शुरुआत की. इसके बाद पालीगंज में एएसपी रहे. मुजफ्फरपुर में तैनाती के दौरान गरीब और वंचित बच्चों के लिए पुलिस पाठशाला शुरू कर उन्होंने पुलिसिंग का मानवीय चेहरा सामने रखा. बाद में गोपालगंज और लखीसराय के एसपी की जिम्मेदारी भी संभाली.
बच्चों के ‘मास्टर जी’ बने पुलिस अधिकारी
मुजफ्फरपुर में एएसपी रहते हुए अवधेश दीक्षित ने रेडलाइट एरिया और गरीब बस्तियों के उन बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की पहल की, जिनके लिए नियमित पढ़ाई का अवसर हासिल करना आसान नहीं था. पुलिस पाठशाला के जरिए बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने की कोशिश की गई. वर्दी में पुलिस अधिकारी को बच्चों के बीच शिक्षक की भूमिका में देखकर लोगों का ध्यान इस पहल की ओर गया. बच्चों के बीच अवधेश की पहचान ‘मास्टर जी’ के रूप में बनने लगी. इस पहल ने पुलिस और समाज के कमजोर वर्गों के बीच भरोसे की दूरी कम करने का संदेश दिया.
अब भोजपुर में उनकी नई जिम्मेदारी को लेकर लोगों की नजर इस बात पर भी होगी कि अपराध नियंत्रण के साथ वे पुलिस-पब्लिक संवाद और सामाजिक पुलिसिंग को किस तरह आगे बढ़ाते हैं.
आईआईटी से आईपीएस तक का सफर
राजस्थान मूल के अवधेश दीक्षित ने आईआईटी बॉम्बे से स्नातक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर भारतीय पुलिस सेवा के लिए बिहार कैडर चुना. बेगूसराय में एएसपी के रूप में पहली पोस्टिंग के बाद पालीगंज में भी जिम्मेदारी संभाली. पुलिस सेवा में अलग-अलग जिलों में काम करने के बाद उन्हें गोपालगंज और लखीसराय का एसपी बनाया गया. इसके बाद वे पुलिस मुख्यालय में कार्मिक-1 में तैनात रहे। अब भोजपुर जैसे महत्वपूर्ण जिले की पुलिस कमान उनके हाथों में होगी.
भोजपुर में कई चुनौतियां
नए एसपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना होगी. हथियार, शराब तस्करी, भूमि विवाद और आपराधिक घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई के साथ पुलिस की कार्यशैली में पारदर्शिता बनाए रखना भी अहम होगा. इसके अलावा जिले में पिछले कार्यकाल के दौरान सामने आए चर्चित मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी. शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत तिवारी का एनकाउंटर मामला इनमें प्रमुख है. घटना के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठे और मामला न्यायिक जांच तक पहुंचा. इसकी प्रक्रिया अभी जारी है.
इसी तरह बिहिया थाना क्षेत्र के गंज गांव निवासी सनोज कुमार के उत्पाद विभाग की हिरासत से रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला भी चर्चा में रहा. दोनों मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा. ऐसे में नए एसपी के लिए कानून के अनुरूप निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा.

घास की अंगूठी से शुरू हुई प्रेम कहानी
अवधेश दीक्षित की प्रोफेशनल जिंदगी के साथ उनकी निजी जिंदगी का एक अध्याय भी काफी चर्चित रहा है. उनकी पत्नी काम्या मिश्रा भी पूर्व आईपीएस अधिकारी रह चुकी हैं. दोनों की मुलाकात वर्ष 2019 में आईपीएस प्रशिक्षण के दौरान हुई थी. काम्या ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी पहली मुलाकात महज 10 से 15 मिनट की थी. अवधेश ने इस मुलाकात को मजाकिया अंदाज में याद करते हुए कहा था कि पहली नजर में ही उनके दिल पर ‘लाठी चार्ज’ हो गया था. हालांकि, संकोची स्वभाव के कारण वे अपनी भावनाएं जाहिर नहीं कर पाए.
पहल काम्या ने की. मध्य प्रदेश के रतलाम में फील्ड विजिट के दौरान उन्होंने अवधेश के सामने अपने प्यार का इजहार किया. उस समय उनके पास अंगूठी नहीं थी. दोनों ने घास से एक छोटी अंगूठी बनाई और काम्या ने उसे अवधेश को पहनाकर ‘प्रॉमिस रिंग’ के रूप में दिया. यही घास की अंगूठी उनके रिश्ते की पहली निशानी बनी.
हैदराबाद में रिश्ता हुआ मजबूत
काम्या के अनुसार, हैदराबाद में ट्रेनिंग के दौरान दोनों को एक-दूसरे को समझने का अधिक मौका मिला. बातचीत बढ़ी और रिश्ता मजबूत होता गया. वर्ष 2020 में दोनों ने कोर्ट मैरिज की और बाद में उदयपुर में डेस्टिनेशन वेडिंग भी हुई. काम्या मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने करीब 22 वर्ष की उम्र में यूपीएससी परीक्षा में 172वीं रैंक हासिल की थी. वे भी आईपीएस अधिकारी बनीं और बिहार कैडर में सेवा की. उनकी अंतिम पोस्टिंग दरभंगा में ग्रामीण एसपी के रूप में रही. वर्ष 2024 में पारिवारिक व्यवसाय की जिम्मेदारी संभालने के लिए उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा दिया.
हालांकि, अवधेश दीक्षित ने इस निजी प्रसंग पर कैमरे के सामने टिप्पणी करने से परहेज किया है. उनकी प्रेम कहानी के ये विवरण काम्या मिश्रा द्वारा पूर्व में दिए गए मीडिया इंटरव्यू में सामने आए थे.
अब भोजपुर में नई पारी
आईआईटी से आईपीएस तक का सफर, गरीब बच्चों के लिए पुलिस पाठशाला और घास की अंगूठी से शुरू हुई प्रेम कहानी—अवधेश दीक्षित की जिंदगी के ये अलग-अलग पहलू अब भोजपुर में उनकी नई पारी के साथ जुड़ गए हैं. अब सबसे बड़ी नजर इस बात पर होगी कि नए एसपी अपराध नियंत्रण और संवेदनशील पुलिसिंग के बीच कितना बेहतर संतुलन कायम कर पाते हैं.

