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    Home»धर्म आस्था»अनंत चतुर्दशी कब है? कलाई पर बांधते हैं 14 गांठों वाला अनंत सूत्र, पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, महत्व
    धर्म आस्था

    अनंत चतुर्दशी कब है? कलाई पर बांधते हैं 14 गांठों वाला अनंत सूत्र, पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, महत्व

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inSeptember 22, 2026
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    Anant Chaturdashi Kab Hai 2026: हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का पर्व बेहद खास होता है. भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है. इस वजह से इस तिथि का अनंत चतुर्दशी के नाम से जानते हैं. 10 दिनों के गणेश उत्सव का समापन भी अनंत चतुर्दशी पर होता है. अनंत चतुर्दशी का व्रत करने से अनंत सुख की प्राप्ति होती है और पापों के नाश होता है. अनंत चतुर्दशी पर भगवान अनंत की पूजा के बाद 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधते हैं.

    अनंत चतुर्दशी 2026 तारीख और मुहूर्त

    इस साल 25 सितंबर, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी. भगवान अनंत की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:28 बजे से रात्रि 11:06 बजे तक रहेगा. अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन समय सुबह 6 बजकर 11 मिनट से है. 

    अनंत चतुर्दशी 2026 पूजा विधि

    • अनंत चतुर्दशी पर अनन्त भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनंत सूत्र बांधा जाता है.
    • अनंत सूत्र में 14 गांठें होनी चाहिए. इन 14 गांठों को 14 लोकों से जोड़कर देखा जाता है.
    • अनंत चतुर्दशी पर प्रात:स्नान करके व्रत का संकल्प करें. शास्त्रों में व्रत का संकल्प एवं पूजन किसी पवित्र नदी या सरोवर के तट पर करने का विधान है.
    • हालांकि ऐसा संभव न हो सकने की स्थिति में घर में पूजाघर की स्वच्छ भूमि पर कलश स्थापित करें. कलश पर शेषनाग की शैय्या पर लेटे भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को रखें.
    • उनके समक्ष 14 गांठों से युक्त अनंत सूत्र रखें. इसके बाद ‘ॐ अनन्तायनम:’ मंत्र से भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की षोडशोपचार-विधि से पूजा करें.
    • पूजन के बाद अनंत सूत्र को मंत्र पढ़कर पुरुष अपने दाहिने हाथ और स्त्री बाएं हाथ में बांध लें. अनंत सूत्र बांध लेने के बाद किसी ब्राह्मण को नैवेद्य में निवेदित पकवान देकर स्वयं सपरिवार प्रसाद ग्रहण करें.

    अनंत चतुर्दशी का महत्व

    कहा जाता है, जब पांडव द्यूत क्रीड़ा में अपना सारा राज-पाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी. धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रौपदी के साथ पूरे विधि-विधान से यह व्रत किया तथा अनंत सूत्र धारण किया. अनंत चतुर्दशी-व्रत के प्रभाव से पांडव सब संकटों से मुक्त हो गए थे.

    (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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