देशभर की 41 टीमें 28 घंटे की कोडिंग हैकाथॉन में दिखा रहीं नवाचार और समस्या-समाधान क्षमता
रायपुर, 3 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के ट्यूरिंग क्लब ऑफ प्रोग्रामर्स (टीसीपी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय कोडिंग हैकाथॉन ‘कोडउत्सव 10.0’ का आज शुभारंभ हुआ। जिला प्रशासन रायपुर के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ के तहत आयोजित इस 28 घंटे की हैकाथॉन में देशभर के विभिन्न तकनीकी संस्थानों की 41 टीमें हिस्सा ले रही हैं। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, व्यावहारिक समस्या-समाधान, टीमवर्क और तकनीकी कौशल को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के प्रभारी निदेशक डॉ. समीर बाजपेयी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। निको ग्रुप के प्रमुख श्री कुमार संभव नामदेव, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांकर पांडेय तथा कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप सिसोदिया विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। हैकाथॉन का आयोजन ट्यूरिंग क्लब ऑफ प्रोग्रामर्स के फैकल्टी इन-चार्ज डॉ. पवन कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
इस अवसर पर डॉ. दिलीप सिसोदिया ने कहा कि ‘कोडउत्सव’ में प्रतिभागियों के सामने रखी जाने वाली चुनौतीपूर्ण समस्याएं उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में समस्या-समाधान के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान तकनीकी और औद्योगिक परिदृश्य में कंपनियां केवल सैद्धांतिक ज्ञान के बजाय व्यावहारिक समस्या-समाधान क्षमता को भी महत्वपूर्ण मानती हैं।

डॉ. सुधांकर पांडेय ने कहा कि देश तकनीकी प्रगति के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में अर्जित ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतिभागियों से हैकाथॉन के अवसर का अधिकतम लाभ उठाने और अपने तकनीकी ज्ञान एवं कौशल का प्रभावी उपयोग करते हुए नवीन समाधान विकसित करने का आह्वान किया।
श्री कुमार संभव नामदेव ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए पहले समस्या की वास्तविक प्रकृति और उसके प्रभाव को समझना आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों से ऐसी कार्यशील प्रोटोटाइप विकसित करने का आग्रह किया, जो न केवल तकनीकी रूप से प्रभावी हों, बल्कि वास्तविक जीवन में उपयोगी और व्यवहार्य भी हों। उन्होंने कहा कि हैकाथॉन विद्यार्थियों को अपनी तकनीकी क्षमताओं को वास्तविक समस्याओं के समाधान में लागू करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

प्रभारी निदेशक डॉ. समीर बाजपेयी ने कहा कि कोडिंग विद्यार्थियों की तार्किक सोच और समस्या-समाधान क्षमता को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीकी समाधान को विकसित करते समय उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं, सुरक्षा और उपयोग में सहजता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने प्रभावी टीमवर्क, टीम सदस्यों के समन्वय और बेहतर संचार को सफल समाधान विकसित करने के लिए आवश्यक बताया।
‘कोडउत्सव 10.0’ में प्रतिभागी 28 घंटे तक लगातार विभिन्न वास्तविक एवं चुनौतीपूर्ण समस्याओं पर काम करते हुए नवीन तकनीकी समाधान और कार्यशील प्रोटोटाइप विकसित करेंगे। आयोजन में तकनीकी नवाचार, रचनात्मकता और सहयोगात्मक समस्या-समाधान पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

