चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हिसार जिले में 2018 में अढ़ाई साल के बच्चे की हत्या के मामले में मौत की सजा पाए हेम राज को बरी कर दिया है। जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस हरमीत सिंह देओल की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी को अपराध से जोड़ने वाले संदेह से परे और कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य पेश करने में विफल रहा।
अदालत ने चाइल्डलाइन-1098 के उस रिकॉर्ड को अहम माना जो बच्चे का शव मिलने से 3 दिन पहले दर्ज हुआ था। इसमें बच्चे को पीटने वाले व्यक्ति का नाम ‘महाबीर’ बताया गया था, जबकि आरोपी का नाम हेम राज था। हाईकोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी ने ‘महाबीर’ की पहचान को लेकर कोई सार्थक जांच नहीं की और यह भी पता नहीं लगाया कि वह हेम राज का उपनाम था या दोनों अलग-अलग व्यक्ति थे।
यह था मामला
मामला 16 जून 2018 का है, जब हिसार के गाइबीपुर गांव में एक बंजर खेत से करीब बढाई साल के बच्चे का सिर कटा शव मिला था। पुलिस ने हत्या व साक्ष्य मिटाने के आरोप में केस दर्ज किया। बच्चे की मां ने बाद में बयान दिया कि हेम राज ने बच्चे की हत्या की थी।
पुलिस ने 20 जून को हेम राज को गिरफ्तार किया और उसकी निशानदेही पर बच्चे के कपड़े व कुदाल बरामद करने का दावा किया। निचली अदालत ने मार्च 2022 में हेम राज को हत्या व साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए हत्या के लिए मृत्युदंड सुनाया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि कपड़ों के अलावा शव की पहचान बच्चे के रूप में साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य नहीं था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार शव का सिर, गर्दन, ऊपरी अंग और छाती का अधिकांश हिस्सा गायब था। मां के बयान के अंग्रेजी और हिंदी संस्करण में भी अंतर पाया गया। इसके अलावा DNA जांच में हड्डी के नमूने से प्रोफाइल नहीं मिल सकी, जिसके चलते मां के DNA से तुलना भी संभव नहीं हुई।

