देहरादून: देहरादून के दूरस्थ चकराता ब्लॉक के उदावा में एक दुल्हन बारात ढ़ाई घंटे पैदल चलकर दुल्हे के घर पहुंची। गांव में सड़क न होने की वजह से दुल्हन को पैदल ही कई किमी तक चलकर बारात ले जानी पड़ी। चकराता के इन इलाकों में आज भी ‘जोजोड़’ परंपरा निभाई जाती है। जिसमें दुल्हन बारात लेकर अपने मायके से ससुराल पहुंचती है।
इसी पंरपरा को निभाने के लिए दुल्हन अपनी बारात लेकर पैदल निकल पड़ी। दुल्हन ने बताया कि वह करीब ढ़ाई घंटे पैदल चली। तब जाकर दुल्हे के घर पहुंची। दुल्हन ने सरकार से जल्द सड़क की मांग पूरा करने की अपील की है।
दोनों गांव के बीच सड़क मार्ग नहीं
बताया जा रहा है कि बारात बीते मंगलवार को हुई। उदावा गांव के अनिल चौहान का विवाह बुल्हाड़ गांव की शर्मीला से तय हुआ था। मंगलवार को दुल्हन बरात के साथ वाहन से लोखंडी तक पहुंची। इसके बाद उदावा गांव तक सड़क नहीं होने के कारण उसे पैदल पहाड़ी रास्ते से सफर तय करना पड़ा। बारात बुल्हाड़ गांव से उदावा गांव जानी थी। जो कि करीब 18 किमी दूर है। दोनों गांव के बीच सड़क मार्ग नहीं है।
परंपरा को निभाने के लिए दुल्हन शर्मिला को लोखंडी से करीब 10 किमी का सफर पैदल तय करना करना। सड़क सुविधा नहीं होने के कारण दुल्हन करीब ढ़ाई घंटे पैदल चलकर बरात लेकर उदावा गांव पहुंची। बीच में दुल्हन दौड़ती हुई भी नजर आई। दुल्हन के पीछे सारे रिश्तेदार और परिजन भी पैदल चलते दिखे। जिसका लोगों ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।
देहरादून का जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर लोक परंपराओं संस्कृति, रीति-रिवाजों और पारंपरिक खानपान के लिए अपनी अलग पहचान रखता है। यहां आज भी शादियां पुरानी परंपरा से होती है। इन्हीं में एक परंपरा है ‘जोजोड़’, जिसमें दुल्हन बारात लेकर अपने मायके से ससुराल पहुंचती है। हालांकि कहीं अब बदलाव भी हो गया है। कुछ जगह दुल्हा भी बारात लेकर पहुंचते हैं।

