भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। कांग्रेस ने इस उपचुनाव में एक बड़ा ‘खेल’ करने का दावा करते हुए सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के खेमे में खलबली मचा दी है।
रूठे विधायकों के सहारे कांग्रेस की रणनीति
मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने मीडिया से चर्चा में दावा किया कि भाजपा के कई रूठे और असंतुष्ट विधायक इस समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के सीधे संपर्क में बने हुए हैं। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी इन विधायकों के साथ लगातार बातचीत कर रही है और अंतिम दौर की रणनीतिक सहमति बनते ही इस सीट पर अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया जाएगा।
भाजपा का तीखा पलटवार
कांग्रेस के इस बड़े दावे पर भाजपा ने भी बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया है। भाजपा नेताओं और कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस के इन दावों को पूरी तरह से काल्पनिक और बेबुनियाद बताया है। भाजपा का कहना है कि जीतू पटवारी दिन में सपने देखना बंद करें और पहले अपने खुद के विधायकों को बिखरने से संभालें। सत्ता पक्ष ने दावा किया कि असलियत में कांग्रेस के ही कई विधायक भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व के संपर्क में हैं।
क्या है इस चुनावी घमासान की वजह?
सीट खाली होने का कारण: यह राज्यसभा सीट पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई है।
चुनाव की तारीख:
भारत निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार इस सीट के लिए 26 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होगी और 12 नवंबर को मतदान के साथ ही नतीजे घोषित किए जाएंगे।
संख्या बल का गणित: 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश
विधानसभा में वर्तमान आंकड़ों के अनुसार भाजपा के पास 164 विधायकों का प्रचंड बहुमत है। संख्या बल के लिहाज से भले ही भाजपा बेहद मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही हो, लेकिन कांग्रेस द्वारा भाजपा के रूठे विधायकों से संपर्क के इस दावे ने उपचुनाव की लड़ाई को बेहद दिलचस्प और सस्पेंस से भरपूर बना दिया है।

