दिवाली करीब आते ही दिल्ली के बाजारों में फिर जोश लौट आया है। लोग खरीदारी में जुटे हैं, दुकानों पर भीड़ है, और कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं। लेकिन, इस सबके बीच एक राजनीतिक रैली ने व्यापारियों की टेंशन बढ़ा दी है। उन्हें डर है कि रैली के चलते भारी भीड़, ट्रैफिक जाम और सख्त ट्रैफिक नियमों से उनका सारा त्योहारी कारोबार गड़बड़ा सकता है। इसी वजह से तमाम व्यापारिक संगठनों ने कांग्रेस पार्टी से अपील की है कि रैली की तारीख आगे बढ़ा दें। अब देखना है, इतना बड़ा त्योहार और सियासत दोनों के बीच तालमेल कैसे बनेगा?
राजधानी दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की विशाल रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर राहुल गांधी की रैली दिवाली के बाद आयोजित करने का अनुरोध किया है। संगठन का कहना है कि इस आयोजन से मध्य दिल्ली के प्रमुख बाजारों में कारोबार और माल की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है।
दस लाख लोगों के जुटने का अनुमान
CTI के मुताबिक, रैली में करीब 10 लाख लोगों और 15 हजार से 20 हजार वाहनों के पहुंचने की संभावना जताई गई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के आने से पार्किंग की समस्या गंभीर हो सकती है। साथ ही, यातायात व्यवस्था प्रभावित होने पर दुकानदारों, ग्राहकों और मालवाहक वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
व्यापारियों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है, क्योंकि धनतेरस 6 नवंबर और दिवाली 8 नवंबर को है। त्योहार से पहले के दिनों में बाजारों में खरीदारी और सामान की आपूर्ति आम दिनों के मुकाबले अधिक रहती है।
20 बाजारों के कारोबार पर असर की आशंका
CTI के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि संगठन रैली का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि व्यापारियों की आजीविका सुरक्षित रखने की अपील कर रहा है। उनके अनुसार, आयोजन के कारण मध्य दिल्ली के आसपास स्थित बाजारों में रोजाना होने वाला 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित हो सकता है। इन बाजारों में चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, करोल बाग, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट और गफ्फार मार्केट सहित कई प्रमुख व्यापारिक केंद्र शामिल हैं।
पार्किंग और माल ढुलाई सबसे बड़ी चुनौती
व्यापारिक संगठन ने सवाल उठाया है कि रैली में आने वाले हजारों वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था कहां होगी। CTI का कहना है कि यदि यातायात प्रतिबंध पहले से लागू होते हैं, तो बाजारों तक माल पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। संगठन के अनुसार, 31 अक्टूबर की दोपहर से ही दिल्ली की सीमाओं पर वाहनों की संख्या बढ़ने और प्रमुख सड़कों पर बैरिकेडिंग की आशंका है।
CTI ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन का भी हवाला दिया। संगठन के मुताबिक, उस दौरान 5,000 से 7,000 लोगों की मौजूदगी के बीच मध्य दिल्ली में कई घंटे तक यातायात बाधित रहा था।
रैली के लिए सुझाए दो विकल्प
व्यापारियों ने समस्या के समाधान के लिए दो सुझाव दिए हैं। पहला, रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। दूसरा, यदि तारीख बदलना संभव नहीं है, तो आयोजन को बुराड़ी मैदान में स्थानांतरित किया जाए।
CTI के अनुसार, दिल्ली के कई ऐतिहासिक बाजार देशभर में सामान की आपूर्ति करते हैं। इन बाजारों की दैनिक गतिविधियां औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाले करीब 5,000 ट्रकों और टेंपो पर निर्भर हैं। ऐसे में यातायात बाधित होने का असर स्थानीय व्यापार के साथ अन्य क्षेत्रों में होने वाली आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

