90 वर्षीय अशक्त पेंशनर को चार लोगों ने उठाकर बैंक पहुंचाया, सेंट्रल बैंक जगदलपुर की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
बैंक प्रशासन घर पहुंचकर जीवन प्रमाणपत्र बनाने की व्यवस्था सुनिश्चित करे, बुजुर्गों और अशक्त पेंशनरों को बैंक बुलाना अमानवीय : भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ
रायपुर। बुजुर्ग पेंशनरों के लिए प्रतिवर्ष जमा किया जाने वाला जीवन प्रमाणपत्र (लाइफ सर्टिफिकेट) अब सुविधा के बजाय जी का जंजाल बनता जा रहा है। डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन सुविधाओं के दावों के बीच बैंकों में बुजुर्ग, बीमार और अशक्त पेंशनरों को जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए होने वाली परेशानियां बैंक प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने बस्तर संभाग के जगदलपुर स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा में सामने आई एक घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्थिति बेहद संवेदनहीन और चिंताजनक है।
महासंघ के बस्तर संभागीय अध्यक्ष आर.एन. ताटी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 90 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक मोसूराम बघेल, निवासी बेड़ा उमरगांव, विकासखंड जगदलपुर, को बीते सोमवार चार लोगों द्वारा उठाकर सेंट्रल बैंक की मुख्य शाखा में लाया गया। उनकी स्थिति ऐसी थी मानो किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज को अस्पताल पहुंचाया जा रहा हो। संयोग से वहां मौजूद आर.एन. ताटी ने यह दृश्य अपनी आंखों से देखा और तत्काल बैंक शाखा प्रबंधक के समक्ष इस अव्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई। इसके बाद बैंक कर्मचारियों ने आनन-फानन में जीवन प्रमाणपत्र संबंधी प्रक्रिया पूरी की और बुजुर्ग पेंशनर को रवाना किया।
वीरेन्द्र नामदेव ने कहा कि जब 90 वर्ष के अशक्त पेंशनर को जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए चार लोगों के सहारे बैंक पहुंचना पड़े, तो डिजिटल इंडिया और बैंकिंग सुविधाओं के प्रचार-प्रसार के दावों की जमीनी हकीकत समझी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि बैंक प्रशासन द्वारा 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों को अक्टूबर एवं नवंबर माह में तथा 80 वर्ष से कम आयु के पेंशनरों को नवंबर माह में जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की सूचना दी जाती है। लेकिन विडंबना यह है कि प्रत्येक वर्ष जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के बावजूद बैंक की लापरवाही और तकनीकी प्रक्रियाओं में देरी के कारण अनेक पेंशनरों की नवंबर माह के बाद पेंशन रोक दी जाती है। इसके बाद बुजुर्ग पेंशनरों को अपनी पेंशन प्राप्त करने के लिए बैंक और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
नामदेव ने कहा कि सरकार और बैंक प्रशासन की जिम्मेदारी है कि 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों तथा बीमार, अशक्त और चलने-फिरने में असमर्थ पेंशनरों के घर जाकर बैंक कर्मचारी स्वयं उनका डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र तैयार करें। बैंक में आने वाले बुजुर्गों के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था हो तथा उनके कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जाए। यह भी आवश्यक है कि बैंक अपने पेंशनर खाताधारकों की नियमित जानकारी रखे और समय पर जीवन प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पूरी नहीं होने की स्थिति में उनसे संपर्क करे, ताकि किसी की पेंशन अनावश्यक रूप से बाधित न हो।

घर बैठे डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र की सुविधा, महासंघ कर रहा है जागरूक
वीरेन्द्र नामदेव ने बताया कि डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) और जीवन प्रमाण पोर्टल के माध्यम से अब मोबाइल पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर घर बैठे जीवन प्रमाणपत्र जमा किया जा सकता है। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ द्वारा भी पेंशनरों को इस सुविधा के उपयोग के लिए प्रशिक्षित और जागरूक किया जा रहा है। महासंघ के प्रदेश महामंत्री प्रवीण कुमार त्रिवेदी सितंबर माह से लगातार इस कार्य में जुटे हुए हैं। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और प्रदेश के अनेक पेंशनर घर बैठे डिजिटल माध्यम से अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जिन पेंशनरों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है अथवा जो स्वयं डिजिटल प्रक्रिया समझने में असमर्थ हैं, वे अपने परिजनों या किसी परिचित के एंड्रॉयड मोबाइल की सहायता से भी यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आधार, पेंशन संबंधी आवश्यक जानकारी और निर्धारित डिजिटल प्रक्रिया का पालन करना होता है।
बैंक प्रशासन को जारी करना चाहिए स्पष्ट निर्देश
महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव , महामंत्री अनिल गोल्हानी, प्रवीण कुमार त्रिवेदी,संगठन मंत्री टी पी सिंह ने बैंक प्रबंधन और संबंधित प्रशासन से मांग की है कि 80 वर्ष से अधिक आयु के सभी पेंशनरों तथा गंभीर रूप से बीमार और अशक्त पेंशनरों के घर जाकर जीवन प्रमाणपत्र बनाने की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू की जाए। बैंक शाखाओं में वरिष्ठ पेंशनरों के लिए अलग काउंटर, बैठने की व्यवस्था और प्राथमिकता से कार्य निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। जीवन प्रमाणपत्र जमा होने के बावजूद किसी भी पेंशनर की पेंशन तकनीकी अथवा बैंक की लापरवाही के कारण नहीं रोकी जाए।
उन्होंने कहा कि पेंशन किसी पर उपकार नहीं, बल्कि जीवनभर की सेवा के बाद अर्जित अधिकार है। बुजुर्ग पेंशनरों को अपने जीवित होने का प्रमाण देने के लिए इस उम्र में शारीरिक कष्ट और अपमानजनक परिस्थितियों से गुजरने को मजबूर करना उचित नहीं है। बैंक प्रशासन को अपनी कार्यप्रणाली में मानवीय संवेदनशीलता लानी होगी, ताकि बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक और समय पर उनकी पेंशन मिल सके।

