बस्तर में जवानों के साथ दीपावली मनाने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कारगिल से लेकर लेह-लद्दाख तक, समुद्र तट पर सर क्रीक से लेकर आईएनएस विक्रांत तक, वीर जवानों के साथ मनाई गई हर दीपावली मेरे लिए यादगार रही है. मेरे वीर जवानों, इस बार मैं आपके बीच बस्तर के जंगलों में दीपावली मनाने आया हूं.”
उन्होंने कहा, “यह वही भूमि है, जहां कभी नक्सली आतंक का कहर हुआ करता था. आज हमारे जवानों के साहस, त्याग, तपस्या और समर्पण के कारण वहां नक्सली हिंसा का प्रभाव काफी कम हुआ है और विकास की नई दीपावली शुरू हुई है.”
पीएम मोदी ने कहा, “साल 2026 की दीपावली विशेष है. 40-50 वर्षों बाद ऐसी दीपावली आई है. यह पहली दीपावली है, जब देश नक्सलवाद और माओवादी आतंकवाद के खिलाफ दशकों लंबी लड़ाई में निर्णायक सफलता हासिल कर चुका है.”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करनपुर स्थित कोबरा (CoBRA) ऑपरेशंस बेस का दौरा किया. यह बेस बस्तर और अबूझमाड़ में नक्सल-विरोधी अभियानों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र और लॉन्च पैड के रूप में काम करता था.
PM मोदी ने कहा कि जब हम देश के लिए काम करते हैं, तो हम देश में शांति और सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं. पिछले 12 वर्षों में, देश ने न केवल नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई जीती है, बल्कि गरीबी के खिलाफ भी एक बड़ी लड़ाई लड़ी है. इस साल दिवाली से ठीक पहले, कुछ दिन पहले ही, विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत में 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं. गरीबी हटाने के नारों के साथ जो काम दशकों तक नहीं हो पाया, उसे देश ने महज 12 वर्षों में कर दिखाया है. सोचिए, यह कितनी बड़ी उपलब्धि है. दिवाली के दौरान हम रंगोली बनाते हैं. हमने कल्याणकारी योजनाओं की एक ऐसी रंगोली बनाई है, जिसने गरीबों को लगातार सशक्त बनाया है.
PM मोदी ने कहा कि पिछली सरकारों ने जमीन पर लड़ रहे सुरक्षाकर्मियों के हाथ बांध रखे थे. नक्सली हमले होते थे, लेकिन सुरक्षा बलों को खुलकर जवाबी कार्रवाई करने की आज़ादी नहीं थी. हमने सुरक्षा बलों को सभी ज़रूरी फ़ैसले लेने की आज़ादी दी. हमने सरकार और सिस्टम के भीतर मौजूद कुछ लोगों द्वारा वामपंथी उग्रवाद को दिए जा रहे समर्थन को रोकने का भी काम किया. हमने संवेदनशीलता के साथ काम किया और माओवादी आतंकवाद की कमर तोड़ दी. सेवा भाव के साथ, हमने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों का जीवन बदल दिया. यही कारण है कि नक्सलवाद से पीड़ित लोग भी आज सरकार और सुरक्षा बलों के साथ मजबूती से खड़े हैं. इस बड़ी लड़ाई को जीतने में अहम योगदान देने वाले कई नागरिक भी आज यहां मौजूद हैं. मैं उन सभी का आभार व्यक्त करता हूं
नक्सलवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई आसान नहीं थी :PM मोदी
PM मोदी ने कहा कि माओवादी आतंक और नक्सलवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई आसान नहीं थी. नक्सलियों ने तो लोगों से वोट डालने का अधिकार भी छीन लिया था. एक ही साल में 2,000 से ज़्यादा नक्सली हमले हुए थे. 2010 में, पास के दंतेवाड़ा में नक्सलियों के साथ हुई एक मुठभेड़ में हमारे CRPF के 76 जवान शहीद हो गए थे. उसी साल दंतेवाड़ा की एक और घटना में 44 बेगुनाह नागरिक मारे गए थे. यह धरती हमारे बहादुर सैनिकों के ख़ून से सनी हुई थी. लेकिन अपने महलों में रहने वाले उन प्रभावशाली नेताओं की तरफ़ से दर्द की एक भी आवाज़ नहीं सुनाई दी. उनकी आंखों से एक भी आंसू नहीं गिरा. इस तरह के हमले लगभग हर रोज कहीं न कहीं होते रहते थे. यह सिलसिला दशकों तक चलता रहा. इस दौरान, अकेले छत्तीसगढ़ में 1,000 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी शहीद हुए. अगर आप 2004 से 2013 के आंकड़े देखें, तो पाएंगे कि हर साल मारे गए हमारे बहादुर सैनिकों की संख्या, मारे गए नक्सलियों की संख्या से कहीं ज़्यादा थी. अफसोस की बात है कि उस समय की सरकारों ने नक्सलवाद को एक लाइलाज बीमारी मान लिया था और इसे ऐसे ही छोड़ दिया था. कोई भी देश ऐसी सोच के साथ नहीं चल सकता, जो अपने दुश्मनों के सामने बस यह मान ले कि हालात ऐसे ही चलते रहेंगे.

