अंबिकापुर। सरगुजा जिले के करजी गांव में होलिका दहन के बाद जलते अंगारों पर नंगे पैर चलने की परंपरा इस वर्ष भी गुरुवार रात को श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ निभाई गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने इस अनोखी परंपरा में भाग लिया। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन को देखने और इसमें शामिल होने पहुंचे। ग्रामीणों की मान्यता है कि अंगारों पर श्रद्धा से चलने वाले लोगों को कोई बीमारी नहीं होती और गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

करजी गांव, जो व्यवसायिक खेती के लिए प्रसिद्ध है, में होलिका दहन शुभ मुहूर्त के अनुसार विधि-विधान से किया जाता है। सबसे पहले गांव के बैगा होलिका की पूजा करते हैं, इसके बाद होलिका प्रज्वलित की जाती है। जब होलिका की लकड़ियां जलकर अंगारों में बदल जाती हैं, तो इन्हें समतल कर दिया जाता है, और फिर ग्रामीण इन धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं।

करजी गांव की यह अनूठी परंपरा अब सोशल मीडिया के माध्यम से और भी प्रसिद्ध हो चुकी है। अंबिकापुर शहर से भी लोग इस आयोजन को देखने और इसमें भाग लेने पहुंचते हैं। गांव के बैगा अशोक राम के अनुसार, यह परंपरा पूर्वजों से चली आ रही है। होलिका की जलती आग की गर्मी तो महसूस होती है, लेकिन अंगारों पर चलने वालों के पैर न तो जलते हैं और न ही छाले पड़ते हैं।
गांव के वरिष्ठ नागरिक अशोक कुशवाहा बताते हैं कि वे भी बचपन से इस परंपरा का पालन कर रहे हैं और हर साल धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं, जिससे उन्हें कभी कोई नुकसान नहीं हुआ।

