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    Home»छत्तीसगढ़»बिलासपुर नगर निगम: नाली सफाई के लिए मांगा अनुभव, पुराने ठेकेदारों को मिलेगा फायदा
    छत्तीसगढ़

    बिलासपुर नगर निगम: नाली सफाई के लिए मांगा अनुभव, पुराने ठेकेदारों को मिलेगा फायदा

    Chhattisgarh RajyaBy Chhattisgarh RajyaMarch 28, 2025
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    नगर निगम
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    मुख्य बिंदु:

    • नए ठेकेदारों के लिए टेंडर हासिल करना लगभग असंभव।
    • नया नियम पुराने ठेकेदारों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
    • सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद और कमजोर हुई।

      बिलासपुर: सफाई टेंडर में अनुभव अनिवार्य, नए ठेकेदारों के लिए मुश्किलें बढ़ीं

      शहर की सफाई व्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से नगर निगम ने सफाई टेंडर में एक नया नियम जोड़ा है, जिसके तहत अनुभव को अनिवार्य कर दिया गया है। इस बदलाव के कारण अब केवल वही ठेकेदार टेंडर के पात्र होंगे, जिन्होंने पहले सफाई कार्य का अनुभव प्राप्त किया है।

      नए ठेकेदारों के लिए टेंडर हासिल करना कठिन

      इस नियम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कई लोगों का मानना है कि इससे नए ठेकेदारों के लिए टेंडर प्राप्त करना लगभग असंभव हो जाएगा। यह नियम पुराने ठेकेदारों के पक्ष में एक प्रकार का विशेषाधिकार साबित हो सकता है, जिससे सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद भी धूमिल होती दिख रही है।

      नगर निगम समय-समय पर सफाई कार्यों के लिए टेंडर जारी करता है, लेकिन इस बार टेंडर प्रक्रिया में अनुभव को अनिवार्य शर्त बना दिया गया है। इस बदलाव के कारण जिन ठेकेदारों के पास पूर्व में सफाई कार्य का अनुभव नहीं है, वे टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगे।

      पुराने ठेकेदारों का दबदबा बना रहेगा

      इस नियम के चलते पुराने ठेकेदारों का एकाधिकार बना रहेगा, जिससे उनकी मनमानी जारी रहने की आशंका है। वर्तमान में सफाई व्यवस्था पहले से ही सवालों के घेरे में है। सफाई व्यवस्था की बदहाल स्थिति के बावजूद पुराने ठेकेदारों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती।

      अब जब टेंडर प्रक्रिया में अनुभव को अनिवार्य कर दिया गया है, तो वही ठेकेदार दोबारा सफाई कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे, जिन पर पहले से ही लापरवाही की शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। नगर निगम की निगरानी के बावजूद कचरा उठाने और नालों की सफाई में लापरवाही आम बात हो गई है।

      शहर में सफाई व्यवस्था बदहाल

      शहर के कई इलाकों में गंदगी और कचरे के ढेर लगे हुए हैं। कई नालियां जाम पड़ी हैं, लेकिन सफाई कार्यों में लापरवाही के कारण स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा। तंग गलियों में सफाई कर्मचारी नहीं पहुंच पाते, जिससे वहां कचरा जमा रहता है। कई जगहों पर सफाई अधूरी छोड़ दी जाती है।

      मुख्य मार्गों को छोड़कर अंदरूनी गलियों की स्थिति बेहद खराब है। पुराने ठेकेदार लंबे समय से सफाई का काम कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों से मिलीभगत के कारण उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। नए नियमों से पुराने ठेकेदारों को एक तरह से आरक्षण मिल गया है, जिससे उनकी मनमानी और बढ़ने की संभावना है।

      मुख्य अभियंता का आदेश, सवालों के घेरे में फैसला

      मुख्य अभियंता राजकुमार मिश्रा ने 5 मार्च को एक आदेश जारी किया, जिसमें उल्लेख किया गया कि नालियों की सफाई के लिए केवल वे ठेकेदार ही भाग ले सकते हैं, जिनके पास कम से कम तीन साल का अनुभव हो। यह नियम सीधे तौर पर पुराने ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने वाला माना जा रहा है।

      इस फैसले को लेकर एक और बड़ा सवाल उठ रहा है—क्या बिना नगर निगम आयुक्त के हस्ताक्षर के ऐसा आदेश जारी किया जा सकता है?

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