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CG दुष्कर्म मामला: जमानत पर रिहा होते ही आरोपी ने दोबारा किया दुष्कर्म, हाई कोर्ट ने अलग-अलग सजा सुनाने का दिया आदेश

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से आई खबर में, दो बार दुष्कर्म के दोषी ने दोनों सजा एक साथ चलाने की याचिका दी थी, लेकिन कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए इसे खारिज कर दिया। अब दोषी की पहली सजा पूरी होने के बाद दूसरी सजा लागू होगी।

बिलासपुर (CG Rape Case): छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दो अलग-अलग दुष्कर्म मामलों में दोषी पाए गए आरोपी संजय नागवंशी की मांग को खारिज कर दिया, जिसमें उसने दोनों सजाओं को एक साथ चलाने की याचिका दी थी। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने कहा कि आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड गंभीर है और एक बार जमानत पर रिहा होने के बाद उसने फिर से वही जघन्य अपराध दोहराया, जो न्यायिक विवेक का दुरुपयोग है। इसलिए उसे कोई भी राहत नहीं दी जा सकती।

संजय नागवंशी ने मार्च 2014 में नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर कुनकुरी ले जाकर 2-3 महीने तक दुष्कर्म किया था। पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ और अंबिकापुर की पाक्सो कोर्ट ने दिसंबर 2015 में उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पाक्सो एक्ट के तहत 10-10 वर्ष की सजा सुनाई।

इसके बाद आरोपी को हाई कोर्ट से अस्थायी जमानत मिली और वह जेल से रिहा हो गया, लेकिन बाद में उसने फिर से एक अन्य नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। दूसरे मामले में भी अंबिकापुर की पाक्सो कोर्ट ने 2019 में उसे 10 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई। फिलहाल वह अंबिकापुर केंद्रीय जेल में सात वर्षों से बंद है।

आरोपी ने याचिका में दावा किया कि उसने पहली सजा में 7 साल से अधिक समय काट लिया है और दोनों सजाएं अलग-अलग चलने पर कुल 20 साल जेल में बिताने होंगे। लेकिन हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि दोनों मामलों की सुनवाई और दोषसिद्धि अलग-अलग समय पर हुई है, इसलिए सजाएं एक साथ नहीं चल सकतीं।

कोर्ट ने यह भी पाया कि आरोपी ने दूसरे मामले की सुनवाई के दौरान पहला अपराध छुपाया था। आरोपी की आदत अपराधी होने की है और उसने एक बार सजा पाने के बाद जमानत पर रिहा होकर फिर से वही अपराध किया। ऐसे में कोर्ट ने कहा कि न्यायिक विवेक का प्रयोग आरोपी के पक्ष में नहीं किया जा सकता और दोनों सजाएं क्रमशः लागू होंगी।

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