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    Home»छत्तीसगढ़»माओवादी संगठन में नेतृत्व संकट, बासवराजू की मौत के बाद भारत लौटा उसका ‘गुरू’, फिलीपींस में था अंडरग्राउंड
    छत्तीसगढ़

    माओवादी संगठन में नेतृत्व संकट, बासवराजू की मौत के बाद भारत लौटा उसका ‘गुरू’, फिलीपींस में था अंडरग्राउंड

    Chhattisgarh RajyaBy Chhattisgarh RajyaMay 29, 2025
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    माओवादी
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    रायपुर: छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में बासवराजू की मौत के बाद, सीपीआई (माओवादी) के महासचिव पद को लेकर संगठन में असमंजस बढ़ गया है। बासवराजू के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर मुप्पल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति का नाम चर्चा में है, जो बासवराजू के गुरु और इससे पहले संगठन के कमांडर रह चुके हैं। हालांकि, उनकी उम्र और स्वास्थ्य की वजह से फिर से नेतृत्व संभालने की संभावना कम मानी जा रही है। संगठन के अंदर नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और यह सवाल उठ रहा है कि अगला महासचिव कौन होगा।

    बस्तर के जंगलों में कहा जा रहा है कि गणपति भारत वापस लौट आए हैं। वे पहले फिलीपींस में इलाज के लिए गए थे, लेकिन बासवराजू की मौत के बाद वापस आ गए। गणपति लगभग 15 साल तक इस संगठन के महासचिव रहे, लेकिन 2018 में उन्होंने पद छोड़ दिया था और बासवराजू को जिम्मेदारी सौंपी थी। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, गणपति वर्तमान में सलाहकार की भूमिका में हैं, लेकिन उनका गिरता स्वास्थ्य उन्हें फिर से महासचिव बनने से रोकता है।

    सूत्रों की मानें तो महासचिव का पद आंध्र प्रदेश या तेलंगाना के किसी वरिष्ठ कमांडर को मिलने की संभावना है। कहा जा रहा है कि बासवराजू के उत्तराधिकारी की आधिकारिक घोषणा न हो, जैसा पहले रामचन्द्र रेड्डी के मामले में हुआ था, जब उन्होंने रामन्ना के निधन के बाद पदभार संभाला था।

    एक काउंटर-इंसर्जेंसी अधिकारी के मुताबिक, गणपति जानता है कि वह “उधार की जिंदगी” जी रहे हैं और सुरक्षा बल उन्हें खत्म कर सकते हैं। बस्तर के आईजी सुंदरराज ने भी कहा कि अब संगठन में ऐसा कोई नेता नहीं बचा जो बासवराजू की जगह भर सके। शेष कमांडरों के सामने दो ही विकल्प हैं — आत्मसमर्पण या उसी तरह खत्म होना।

    सुंदरराज ने यह भी बताया कि माओवादी संगठन तेजी से कमजोर हो रहा है, जिसमें विश्वसनीय नेतृत्व और रणनीतिक दिशा की कमी है। बासवराजू के उत्तराधिकारी को लेकर बहस फिलहाल बेकार है क्योंकि संगठन अपनी अंतिम सांस ले रहा है। माना जा रहा है कि बासवराजू ही संगठन के अंतिम प्रभावी महासचिव थे, और अब किसी वरिष्ठ कैडर के नेतृत्व संभालने की संभावना न के बराबर है।

    माओवादी संगठन की ओर से जारी प्रेस नोट में युवा नेतृत्व की सुरक्षा पर जोर दिया गया है। इसमें बासवराजू का अंतिम संदेश कैडरों के लिए है, जिसमें कहा गया है कि वे यह जिम्मेदारी केवल कुछ वर्षों के लिए संभालेंगे और नए युवा नेतृत्व की सुरक्षा जरूरी है।

    पुलिस ने इस बयान की पुष्टि तो नहीं की, लेकिन बताया कि लगातार सुरक्षा कार्रवाइयों के कारण माओवादी संगठन टूट चुका है और अब केवल चार पोलित ब्यूरो सदस्य बचे हैं। यह संगठन अपने अंत की ओर बढ़ रहा है।

    आने वाले समय में बासवराजू और गणपति के बाद सोनू उर्फ मल्लोजुला वेणुगोपाल और थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी (तेलंगाना) या झारखंड से मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर के पद संभालने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि तेलुगु प्रभुत्व के कारण मिशिर बेसरा का संगठन में प्रभाव सीमित हो सकता है।

    एक अधिकारी ने बताया कि शीर्ष माओवादी कमांडरों में यह भय व्याप्त है कि कौन अगला निशाना बनेगा। वे जानते हैं कि बासवराजू को पकड़ना उनके लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं था, इसलिए उनके लिए खुद को सुरक्षित रखना मुश्किल है। संगठन में भरोसे की दरारें गहरी हो चुकी हैं, और कमांडरों को यह नहीं पता कि किस पर विश्वास करें।

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