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दीपों की रोशनी से नहाई अयोध्या की भव्यता ने देशवासियों का हृदय मोह लिया

अयोध्या: दीपों की रोशनी से नहाई अयोध्या की भव्यता ने न केवल देशवासियों का हृदय मोह लिया, बल्कि विदेशों से आए मेहमान भी इस दृश्य को देख अभिभूत हो गए। दीपोत्सव 2025 में बड़ी संख्या में विदेशी अतिथि अपने परिवारों और मित्रों के साथ पहुंचे.

रामनगरी अयोध्या में भव्य दीपोत्सव आयोजित हुआ, जिसने विश्व पटल पर एक बार फिर भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समृद्धि का परचम लहराया. सरयू नदी के 56 घाटों पर 26,17,215 दीये प्रज्ज्वलित कर विश्व रिकॉर्ड बना. इस ऐतिहासिक क्षण को दर्ज करने के लिए ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ की टीम स्वयं अयोध्या में मौजूद थी, जिसने इस रिकॉर्ड की गवाह बनी. इस आयोजन में डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 32,000 वॉलंटियर्स ने अथक परिश्रम से रामनगरी को दीयों की रोशनी से जगमग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

विश्व रिकॉर्ड की चमक

इस बार अयोध्या के दीपोत्सव में दो विश्व रिकॉर्ड स्थापित किए गए. पहला रिकॉर्ड 26,17,215 दीयों को एक साथ प्रज्ज्वलित करने का था, जिसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग, अयोध्या जिला प्रशासन, और डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय को गिनीज पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वहीं दूसरा रिकॉर्ड 2,128 लोगों द्वारा एक साथ सरयू आरती करने का था, जिसके लिए पर्यटन विभाग, अयोध्या जिला प्रशासन, और सरयू आरती समिति को गिनीज प्रमाण पत्र प्रदान किया गया. 

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दीपोत्सव के दौरान जलाए गए 26 लाख से अधिक दीयों ने न केवल एक विश्व कीर्तिमान स्थापित किया, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत आर्थिक और सामाजिक संदेश भी है. रामनगरी का यह आयोजन ‘लोकल फॉर वोकल’ की भावना को साकार करता है, जिसमें स्थानीय उत्पादों, कारीगरों और संस्कृति को खास तवज्जो दी गई. इन दीयों का निर्माण अयोध्या और आसपास के जिलों के कुम्हारों, हस्तशिल्पियों और स्थानीय उद्यमियों द्वारा किया गया. इससे न सिर्फ हजारों परिवारों को रोजगार मिला और मिट्टी के दीयों की मांग ने पारंपरिक कुम्हारी उद्योग को पुनर्जीवित किया. वहीं तेल, बाती, रंगाई और पैकेजिंग जैसे सहायक उद्योग भी शामिल हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बहुआयामी लाभ मिला.

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 32,000 वॉलंटियर्स की मेहनत शामिल थी. उन्होंने सरयू नदी के 56 घाटों पर लगभग 28 लाख दीयों की व्यवस्था की, जिनमें से 26 लाख से अधिक दीये प्रज्ज्वलित किए गए.

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