Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ गाने पर डांस करते नजर आए IPS असित यादव ,डीआईजी पद पर पदोन्नति… 
    • बंगाल में CM पर फैसला कराने खुद जाएंगे अमित शाह, असम की जिम्मेदारी जेपी नड्डा को…
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुसार जांजगीर-चांपा में तेजी से आगे बढ़ रहा मेडिकल कॉलेज प्रोजेक्ट
    • संवाद से समाधान: कमराखोल में मुख्यमंत्री ने दूर की बिजली बिल की चिंता
    • माओवादियों का गढ़ रहे तर्रेम बना स्वास्थ्य मॉडलः राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल
    • एक चौपाल ऐसा भी जहाँ खुशियों और तालियों की रही गूंज,लखपति दीदियों के हौसले की उड़ान देख गदगद हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
    • सुशासन तिहार: चौपाल में मिली राहत, सरलाबाई मरावी की समस्या का मुख्यमंत्री ने किया त्वरित समाधान
    • सुशासन तिहार: सरोधी की चौपाल में दिखी बदलाव की कहानी
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Wednesday, May 6
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»अंतर्राष्ट्रीय»मुस्लिम ब्रदरहुड को ट्रंप ने घोषित कर दिया आतंकवादी संगठन, ऐलान से UAE खुश, अमेरिकी बैन के मायने
    अंतर्राष्ट्रीय

    मुस्लिम ब्रदरहुड को ट्रंप ने घोषित कर दिया आतंकवादी संगठन, ऐलान से UAE खुश, अमेरिकी बैन के मायने

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJanuary 14, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। अमेरिका के इस फैसले का मतलब है कि ट्रांसनेशनल सुन्नी इस्लामी ग्रुप की लेबनानी, जॉर्डनियन और मिस्र की शाखाओं को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया गया है। यह समूह 1920 के दशक में मिस्र में स्थापित हुआ था और इसने पूरे क्षेत्र में इस्लामी राजनीतिक आंदोलनों को जन्म दिया। ये विचारधारा इस्लामिक देशों में काफी लोकप्रिय और विवादित भी है। मुस्लिम ब्रदरहुड यानि जमात अल-इखवान अल-मुस्लिमीन को 1928 में मिस्र में हसन अल-बन्ना ने स्थापित किया था, जिसकी विचारधारा ये है कि ‘इस्लाम ही समाधान’ है। इसका मकसद हर जगह शरिया कानून स्थापित करना है।

    इसकी विचारधारा अरब और मुस्लिम दुनिया में लोकप्रिय और विवादित दोनों रही है। हालांकि मुस्लिम ब्रदरहुड के नेताओं का दावा रहा है कि उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है, लेकिन अभी भी मुस्लिम ब्रदरहुड कई तरह की मजहबी हिंसा में शामिल रहा है। इस विचारधारा को मानने वाले लोग भी दुनिया के कई देशों में हिंसक वारदातों को अंजाम देते रहे हैं। मुस्लिम ब्रदरहुड का दावा है कि वो अब चुनाव और अन्य शांतिपूर्ण तरीकों से इस्लामी शासन स्थापित करना चाहते हैं, लेकिन इस ग्रुप के कई शाखाओं के पास हथियारबंद लड़ाके हैं। आलोचक इस संगठन को बहुत बड़ा खतरा मानते रहे हैं। अमेरिका के इस फैसले का संयुक्त अरब अमीरात ने स्वागत किया है, जबकि तुर्की के लिए ये एक बड़ा झटका है, क्योंकि राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन इस विचारधारा के समर्थक माने जाते हैं।

    मुस्लिम ब्रदरहुड क्या है , इसका मकसद क्या है?
    अमेरिका ने 13 जनवरी को मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है, जिसका प्रभाव काफी ज्यादा होने वाला है। मुस्लिम ब्रदरहुड, अरब देशों में फैला एक कट्टर इस्लामिक मूवमेंट है और स्कूल टीचर से मजहबी नेता बने हसन अल-बन्ना ने इसकी स्थापना की थी। उनका मानना था कि इस्लामी विचारधारा ही शासन का आधार होनी चाहिए। शुरूआती दिनों में इसने सामाजिक आंदोलनों पर काम किया और फिर धीरे धीरे इसने इस्लाम के नाम पर हिंसा फैलाना शुरू कर दिया। इसके एक हथियारबंद समूह ने ब्रिटिश उपनिवेशवादियों और इजरायल के खिलाफ लड़ाई लड़ी। 1948 में मिस्र के प्रधानमंत्री महमूद फहमी अल-नोकराशी की हत्या में भी इसी संगठन का हाथ था। क्योंकि उन्होंने इस संगठन को गैर कानून घोषित कर दिया था। अल-बन्ना की काहिरा में हत्या कर दी गई।

    मुस्लिम ब्रदरहुड क्या है, उत्थान और पतन

    • डोनाल्ड ट्रंप ने मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकी संगठन घोषित किया
    • 1928 में मिस्र में हसन अल-बन्ना ने मु्स्लिम ब्रदरहुड की स्थापना की
    • दुनिया के सबसे प्रभावशाली सुन्नी इस्लामी संगठनों में से एक है मुस्लिम ब्रदरहुड
    • मुस्लिम ब्रदरहुड की विचारधारा ‘इस्लाम ही समाधान’ है।
    • 2011 के अरब स्प्रिंग के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड की फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी ने मिस्र में चुनाव जीता
    • मुस्लिम ब्रदरहुड के नेता मोहम्मद मुर्सी 2012 में राष्ट्रपति बने
    • 2013 में मोहम्मद मुर्सी को सेना ने सत्ता से हटा दिया, नेताओं को जेल में डाल दिया
    • मुस्लिम ब्रदरहुड मिस्र, जॉर्डन, लीबिया समेत कई देशों में फैला हुआ है।
    • सऊदी अरब, मिस्र, UAE समेत कई देशों ने लगा रखा है बैन

    1952 में मिस्र में सैन्य तख्तपलट किया गया और मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल-नासर की हत्या कर दी गई। ये इल्जाम भी मुस्लिम ब्रदरहुड पर ही लगा। इसके बाद ब्रदरहुड के जाने-माने विचारक सय्यद कुत्ब को फांसी दे दी और हजारों दूसरे सदस्यों को जेल में डाल दिया। इसके बाद 1970 के दशक में ये संगठन एक बार फिर से मिस्र में उभरा। उस वक्त मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात थे। उन्होंने वामपंथियों को कंट्रोल करने के लिए इस संगठन से समझौता कर लिया।

    मुस्लिम ब्रदरहुड का उभार और पतन
    होस्नी मुबारक, जो एक तानाशाह माने जाते थे, उन्होंने अपने 30 सालों के शासनकाल के दौरान इस संगठन पर सख्ती से बैन लगा रखा था। लेकिन 2005 तक मुस्लिम ब्रदरहुड मिस्र का सबसे मजबूत विपक्षी ग्रुप बन गया और उसने संसद में पांच में से एक सीट भी जीती। 2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान होस्नी मुबारक को सत्ता से बेदखल कर दिया गया और फिर मुस्लिम ब्रदरहुड सत्ता में आ गया। लेकिन वो ज्यादा दिनों तक देश नहीं चला गया। ब्रदरहुड के राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के बंटवारे वाले शासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू हो गया और फिर मिस्र की सेना ने 2013 में इस ग्रुप को सत्ता से हटा दिया। एक क्रूर और खूनी कार्रवाई के दौरान इस संगठन को बुरी तरह से कुचल दिया गया।

    मिस्र ने इसके बाद इस संगठन को गैर कानूनी कर एक आतंकवादी ग्रुप घोषित कर दिया। मिस्र के मौजूदा राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सिसी ने भी मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्यों और उससे संबंध या सहानुभूति रखने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। हजारों लोगों को जेल में डाला गया है। ब्रदरहुड के मुख्य नेता मोहम्मद बदी मिस्र की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। इस ग्रुप के लगभग सभी सीनियर नेताओं को जेल में डाल दिया गया है या वे देश से बाहर रह रहे हैं।

    किन किन देशों में फैला है मुस्लिम ब्रदरहुड?
    मुस्लिम ब्रदरहुड की विचारधारा से इत्तेफाक रहने वाले लोग दुनिया के हर हिस्से में मौजूद हैं। लेकिन ज्यादातर कानूनी कार्रवाई के डर से चुप रहते हैं या मौके का इंतजार कर रहे हैं। लेबनान में इसकी शाखा (अल-जमा अल-इस्लामिया) को एक विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) के रूप में नामित किया गया है। मिस्र और जॉर्डन की शाखाओं को हमास को मदद देने के लिए विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (SDGT) के रूप में नामित किया गया है। मिस्र, सऊदी अरब, UAE और रूस जैसे देशों ने भी इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है।

    वहीं, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब, जो लंबे अर्से से मुस्लिम ब्रदरहुड का विरोध कर रहे हैं, वो काफी खुश हैं। UAE ने एक बयान जारी करते हुए इस फैसले का स्वागत किया है। इसके पीछे वजह ये है कि UAE और सऊदी किंगडम को मुस्लिम ब्रदरहुड से खतरा रहा है, वो नहीं चाहते कि उनके देशों में भी मुस्लिम ब्रदरहुड की विचारधारा फैले और उनके देशोें की स्थिरता को खतरा पैदा होगा, इसीलिए ये दोनों देश हमेशा से इसका सख्त विरोध करते रहे हैं। लेकिन तुर्की के लिए ये झटका है। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेत तैय्यप एर्दोगन, वैचारिक तौर पर इसका समर्थन करते हैं।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    होर्मुज में संघर्ष… अमेरिका ने ईरान की 6 नावों को उड़ाने का किया दावा

    May 5, 2026

    ‘हंता वायरस’ का यह प्रकोप एक पोलर क्रूज जहाज पर अब 150 लोगों को जमीन पर उतरने नहीं दे रही सरकार…

    May 5, 2026

    चीन में पटाखों की फैक्ट्री में भीषण धमाका, 21 लोगों की मौत और 61 घायल

    May 5, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.