धर्म आस्था

दान-पुण्य का दिन माघ पूर्णिमा, किन चीजों का दान करना माना जाता है अशुभ

माघ पूर्णिमा हिंदू धर्म में स्नान, दान और पुण्य कर्मों का विशेष दिन माना जाता है. इस दिन गंगा स्नान और जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा है. लेकिन शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं में यह भी बताया गया है कि कुछ वस्तुओं का दान इस दिन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पुण्य के स्थान पर अशुभ फल मिल सकता है. अगर आप माघ पूर्णिमा पर दान करने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि किन चीजों से बचना चाहिए.

माघ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

माघ पूर्णिमा को भगवान विष्णु चंद्र देव और पवित्र नदियों, विशेषकर मां गंगा को समर्पित माना गया है. मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान से पापों से मुक्ति मिलती है. दान करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है. संयम और सात्विक आचरण का विशेष महत्व होता है. इसी कारण दान में शुद्धता और विवेक जरूरी बताया गया है.

माघ पूर्णिमा के दिन किन चीजों का दान नहीं करना चाहिए?

दान की वस्तुक्यों दान नहीं करना चाहिएधार्मिक मान्यता
लोहे की वस्तुएंलोहा शनि ग्रह और नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना जाता हैपूर्णिमा के सात्विक दिन पर अशुभ फल दे सकता है
काले रंग की वस्तुएंयह दिन चंद्र देव और भगवान विष्णु को समर्पित हैकाले रंग को इस दिन शुभ नहीं माना जाता
नमकनमक का संबंध ऋण और आर्थिक असंतुलन से माना गया हैशुभ तिथि पर दरिद्रता बढ़ने की मान्यता
तेलतेल तामसिक प्रकृति का माना जाता हैसात्विक पर्व पर वर्जित
मदिरा / नशीली वस्तुएंपूजा और दान की भावना के विपरीतधार्मिक रूप से निषिद्ध
फटे या पुराने कपड़ेदान में शुद्धता और उपयोगिता जरूरीअशुद्ध वस्तु से पुण्य नहीं मिलता

लोहे से बनी वस्तुएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लोहा शनि ग्रह से जुड़ा माना जाता है. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि इसे भारी और नकारात्मक ऊर्जा वाला तत्व कहा गया है. माघ पूर्णिमा जैसे सात्विक दिन पर लोहे के बर्तन, औजार या अन्य लोहे की वस्तुओं का दान करने से बचना चाहिए.

काले रंग की वस्तुएं

माघ पूर्णिमा का दिन चंद्र देव और भगवान विष्णु को समर्पित होता है. इस दिन श्वेत और सात्त्विक रंगों को श्रेष्ठ माना गया है, इसलिए काले वस्त्र, काले तिल, काली चादर जैसी वस्तुओं का दान इस दिन शुभ नहीं माना जाता.

नमक का दान

शास्त्रीय मान्यताओं में नमक को ऋण, विवाद और आर्थिक असंतुलन से जोड़ा गया है. इसी कारण पूर्णिमा जैसे शुभ अवसर पर नमक का दान करने से बचने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि इससे आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं.

तेल और मदिरा जैसी तामसिक वस्तुएं

माघ पूर्णिमा सात्विक पर्व है. इस दिन तेल, शराब, मांसाहार से जुड़ी कोई भी वस्तु दान करना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि ये सात्त्विकता को भंग करती हैं, पूजा और दान की भावना के विपरीत होती हैं.

फटे, पुराने या अशुद्ध कपड़े

दान का अर्थ केवल देना नहीं, बल्कि सम्मान, उपयोगिता और शुद्धता भी है, इसलिए फटे हुए बहुत पुराने या गंदे कपड़े दान करना अशुभ माना गया है. माघ पूर्णिमा पर स्वच्छ और उपयोगी वस्तुओं का ही दान करना चाहिए.

माघ पूर्णिमा पर दान करते समय क्या ध्यान रखें?

  • दान श्रद्धा और शांत मन से करें
  • वस्तु साफ और उपयोगी हो
  • दान से पहले अहंकार न रखें
  • जरूरतमंद व्यक्ति को ही दान दें
  • यही बातें दान को सार्थक बनाती हैं.

माघ पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 फरवरी 2026 की सुबह 5:52 बजे होगी और इसका समापन 2 फरवरी 2026 को तड़के 3:38 बजे होगी. इसी अवधि में स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व माना गया है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.)

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