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    Home»धर्म आस्था»कल समाप्त होगा अधिक मास, शुरू होंगे मांगलिक कार्य
    धर्म आस्था

    कल समाप्त होगा अधिक मास, शुरू होंगे मांगलिक कार्य

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJune 14, 2026
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    Adhik Maas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, 17 मई 2026 से प्रारंभ हुआ पवित्र अधिक मास 15 जून 2026 (सोमवार) को समाप्त हो रहा है. अधिक मास के समाप्त होते ही पिछले 30 दिनों से रुके हुए सभी मांगलिक और शुभ कार्य, जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार और नए व्यापार की शुरुआत, पुनः आरंभ हो जाएंगे. एक बार फिर शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगेगी.

    क्यों रुके रहते हैं शुभ कार्य?

    हिंदू ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अधिक मास में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती, अर्थात सूर्य इस अवधि में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं करता. सौर चक्र में इस संक्रमण-विहीन अवधि के कारण इस मास को मलमास भी कहा जाता है.

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह समय सांसारिक और भौतिक शुभ कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत या अन्य मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. इसलिए इस दौरान ऐसे कार्यों पर विराम लगाया जाता है.

    अधिक मास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहा जाता है?

    पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्य संक्रांति न होने के कारण इस मास को मलमास कहकर उपेक्षित किया जाता था और कोई भी देवता इसका स्वामी बनने को तैयार नहीं था. तब यह मास भगवान विष्णु की शरण में पहुंचा.

    भगवान विष्णु ने करुणावश इसे अपना सर्वोत्तम नाम ‘पुरुषोत्तम’ प्रदान किया और स्वयं इसके अधिपति बने. तभी से अधिक मास को पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा. मान्यता है कि इस मास में की गई पूजा, जप, तप, व्रत और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है.

    अधिक मास की समाप्ति पर क्या करें?

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 15 जून 2026 को अधिक मास का अंतिम दिन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. इस दिन किए गए दान, स्नान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है.

    • दीपदान और पवित्र स्नान: इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और संध्या के समय दीपदान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.
    • पितृ तर्पण: अधिक अमावस्या पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करने का अत्यंत शुभ अवसर मानी जाती है.
    • मालपुए का दान: मान्यता है कि अधिक मास के समापन पर कांसे के पात्र में मालपुए का दान करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है तथा भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

    Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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