बिलासपुर

एडवोकेट की ‘एक रुपया मुहिम’—हजारों बच्चों की मुस्कान और शिक्षा की अनोखी मिसाल

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ | अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष: समाजसेविका और हाईकोर्ट एडवोकेट सीमा वर्मा ने 9 साल पहले 'एक रुपया मुहिम' की शुरुआत की थी। इस पहल के तहत अब तक 44 जरूरतमंद बच्चों की स्कूल फीस और 20 बच्चों की अन्य आवश्यकताएँ पूरी की जा चुकी हैं।

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की समाजसेविका और हाई कोर्ट एडवोकेट सीमा वर्मा ने नि:स्वार्थ सेवा और परोपकार की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो हजारों जरूरतमंदों के जीवन में रोशनी भर रही है। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा में सहयोग के उद्देश्य से उन्होंने 9 साल पहले ‘एक रुपया मुहिम’ की शुरुआत की थी, जो अब एक व्यापक अभियान का रूप ले चुकी है। इस मुहिम के तहत वे लोगों से मात्र एक-एक रुपया योगदान देने की अपील करती हैं और इस छोटी राशि को एक बड़े उद्देश्य में परिवर्तित कर देती हैं।

हजारों बच्चों को मिल रहा लाभ

इस पहल के सकारात्मक प्रभाव ने अब तक 44 जरूरतमंद बच्चों की स्कूल फीस का संपूर्ण खर्च वहन किया है। साथ ही, उन्होंने 20,000 से अधिक बच्चों को स्टेशनरी सामग्री वितरित कर शिक्षा के प्रति उनकी रुचि को बढ़ाने में मदद की है। यह अभियान केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने का भी कार्य कर रहा है।

कानूनी जागरूकता के क्षेत्र में भी सक्रिय योगदान

सीमा वर्मा केवल शिक्षा तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि कानूनी जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने गली-मोहल्लों, स्कूलों और कॉलेजों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए, जिनमें साइबर क्राइम, पॉक्सो एक्ट, गुड टच-बेड टच, मौलिक अधिकार और स्वच्छता जैसे अहम विषयों पर जानकारी दी। वे जरूरतमंदों को नि:शुल्क विधिक सलाह भी प्रदान कर रही हैं। उनका मानना है कि सही कानूनी जानकारी से लोग भ्रमित होने से बच सकते हैं और अपने अधिकारों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। सीमा समाज से लगातार अपील कर रही हैं कि हर व्यक्ति अपनी क्षमता और ज्ञान का उपयोग जरूरतमंदों की मदद के लिए करे।

प्रेरणा बनी दिव्यांग सहपाठी की मदद

सीमा वर्मा के इस प्रेरणादायक सफर की शुरुआत उनके दिव्यांग सहपाठी सुनीता यादव की सहायता से हुई। उन्होंने सुनीता के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्राइसिकल की व्यवस्था करने का प्रयास किया, और उनके अथक प्रयासों से तत्कालीन कमिश्नर सोनमणि बोरा ने सुनीता को ट्राइसिकल प्रदान की। इस घटना ने सीमा को समाजसेवा की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने ‘एक रुपया मुहिम’ को प्रदेशव्यापी अभियान बना दिया।

सीमा बताती हैं कि उन्हें यह प्रेरणा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से मिली, जो जनता के सहयोग से स्थापित हुआ था। इसी विचारधारा से प्रेरित होकर उन्होंने अब तक 2.34 लाख रुपये जुटाए और सैकड़ों बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाया। उनका लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा केवल आर्थिक समस्याओं के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।

छोटी मदद से बड़ा बदलाव संभव

सीमा वर्मा का यह अभियान हमें सिखाता है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं। उनकी ‘एक रुपया मुहिम’ यह साबित करती है कि समाज के प्रति समर्पण और सेवा की भावना से हम न केवल किसी की जिंदगी संवार सकते हैं, बल्कि पूरे समाज को एक नई दिशा भी दे सकते हैं।

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