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करना होगा एआई का लोकतांत्रिकीकरण

ज्यादा फैले। इसलिए, नई टेक्नोलॉजी को बिना सोचे-समझे नहीं अपनाना चाहिए। और ऐसी टेक्नोलॉजी के प्रति समझदारी भरा नजरिया अपनाना आज की जरूरत है। इस स्थिति में एआई का इस्तेमाल सबसे जिम्मेदार तरीके से करने और एआई के लिए सही विनियमन करने की जरूरत है। चूंकि स्वामित्व की दृष्टि से एआई पर अमरीका और चीन का दबदबा है, इसलिए ज्यादातर उपयोगकर्ता तो भारत समेत विकासशील देश हैं, साथ ही वे इन एआई प्लेटफॉर्म द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे डेटा का स्रोत भी हैं। हमारे जैसे देश, विदेशी मालिकाना हक वाले एआई प्लेटफॉर्म पर निर्भर बने हुए हैं। इस प्रक्रिया में विकासशील देश डेटा संप्रभुता भी खो रहे हैं। इन टेक दिग्गजों के मालिकाना हक वाले एआई के दबदबे की वजह से छोटे खिलाड़ी, जिनमें छोटे और कुटीर उद्योग, सेवा एंटरप्राइज और कर्मी शामिल हैं, नुकसान में हैं। हम पॉलिसी बनाने में बड़ी टेक कंपनियों का बेजा असर भी देखते हैं। लेकिन एआई की अहमियत को देखते हुए, इसे रोका नहीं जा सकता या रोका नहीं जाना चाहिए, लेकिन इसके विनियमन की अहमियत को नकारा नहीं जा सकता। हमें इस टेक्नोलॉजी को समझदारी से बढ़ावा देने की जरूरत है। एक तरफ एआई मौजूदा नौकरियों में बेरोजगारी पैदा कर सकता है, वहीं इसके फायदे और बोझ भी बराबर नहीं बंटते। एआई मौजूदा गैर-बराबरी को भी बढ़ा सकता है, अमीर और गरीब, कुशल और अकुशल, बड़ी कंपनियां और छोटे खिलाड़ी, और विकसित एवं विकासशील देशों के बीच, और नई गैर-बराबरी भी पैदा कर सकता है।

किसे हो रहा है फायदा : गूगल और दूसरी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां, जो ज्यादातर अमरीका और चीन की हैं, एआई के लिए जरूरी ज्यादातर डेटा को नियंत्रित करती हैं। ओपनएआई के पीछे, जिसके पास चैटजीपीटी, जीपीटी मॉडल जैसे प्लेटफॉर्म हैं, डाल -ई माइक्रोसॉफ्ट का है। जेमिनी (पहले बार्ड) का मालिकाना हक गूगल के पास है, माइक्रोसॉफ्ट के पास कॉपीलॉट, अजुरे एआई है, जो ओपेनएआई के साथ साझेदारी में है। मेटा (फेसबुक) के पास लामा (ओपन-वेट मॉडल), सोशल मीडिया और एडवरटाइजिंग के लिए एआई है। आमेजन के पास एडबल्यूएस, बेडरॉक, एंथ्रोपिक पार्टनरशिप का मालिकाना हक है। चीन के बैडू के पास अर्नी बॉट जैसे प्लेटफॉर्म हैं। कई और बड़े प्लेटफॉर्म हैं जिनके मालिकाना हक फिर से अमरीका और चीन की बड़ी कंपनियों के पास हैं। क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, फिर से इन्हीं बड़ी कंपनियों के पास है, जो एआई मॉडल विकसित करती हैं और यूजर प्लेटफॉर्म को कंट्रोल करती हैं। ऐसी स्थिति छोटे प्लेयर्स के लिए एंट्री में बड़ी रुकावटें पैदा करती है।

बड़े दिग्गजों के प्रभाव को कम कर सकता है डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर : अपनी कमियों के बावजूद, एआई के लाभों को देखते हुए, नीति निर्माताओं के सामने चुनौती यह है कि एआई कैसे समानता के साथ मानवता की सेवा कर सकता है। इसके लिए देश में एक मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) की आवश्यकता है, जिसके माध्यम से आम लोगों के लिए, समानता के आधार पर एआई तकनीकों का विकास और उपयोग सुगम बनाया जा सके। डेटा के निर्बाध प्रवाह को सुगम बनाने के लिए, हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी, एआई विकास की पहली पूर्व शर्त है। अच्छी खबर यह है कि संचार क्रांति के कारण, भारत के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल नेटवर्क है। स्वदेशी 4-जी नेटवर्क लगभग पूरे देश में विस्तारित किया गया है और देश ने अपना स्वदेशी 5-जीआई नेटवर्क भी विकसित कर लिया है। भारत को सबसे सस्ते डेटा की भूमि होने का गौरव भी प्राप्त है।-डा. अश्वनी महाजन

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