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    Home»लेख-आलेख»अंडमान: प्रकाश, निस्तब्धता और अनंत नीलाई का आमंत्रण
    लेख-आलेख

    अंडमान: प्रकाश, निस्तब्धता और अनंत नीलाई का आमंत्रण

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inFebruary 14, 2026
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    आर्टिकल- कुछ यात्राएँ कैलेंडर में दर्ज छुट्टियाँ नहीं होतीं—वे जीवन की धड़कनों में उतरकर एक नई लय रच देती हैं। अंडमान द्वीपसमूह ऐसी ही एक अनुभूति है, जहाँ पहुँचते ही लगता है मानो समय ने स्वयं को धीमा कर लिया हो। जैसे ही विमान बादलों के आवरण को हटाता है, नीचे फैला समुद्र नीले रंगों की उस दुर्लभ छटा में दिखाई देता है, जिसे आँखें देखती हैं, पर शब्द पकड़ नहीं पाते। फ़िरोज़ी किनारे, नीलम-सी गहराइयाँ, और जल पर बिखरे पन्ना-से द्वीप—मानो प्रकृति ने अपने स्वप्नों की सबसे कोमल चित्रकला यहाँ उकेरी हो।
    अंडमान के तट केवल रेत और लहरों का दृश्य नहीं, मनःस्थितियों का विस्तार हैं। स्वराज द्वीप का राधानगर बीच उस निर्मल सौंदर्य का प्रतीक है, जहाँ रेशमी श्वेत रेत पर सूर्य की सुनहरी किरणें उतरती हैं और समुद्र अपनी शांत, पारदर्शी लहरों से यात्रियों का स्वागत करता है। यहाँ चलना ऐसा लगता है जैसे किसी कविता के भीतर प्रवेश कर रहे हों—हर लहर एक पंक्ति, हर झोंका एक उपमा।


    शहीद द्वीप का स्वभाव अलग है—यह द्वीप शांति का सौम्य विस्तार है। भरतपुर बीच की उथली, काँच-सी स्वच्छ लहरें, प्राकृतिक शिला-सेतु की अद्भुत संरचना, और हवा में घुली एक अव्यक्त निस्तब्धता—यहाँ प्रकृति धीरे-धीरे हृदय को खोलती है।
    भीड़ से दूर, प्रकृति के अधिक अंतरंग स्पर्श की चाह हो तो लॉन्ग आइलैंड का लालाजी बे बीच किसी गुप्त स्वर्ग जैसा खुलता है—जहाँ न कोई कोलाहल, न कोई हड़बड़ी, केवल समुद्र और आत्मा का मौन संवाद।
    उत्तर अंडमान में रॉस और स्मिथ द्वीप का दृश्य विस्मित कर देता है। दो द्वीपों को जोड़ती रेत की पतली उजली रेखा—जैसे समुद्र ने स्वयं अपने विस्तार पर एक स्वप्निल हस्ताक्षर कर दिया हो। ज्वार-भाटा के साथ बदलता यह दृश्य हर बार नया चमत्कार बन जाता है।
    रोमांच के रंगों से भरा संसार देखना हो तो नॉर्थ बे द्वीप जल-क्रीड़ाओं का जीवंत मंच है। स्कूबा डाइविंग में जब आप जल के भीतर उतरते हैं, तब प्रवाल भित्तियों का रंगीन नगर खुलता है—लाल, पीले, बैंगनी प्रवाल, चंचल मछलियाँ, धीमे तैरते कछुए। वहाँ नीचे एक निस्तब्ध, पर जीवंत ब्रह्मांड है, जहाँ समय का अर्थ बदल जाता है।
    जॉली बॉय द्वीप और रेड स्किन द्वीप की जल-पारदर्शिता प्रवालों को मानो काँच के आर-पार देखने जैसा अनुभव देती है। यहाँ समुद्र केवल देखा नहीं जाता—महसूस किया जाता है।
    चिड़िया टापू की संध्या रंगों का उत्सव है। सूर्यास्त यहाँ केवल दृश्य नहीं, एक भावानुभूति है—अंबर से लालिमा, लालिमा से बैंगनी, और फिर धीरे-धीरे उतरती सांध्य निस्तब्धता।
    वांडूर से मरीन नेशनल पार्क का संसार खुलता है—जहाँ समुद्री जैव-विविधता प्रकृति के संरक्षण और सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।
    लिटल अंडमान झरनों, सर्फिंग और शांत रोमांच का द्वीप है। डिगलीपुर, रंगत, और मायाबंदर—ये सभी द्वीप अंडमान के उस सरल, ग्रामीण, आत्मीय जीवन का परिचय कराते हैं जहाँ प्रकृति और मनुष्य एक संतुलित सहअस्तित्व में दिखाई देते हैं।
    दूर समुद्र में बैरन आइलैंड—भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी—जल और अग्नि का विस्मयकारी संतुलन। अंडमान के द्वीपों की यह विविधता यात्रियों को केवल आकर्षित नहीं करती—मोहित कर लेती है।

    वन, गुफाएँ और प्राचीन उपस्थिति

    अंडमान का हृदय उसके वनों में धड़कता है। यहाँ के उष्णकटिबंधीय वर्षावन धरती की प्राचीन स्मृतियों का हरित अभिलेख हैं। वृक्ष यहाँ केवल खड़े नहीं, जैसे आकाश से संवाद करते हुए ऊपर उठते हैं। पत्तों के बीच छनकर आती धूप, हवा में घुली मिट्टी और नमी की सुगंध, और पक्षियों की मधुर पुकार—वन का प्रत्येक क्षण एक ध्यान, एक विश्राम, एक पुनर्जागरण है।
    मैंग्रोव वन अंडमान की जीवनरेखा हैं। उनकी जटिल जड़ें जल और भूमि के बीच अद्भुत संतुलन रचती हैं। नाव से इनके बीच गुजरना ऐसा लगता है जैसे किसी हरित, रहस्यमयी गलियारे में प्रवेश कर रहे हों—जहाँ प्रकृति की निस्तब्धता स्वयं एक संगीत बन जाती है।
    बारातांग द्वीप इस अनुभव को और गहन करता है। यहाँ की चूना-पत्थर (लाइमस्टोन) गुफाएँ प्रकृति की धीमी, धैर्यपूर्ण कला का साक्षात प्रमाण हैं। हजारों वर्षों में टपकती जल-बूँदों ने जिन स्तंभों और आकृतियों को गढ़ा है, वे किसी प्राचीन, निस्तब्ध मंदिर की अनुभूति कराते हैं। गुफा के भीतर शीतल हवा, टपकते जल की लय, और धुँधली रोशनी—मानो समय ने स्वयं को थाम लिया हो।
    अंडमान की धरती केवल प्राकृतिक नहीं, सांस्कृतिक विरासत से भी संपन्न है। यहाँ के मूल जनजातीय समुदाय इस भूभाग की प्राचीन आत्मा हैं। जारवा समुदाय का जीवन प्रकृति के साथ गहरे सामंजस्य में बीतता है। उनके लिए वन संसाधन नहीं, संबंध हैं; भूमि अधिकार नहीं, अस्तित्व है। आधुनिक समाज के लिए यह आवश्यक है कि इन समुदायों की गरिमा, निजता और परंपराओं का सम्मान सर्वोपरि रहे। अंडमान की यात्रा तभी पूर्ण है जब हम उसके इस मानवीय आयाम के प्रति संवेदनशील रहें।
    वनों के भीतर चलना, पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों को देखना, जैव-विविधता की उस समृद्धि को अनुभव करना—यह सब अंडमान को केवल पर्यटन स्थल नहीं, एक जीवित प्राकृतिक विश्वविद्यालय बना देता है।

    जीवन, श्रम, स्वाद और आनंद का अर्थ

    अंडमान में समुद्र केवल सौंदर्य का विस्तार नहीं, जीवन का आधार है। मत्स्य पालन यहाँ की अर्थव्यवस्था और संस्कृति का प्रमुख स्वर है। भोर की धुँधली उजास में समुद्र की ओर जाती नावें, लौटते जाल, और ताज़ी मछलियों की चमक—यह सब श्रम और प्रकृति के गहरे संबंध की कथा कहता है।
    नारियल के वृक्ष अंडमान की पहचान हैं। समुद्री हवा के साथ झूमते ये वृक्ष केवल दृश्य नहीं, आजीविका का आधार हैं। नारियल यहाँ भोजन, तेल, पेय, हस्तशिल्प और व्यापार—सभी का महत्वपूर्ण स्रोत है। गाँवों में नारियल की खेती जीवन की सहज लय रचती है।
    कुछ द्वीपों पर धान की खेती हरित विस्तार का सुंदर दृश्य प्रस्तुत करती है। वर्षा से भीगी मिट्टी, लहलहाते खेत, और किसानों का श्रम—यहाँ का ग्रामीण जीवन अंडमान के उस शांत, आत्मनिर्भर स्वरूप को दर्शाता है जहाँ प्रकृति और मनुष्य सहजीवन में बंधे हैं।
    पर्यटन यहाँ केवल दृश्यावलोकन नहीं, अनुभव है। समुद्र में स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग, सी-वॉक; तटों पर विश्राम; वन-पथों पर पदयात्रा; नावों से द्वीपों की यात्राएँ—हर गतिविधि आनंद का नया आयाम खोलती है।
    आतिथ्य यहाँ औपचारिक नहीं, आत्मीय है। समुद्र-समीप रिसॉर्ट्स, हरित कॉटेज, सरल होमस्टे—हर ठहराव में एक सहज ऊष्मा है। सुबह खारे पवन का स्पर्श, शाम लहरों की ध्वनि—विश्राम को भी एक काव्य बना देते हैं।
    अंडमान का स्वाद भी उसी प्रकृति का विस्तार है। ताज़ा समुद्री भोजन, नारियल-सुगंधित व्यंजन, उष्णकटिबंधीय फल—यहाँ भोजन केवल तृप्ति नहीं, समुद्र और मिट्टी का उत्सव है।
    और अंततः, अंडमान सिखाता है आनंद का सच्चा अर्थ—बिना हड़बड़ी के जीना। तट पर शांत बैठना, सूर्यास्त को निहारना, वन की निस्तब्धता में खो जाना, जल में तैरना। यहाँ समय भागता नहीं—बहता है।
    अंडमान एक स्मरण है—कि जीवन केवल गति नहीं, ठहराव भी है; केवल उपलब्धि नहीं, अनुभूति भी है।
    आइए अंडमान—जहाँ प्रकृति प्रदर्शन नहीं करती, आलिंगन देती है।
    जहाँ समुद्र केवल दृश्य नहीं, संवाद बन जाता है।
    जहाँ वन केवल हरियाली नहीं, शांति का आश्रय बन जाते हैं।
    और जहाँ यात्रा समाप्त नहीं होती—हृदय में बस जाती है।


    रमेश जायभाये
    उपनिदेशक
    पत्र सूचना कार्यालय
    रायपुर, छत्तीसगढ

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