Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • ममता को बायो में Ex-CM मंजूर नहीं, शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनते ही दिया नया परिचय
    • रविशंकर जलाशय की सुरक्षा के लिए गेटों की मरम्मत एवं आवश्यक कार्यों हेतु 65.50 करोड़ रुपए की मिली प्रशासनिक स्वीकृति
    • सफलता की कहानी-बिना केमिकल, बंपर मुनाफाः डोलनारायण की जैविक मिर्च ने बाजार में मचाई धूम
    • सायंतन बनर्जी जन्म से नेत्रहीन,लेकिन उन्होंने हौसले से बड़ी मिसाल कायम की आज वह शिक्षक, RJऔर सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कर रहे काम…
    • आईपीएल2026:रायपुर में होटलों की बुकिंग 10-10 हजार रुपए तक हुई महंगी, हवाई टिकटों की कीमतें भी बढ़ीं
    • बड़ा अपडेट:तमिलनाडु में विजय सरकार का रास्ता साफ, VCK के समर्थन से मिला बहुमत
    • शुभेन्दु अधिकारी के पीए के कत्ल की गुत्थी सुलझाने गुजरात से बुलाई गई जांच टीम
    • भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज केस के सस्पेंड किए सभी 7 इंजीनियर बहाल
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Sunday, May 10
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»राष्ट्रीय»आर्टिकल – मोदी का हनुमान क्षण : बाधाओं से भरी दुनिया में भारत की लंबी छलांग- हरदीप एस. पुरी
    राष्ट्रीय

    आर्टिकल – मोदी का हनुमान क्षण : बाधाओं से भरी दुनिया में भारत की लंबी छलांग- हरदीप एस. पुरी

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inOctober 13, 2025
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    जब पूरे भारत में दीप जलते हैं, तो रामायण का एक अमर दृश्य आज के समय से संवाद करता है। हनुमान जी अपने बल पर संदेह करते हुए सागर के किनारे खड़े हैं, जब तक कि जाम्बवंत उन्हें यह याद नहीं दिलाते कि वह ताकत तो पहले से ही उनके भीतर है। उसके बाद जो छलांग लगती है, वह कोई चमत्कार नहीं बल्कि आत्मविश्वास का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यही आत्मविश्वास भारत की अर्थव्यवस्था में जगाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि भारत अपनी भीतरी शक्ति के सहारे वैश्विक चुनौतियों को पार कर सके। जैसे-जैसे दुनिया नई वीजा बाधाओं और शुल्कों के साथ सिमट रही है, तब मोदी के नेतृत्व में भारत अपने आत्मविश्वास को दुनिया के सामने ला रहा है। भारत विपरीत परिस्थितियों को आगे बढ़ने की ताकत में बदल रहा है।

    हाल के महीनों में, अमेरिका ने नए एच-1बी वीज़ा आवेदनों पर 1,00,000 डॉलर की फ़ीस और ब्रांडेड व पेटेंट वाली दवाओं के आयात पर 100% शुल्क लगाया है। इन कदमों को रोज़गार सुरक्षा के नाम पर लिया गया बताया गया, लेकिन इसके पीछे एक गहरी चिंता छिपी है। यह है विकसित देशों में बढ़ता संरक्षणवाद और जनसंख्या से जुड़ी असुरक्षा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने इसका जवाब तीन ऐसे स्तंभों को मज़बूत बनाकर दिया है, जिन्हें कोई भी शुल्क प्रभावित नहीं कर सकता- पैमाना (स्केल), कौशल (स्किल) और आत्मनिर्भरता (सेल्फ रिलायंस)।

    दुनिया से भारत का अंतर बहुत साफ दिखाई देता है। चीन की आबादी तेज़ी से बूढ़ी हो रही है। वहां की औसत आयु अब 40 साल से ज़्यादा हो गई है, जबकि भारत में यह 29 साल से कम है। हमारे दो-तिहाई लोग 35 साल से कम उम्र के हैं। इस युवा ऊर्जा को जब कौशल, शिक्षा और उद्यमिता के ज़रिए सही दिशा दी जाती है तो वो भारत को विश्व अर्थव्यवस्था का “विकास इंजन” बनाती है। जब वैश्विक संस्थाएं बताती हैं कि पिछले साल दुनिया की कुल आर्थिक वृद्धि में भारत का योगदान 16% से ज़्यादा था, तो यह कोई नारा नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछले एक दशक के सुधार, निवेश और बुनियादी ढांचे के निर्माण का परिणाम है।

    हाल के आंकड़े इस रफ्तार को और पुख्ता करते हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की जीडीपी अनुमान को बढ़ाकर 6.8% किया है। इसके पीछे कारण बताए गए हैं- मज़बूत घरेलू मांग, स्थिर निवेश प्रवाह और अच्छे मानसून की उम्मीद। सितंबर में जीएसटी संग्रह 1.89 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह लगातार नौवां महीना है जब संग्रह 1.8 लाख करोड़ रु. से ज़्यादा रहा। यह दर्शाता है कि देश में खपत बढ़ रही है और टैक्स का दायरा भी फैल रहा है।

    विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो लगभग 11 महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। वहीं जून तिमाही में विदेशी धन प्रेषण 33.2 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है। मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 57.7 और सर्विस सेक्टर पीएमआई 60.9 पर स्थिर रहा, जो यह फिर साबित करता है कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है।

    यह सकारात्मक रुझान बाज़ारों और सड़कों दोनों पर दिखाई दे रहा है। इस दशहरा सीज़न में खुदरा और ई-कॉमर्स बिक्री अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। उद्योग संगठनों जैसे कैट और रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार बिक्री 3.7 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई, जो पिछले साल से लगभग 15% ज़्यादा है। सिर्फ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर ही त्योहारों के पहले पंद्रह दिनों में 90,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का कारोबार हुआ। सबसे ज़्यादा मांग ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना और कपड़ों में देखी गई। अब उम्मीद है कि दीवाली इस बार सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ देगी, जो न केवल उपभोक्ता विश्वास को दिखाता है, बल्कि सरकार के औपचारिक ऋण, डिजिटल भुगतान और ग्रामीण क्रय शक्ति बढ़ाने के लगातार प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है।

    भारत की आर्थिक नींव अब मज़बूत हो चुकी है। पिछले दस वर्षों में भारत की जीडीपी लगभग दोगुनी हो गई है और अब वह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुकी है। जल्द ही जर्मनी को पीछे छोड़ने की उम्मीद है। विदेशी मुद्रा भंडार 600 अरब डॉलर से अधिक है। मुद्रास्फीति नियंत्रित है, और वित्तीय अनुशासन के साथ सरकार ने रिकॉर्ड सार्वजनिक पूंजीगत निवेश किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में, भारत का वस्तुओं और सेवाओं का समग्र निर्यात लगभग 825 बिलियन अमरीकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि अकेले व्यापारिक निर्यात लगभग 437 बिलियन अमरीकी डॉलर था। भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता अब 220 गीगावॉट से अधिक हो गई है।

    ये आंकड़े एक ही कहानी कहते हैं- एक ऐसे देश की, जो कभी नाज़ुक था, और अब एक मजबूत राष्ट्र बन गया है। ऐसे नेतृत्व में, जो दूरदृष्टि और क्रियान्वयन दोनों को साथ लेकर चलता है। यह दुखद सच्चाई है कि प्रधानमंत्री मोदी की आत्मनिर्भर भारत की सोच को कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। वे अब भी इसे बीसवीं सदी की पुरानी सोच से देख रहे हैं।

    आत्मनिर्भरता का मतलब अलग-थलग रहना नहीं है। आत्मनिर्भर भारत का असली अर्थ है- अपनी शक्ति को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना। यह वह ताकत है जो भारत को बराबरी के आधार पर वैश्विक स्तर पर भागीदारी करने की क्षमता देती है।
    इसका उद्देश्य है- भारत में बनाना, लेकिन दुनिया के लिए अवसरों को विकेन्द्रित करना, ताकि मूल्य उन तक पहुंचे जो उसे बनाते हैं और वैश्विक बाज़ारों में समान शर्तों पर प्रतिस्पर्धा करना। मोबाइल फ़ोन, रक्षा उपकरण, चिकित्सा यंत्रों से लेकर सौर मॉड्यूल तक- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं ने भारत में निवेश, रोज़गार और निर्यात तीनों को तेज़ी से बढ़ावा दिया है।

    50, 000 करोड़ की लागत से अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन, हमारे अनुसंधान और विकास तंत्र को नई ऊर्जा देने वाला कदम है। स्टार्टअप्स के लिए दूसरा फंड-ऑफ-फंड्स और पीएलआई योजनाओं का विस्तार भारत की तकनीकी नींव को और गहरा बनाएगा। यही है रणनीतिक स्वतंत्रता के रूप में आत्मनिर्भर भारत, जो आत्मविश्वास पर आधारित नीतियों के ज़रिए साकार और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से और भी मजबूत बनता है। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भारत ने दुनिया का सबसे समावेशी डिजिटल सार्वजनिक ढांचा तैयार किया है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस अब वीज़ा की तुलना में अधिक दैनिक लेनदेन को संभालता है, जो प्रतिदिन 650 मिलियन से अधिक है। आधार, डिजिलॉकर और ओएनडीसी मिलकर एक ऐसा इकोसिस्टम बनाते हैं जो बड़े पैमाने पर नागरिकों, छोटे व्यवसायों और नवप्रवर्तकों को जोड़ता है। सिंगापुर, यूएई और अन्य के साथ यूपीआई की वैश्विक साझेदारियां दर्शाती हैं कि भारतीय नवाचार वैश्विक मानक स्थापित कर सकता है। यह है- तकनीक के रूप में शासन , सशक्तिकरण और निर्यात।

    इस पूरी कहानी के केंद्र में लोग ही हैं। हमारा प्रवासी भारतीय समुदाय, जो 3.2 करोड़ से अधिक है, दुनिया के सबसे सफल और सम्मानित समुदायों में से एक है। आज फार्च्यून 500 की 11 कंपनियां ऐसे भारतीय मूल के सीईओ के नेतृत्व में हैं, जिनका संयुक्त मार्केट कैपिटलाइजेशन 6 ट्रिलियन डॉलर से भी ज़्यादा है। उनकी यात्रा नए भारत की आकांक्षाओं को दर्शाती है- कुशल, आत्मविश्वासी और समाधान केंद्रित। साल 2024 में 135 अरब डॉलर की रक़म के रूप में आए धन प्रेषण सिर्फ़ आर्थिक प्रवाह नहीं हैं। वे भारत पर विश्वास का प्रतीक हैं। जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार कहा है- विदेश में रहने वाला भारतीय सिर्फ प्रवासी नहीं, बल्कि भारत के मूल्यों और उद्यमशीलता का दूत है।

    प्रधानमंत्री के नेतृत्व ने इस फैली हुई वैश्विक ऊर्जा को घरेलू आधार प्रदान किया है। मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया केवल अलग-अलग पहल नहीं हैं। ये एक जुड़ी हुई मूल्य श्रृंखला हैं: अवसर पहचानना, उद्यमिता को सक्षम बनाना, और प्रतिभा को तैयार करना। अगला कदम है- एक व्यापक वैश्विक कौशल मिशन, जो इन पहलों को एक ही ढांचे में एकजुट करेगा। इसमें शामिल होंगे: मानकीकृत पाठ्यक्रम, जो अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्रों से मेल खाते हों, कर्मचारियों के लिए प्रस्थान पूर्व प्रशिक्षण, भाषा और सांस्कृतिक प्रशिक्षण, और पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा समझौते। ये सभी उपाय भारतीय कामगार को दुनिया भर में पसंदीदा पेशेवर बनाएंगे। यह एजेंडा पहले ही प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति के तहत बनाए गए कई जी2जी साझेदारियों के माध्यम से लागू हो रहा है।

    इसलिए हनुमान की छलांग का प्रतीकात्मक महत्व उपयुक्त है। यह कोई विरोध का कार्य नहीं था, बल्कि कर्तव्य का निर्वाह था, जो आत्म-साक्षात्कार के माध्यम से संभव हुआ। प्रधानमंत्री मोदी की शासन दर्शन भी इसी विश्वास पर आधारित है कि भारत की नियति अपने लोगों की संकल्पशक्ति और संभावनाओं को जागृत करने में निहित है। इन्फ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल रूपांतरण, हरित ऊर्जा और वैश्विक साझेदारियां इस जागृति के साधन हैं। जहाँ दूसरे दीवारें बनाते हैं, भारत क्षमता का निर्माण करता है।
    जहाँ दूसरे व्यापार को सीमित करते हैं, भारत अवसर बढ़ाता है। जहां दूसरे भविष्य से डरते हैं, भारत उसकी तैयारी करता है ।

    हनुमान की छलांग स्मृति की पुनर्प्राप्ति थी।प्रधानमंत्री मोदी का प्रयास यही रहा है कि भारत की क्षमता की राष्ट्रीय स्मृति को फिर से जागृत किया जाए। जब दूसरे दीवारें खड़ी करते हैं, तो भारत क्षमता का निर्माण करता है। जहां दूसरे अवसर सीमित करते हैं, भारत उन्हें बढ़ाता है। यही तरीका है जिससे सभ्यता में निहित आत्मविश्वास आधुनिक प्रतिस्पर्धात्मक ताकत में बदल जाता है। जैसे-जैसे हम दिवाली के करीब आ रहे हैं, यह याद रखना ज़रूरी है कि हनुमान की छलांग ने समुद्र को छोटा नहीं किया, बल्कि उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। दुनिया नई बाधाएं खड़ी कर सकती है, लेकिन भारत के पास आज ऊंचा उठने के लिए नेतृत्व, लचीलापन और उद्देश्य है। प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण के मार्गदर्शन में, यह ऐसा देश है, जो किनारे पर नहीं रुकेगा। यह अपनी ताकत को याद रखता है और आगे छलांग लगाता है।

    (लेखक, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हैं)

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    ममता को बायो में Ex-CM मंजूर नहीं, शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनते ही दिया नया परिचय

    May 10, 2026

    स्नेह से लगाया गले,कौन हैं वो शख़्स जिनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर छुए पैर?

    May 9, 2026

    शुभेंदु अधिकारी बने बंगाल के सीएम, दिलीप घोष समेत 5 नेता भी मंत्री बनाए गए

    May 9, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.