पणजी : करापुर-सरवन में बन रहे एक लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट के खिलाफ आंदोलन 100 दिनों से चल रहा है और ग्रामीणों ने इस मौके पर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों के समर्थन से ग्रामीणों ने मांग की है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) विभाग और अन्य अधिकारी ‘हाउस ऑफ़ अभिनंदन लोढ़ा’ (HoABL) को इस हाउसिंग-कम-कमर्शियल प्रोजेक्ट के लिए दी गई मंजूरी वापस लें। प्रदर्शनकारी यह भी चाहते हैं कि सरकार पर्यावरण, ग्रामीणों के अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं की रक्षा के लिए कदम उठाए। पणजी में ग्रामीणों और एक्टिविस्ट्स के गुट ने प्रदर्शन किया।
निवासी 5.5 लाख वर्ग मीटर के इस हाउसिंग प्रोजेक्ट को रोकने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे जंगल और आजीविका का नुकसान होगा और इलाके में पहले से ही बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
गोवा के प्रोजेक्ट का क्यों हो रहा विरोध
ग्रामीणों का आरोप है कि ‘हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ नाम की रियल एस्टेट कंपनी के ‘वन गोवा’ टाउनशिप प्रोजेक्ट के तहत 53 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर डेवलपमेंट किया जाना है। प्रोजेक्ट के पहले चरण में 1,388 लग्जरी विला प्लॉट, एक 5-स्टार होटल और एक आर्टिफिशियल बीच बनाना शामिल है, जिससे खेती और पहाड़ी की चोटी वाली जमीन को एक लग्जरी टाउनशिप में बदला जाएगा। ग्रामीणों के एक ग्रुप ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन किया।
क्या बोले प्रदर्शनकारी
कुछ ग्रामीण और एक्टिविस्ट पणजी के आजाद मैदान में भी इकट्ठा हुए और ST विधायकों व मंत्रियों की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि वे इस मुद्दे पर क्यों नहीं बोल रहे हैं। ज़्यादातर प्रदर्शनकारी और ग्रामीण ST और OBC समुदायों से हैं। विरोध प्रदर्शन के लिए दिल्ली आए अजय प्रभु गांवकर ने कहा कि BJP सरकार हमारी बात नहीं सुन रही है। लेकिन उसका IT सेल हमारे विरोध को कमजोर करने के लिए सक्रिय है।
गोवा फाउंडेशन का मंत्री पर आरोप
विरोध प्रदर्शन के नेताओं ने वादा किया है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे अपना आंदोलन तेज करेंगे। AAP विधायक वेंज़ी विएगास ने कहा कि हर निर्वाचन क्षेत्र को रोजाना आंदोलन में शामिल होकर इस विरोध के प्रति एकजुटता दिखानी चाहिए। गोवा फाउंडेशन के क्लाउड अल्वेरेस ने कहा कि अगर यह सरकार इस प्रोजेक्ट को रद्द नहीं करती है, तो गुस्सा फिर से भड़केगा और यह इस सरकार का अंत होगा। इस गड़बड़ी के लिए सावंत उतने ही जिम्मेदार हैं जितने विश्वजीत राणे। प्रोजेक्ट की जमीन मंत्री और उनकी पत्नी की है और उन्होंने यह जमीन बेच दी। जमीन बेचने के बाद, TCP मंत्री राणे ने सेक्शन 39 और 17(2) के तहत सभी मंज़ूरियां दीं।
सरकार को चेतावनी
कांग्रेस और AAP ने करापुर के लोगों का समर्थन किया और दोनों पार्टियों ने प्रस्तावित मेगा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को तुरंत रद्द करने की मांग की। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर BJP सरकार उनकी आवाज़ को नज़रअंदाज़ करती रही, तो उनका आंदोलन और तेज हो जाएगा। दक्षिण गोवा के सांसद कैप्टन विरियाटो फ़र्नांडिस, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, AAP गोवा के अध्यक्ष वाल्मीकि नाइक और दिल्ली की पूर्व मेयर शैली ओबेरॉय भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल हुए।
कंपनी का बयान
HoABL ने फिर से कहा कि उनके पास इस प्रोजेक्ट के लिए सभी जरूरी मंजूरी हैं। कंपनी ने एक बयान में कहा कि हम उन ग्रामीणों से बातचीत करने के लिए तैयार हैं जो इसके असली स्टेकहोल्डर हैं। इसके बावजूद, कुछ एक्टिविस्ट बार-बार इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि हमारे प्रोजेक्ट की प्रोग्रेस को कानूनी रूप से रोकने की उनकी हर कोशिश नाकाम रही है। जब ये कोशिशें सफल नहीं हुईं, तो अब वे इस मामले को दिल्ली ले गए हैं, और कहा जा रहा है कि उन्हें एक राजनीतिक पार्टी का समर्थन हासिल है।
कंपनी ने यह भी कहा कि करापुर सरवन वाला प्रोजेक्ट लोढ़ा डेवलपर्स का प्रोजेक्ट नहीं है। HoABL ने एक बयान में कहा कि ये एक्टिविस्ट अपनी निजी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में लगे हैं। उन्हें राज्य के विकास और संतुलित व ज़िम्मेदार विकास से गोवा के गांवों, स्थानीय समुदायों और अर्थव्यवस्था को होने वाले लंबे समय के फायदों पर ध्यान देना चाहिए। हमने लगातार यह साफ किया है कि HoABL की स्थापना 2020 में हुई थी और इसका किसी भी तरह से ‘लोढ़ा’ / ‘लोढ़ा ग्रुप’ से कोई संबंध नहीं है।
CM ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार किया
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया क्योंकि यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। सावंत ने कहा कि मामले की सुनवाई कोर्ट और पंचायत कर रही है और पंचायत को जो भी कार्रवाई करनी होगी, वह करेगी। बाकी सब कुछ कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में है।

