Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ गाने पर डांस करते नजर आए IPS असित यादव ,डीआईजी पद पर पदोन्नति… 
    • बंगाल में CM पर फैसला कराने खुद जाएंगे अमित शाह, असम की जिम्मेदारी जेपी नड्डा को…
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुसार जांजगीर-चांपा में तेजी से आगे बढ़ रहा मेडिकल कॉलेज प्रोजेक्ट
    • संवाद से समाधान: कमराखोल में मुख्यमंत्री ने दूर की बिजली बिल की चिंता
    • माओवादियों का गढ़ रहे तर्रेम बना स्वास्थ्य मॉडलः राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल
    • एक चौपाल ऐसा भी जहाँ खुशियों और तालियों की रही गूंज,लखपति दीदियों के हौसले की उड़ान देख गदगद हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
    • सुशासन तिहार: चौपाल में मिली राहत, सरलाबाई मरावी की समस्या का मुख्यमंत्री ने किया त्वरित समाधान
    • सुशासन तिहार: सरोधी की चौपाल में दिखी बदलाव की कहानी
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Wednesday, May 6
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»आर्टिकल-निवारक स्वास्थ्य देखभाल में अग्रणी भूमिका निभा रहा है योग-प्रतापराव जाधव द्वारा
    लेख-आलेख

    आर्टिकल-निवारक स्वास्थ्य देखभाल में अग्रणी भूमिका निभा रहा है योग-प्रतापराव जाधव द्वारा

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMarch 12, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    आर्टिकल- बीते दशक में योग को केवल पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धति के रूप में ही नहीं सराहा गया, बल्कि उसे उत्त रोत्तवर रूप से स्वास्थ्य और कल्याण के लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण के रूप में भी पहचाना जाने लगा है। वैज्ञानिक अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और वैश्विक सहयोग अब हमें योग को केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि एक सशक्तै जन-स्वास्थ्य हस्तक्षेप समझने में भी मदद कर रहे हैं।
    मोरारजी देसाई राष्ट्री य योग संस्था न (एमडीएनआईवाई) को पारंपरिक चिकित्सा (योग) के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोगी केंद्र के रूप में नामित किया गया है और योग अनुसंधान में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका और भी मज़बूती प्रदान करते हुए वर्ष 2025–2029 के लिए इसे फिर से निमित किया गया है। यह पहचान गैर-संचारी रोग (एनसीडी) के लिए साक्ष्य-आधारित योग हस्तिक्षेपों को बढ़ावा देने में संस्था न की बढ़ती भूमिका को दिखाती है। इस पहल के प्रमुख साझेदारों में आयुष मंत्रालय, एम्सा दिल्ली, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद, और इंस्टीट्यूट ऑफ़ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज, दिल्ली शामिल हैं।
    इन सहयोगों के माध्यम से केंद्र मधुमेह, मोटापा और तनाव से संबंधित विकारों जैसे गैर-संचारी रोगों के लिए योग-आधारित हस्तक्षेपों पर तकनीकी दिशानिर्देश विकसित कर रहा है और अनुसंधान को आगे बढ़ा रहा है। इन प्रयासों में अंतरराष्ट्रीय संगठन भी साझेदारी कर रहे हैं, जिससे योग की वैज्ञानिक आधारशिला और मजबूत हो रही है तथा निवारक स्वास्थ्य देखभाल के लिए व्यापक रूप से लागू किए जा सकने वाले, किफायती और साक्ष्य-समर्थित प्रभावी साधन के तौर पर योग की क्षमता प्रदर्शित हो रही है।
    संस्थागत स्तर पर एमडीएनआईवाई योग की वैज्ञानिक आधारशिला को मजबूती प्रदान करना जारी रखे हुए है। शरीर क्रिया विज्ञान, जैव रसायन, बायोमैकेनिक्स और मनोविज्ञान की अनुसंधान प्रयोगशालाओं के माध्यम से यह संस्थान योग के मनो-शारीरिक और जैव-रासायनिक प्रभावों, उम्र बढ़ने में इसकी भूमिका तथा जीवनशैली से जुड़े विकारों पर इसके प्रभाव का अध्ययन करता है। यह कार्य पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जोड़ने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है
    डिजिटल प्लेरटफॉर्मों ने योग की पहुँच को और अधिक बढ़ाया है, जिससे साक्ष्य-आधारित पद्धतियाँ सीधे लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन रही हैं। m-Yoga मोबाइल एप्लिकेशन और Y-Break प्रोटोकॉल जैसे प्रयास यह दिखाते हैं कि योग की प्रामाणिकता और चिकित्सकीय महत्वि बनाए रखते हुए उसे बड़े स्तर पर पहुँचाया जा सकता है। विश्वै स्वारस्य् च संगठन के सहयोग से विकसित किए गए m-Yoga प्लेटफॉर्म पर 1.1 लाख से अधिक डाउनलोड दर्ज किए जा चुके हैं, जो सुलभ डिजिटल वेलनेस टूल्स में बढ़ती रुचि को दर्शाता है। वहीं कार्यस्थल योग कार्यक्रम Y-Break — जो काम के दौरान 5–10 मिनट का सरल योग ब्रेक है — से अब तक 33 लाख से अधिक सरकारी अधिकारियों को लाभ मिल चुका है।
    इन पहलों से प्राप्त अनुसंधान निष्कर्ष और सहभागिता विश्लेषण अत्यंत उत्साहजनक हैं। Y Break अभ्यास से कुछ ही सप्ताहों में अनुभूत तनाव में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी देखी गई है। अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि इससे मानसिक सतर्कता, भावनात्मक दृढ़ता और निर्णय-क्षमता में सुधार होता है। इसके साथ-साथ कॉर्टिसोल स्तर जैसे शारीरिक संकेतकों में भी सकारात्मक परिवर्तन पाए गए हैं।
    शारीरिक लाभों में गर्दन, कंधे और कमर के दर्द में कमी, श्वास अभ्यास से सांस लेने की क्षमता में सुधार और संपूर्ण जीवन शक्ति में वृद्धि शामिल हैं—ये परिणाम विशेषकर आज के निष्क्रिय, स्क्रीन-आधारित कार्यस्थलों में प्रासंगिक हैं। Y-Break अभ्यास ने अनुपस्थिति में कमी लाने , कर्मचारियों के मनोबल में सुधार लाने, और कार्य–जीवन में स्वस्थ संतुलन कायम करने में भी योगदान दिया है, जो व्यक्तिगत और संगठनात्मक कल्याण दोनों को मजबूत बनाने की योग की क्षमता को दर्शाता है।
    एमडीएनआईवाई और केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा सम्मेलन–2026 के दौरान भी वैज्ञानिक प्रमाण के महत्वो पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने यह रेखांकित किया कि सुदृढ़ अनुसंधान, अंतरविषयक सहयोग, और प्रभावी डिजिटल सहभागिता आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में योग को एकीकृत करने और स्प ष्टि स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य हैं।
    ये घटनाक्रम योग के प्रति वैश्विक दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाते हैं। अब इसे केवल व्यक्तिगत कल्याण के अभ्यास के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि यह उत्ततरोत्तेर रूप से जन-स्वास्थ्य, कौशल विकास और वेलनेस आधारित रोजगार के अवसरों के एक मार्ग के रूप में उभर रहा है। योग परंपरा को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ते हुए ग्लोबल योग क्रांति की प्रेरक शक्ति के रूप में उभर रहा है तथा अंतरराष्ट्रीय वेलनेस क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को और मजबूत कर रहा है।
    जैसे-जैसे हम 13 मार्च के करीब पहुँच रहे हैं, जो 21 जून को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के 100-दिन के काउंटडाउन का संकेत है, यह हमें इस बारे में सोचने का अवसर देता है कि किस प्रकार योग एक प्राचीन पद्धति से लेकर वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त, साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य और कल्याण मार्ग के रूप में विकसित हो गया है। ये सौ दिन हमें याद दिलाएं कि हम दैनिक योग अभ्यास शुरू करें या उसे नवीनीकृत करें, और अपने परिवार, मित्रों और समुदायों को योग को जीवन जीने का तरीका बनाने के लिए प्रेरित करें।
    योग को दैनिक जीवन में शामिल करके, हम केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को ही मजबूत नहीं करते, बल्कि सामूहिक कल्याण, संगठनात्मक दक्षता और सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देते हैं। आज, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से, भारत योग की अनंत ज्ञान परंपरा को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और सार्वभौमिक रूप से सुलभ मार्ग में बदलने का अगला निर्णायक कदम उठा रहा है, जो वैश्विक स्वास्थ्य, संतुलन और कल्याण के लिए मार्गदर्शक बन सकेगा।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    स्मार्ट, संवहनीय, बेजोड़: टेक्निकल टेक्सटाइल इस तरह बुन रहे हैं फुटवियर में भारत का भविष्य-श्री गिरिराज सिंह

    May 4, 2026

    क्या हैं मिडल क्लास की आर्थिक तंगी के खास कारण

    May 4, 2026

    छत्तीसगढ़ की जड़ी-बूटियों से महकेगा नारी शक्ति का स्वावलंबन

    May 3, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.