46 लाख का आयुष्मान घोटाला! रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर हुई राशि?

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के सिविल अस्पताल आष्टा में आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि (इनसेंटिव) में हुए 46 लाख रुपये के घोटाले के मामले में जांच तेज हो गई है. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया द्वारा गठित 6 सदस्यीय जांच दल ने उन सभी बैंक खाता धारकों को नोटिस जारी किया है, जिनके खातों में कथित तौर पर पात्र लाभार्थियों की जगह राशि ट्रांसफर की गई थी. जांच दल ने संबंधित खाताधारकों से बैंक स्टेटमेंट (खाता विवरण) लिखित रूप में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं.
46 लाख रुपये किए अपनी पत्नी और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर
गौरतलब है कि सिविल अस्पताल के फार्मासिस्ट एवं स्टोर इंचार्ज प्रमोद परमार और आयुष्मान मित्र जगदीश मेवाड़ा पर आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन लेखापाल और अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से 46 लाख रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि को धोखाधड़ी से अपनी पत्नी और करीबी रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया था. आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग के आदेश के बाद गठित जांच टीम अब इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है.
यह मामला साल 2017-18 से लेकर साल 2023 तक का बताया जा रहा है, जो अब उजागर हुआ है. आशंका जताई जा रही है कि इस घोटाले में कई अन्य कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं. हालांकि, पूरे मामले की सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगी. जांच की प्रक्रिया में देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
बैंक स्टेटमेंट के साथ 6 मार्च को पेश होने के निर्देश
जांच दल का नेतृत्व कर रहे सिविल सर्जन डॉ. उमेश श्रीवास्तव ने उन सभी खाताधारकों को नोटिस जारी किया है, जिनके खातों में प्रोत्साहन राशि स्थानांतरित की गई. आदेश के अनुसार, सभी संबंधित व्यक्तियों को 6 मार्च को सुबह 11 बजे उपस्थित होकर अपने बैंक खातों का स्टेटमेंट प्रस्तुत करना होगा.
वहीं नोटिस पाने वालों में स्टोर इंचार्ज प्रमोद परमार, आयुष्मान मित्र जगदीश मेवाड़ा, दीक्षा परमार, कांता परमार, बबीता परमार, स्मिता सोलंकी, सागर मेवाड़ा और सीहोर के संजीवनी क्लिनिक में पदस्थ डॉ. शुभम परमार भी शामिल हैं.
पत्नी और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर की गई राशि
आरोप है कि प्रमोद परमार ने पात्र लाभार्थियों के स्थान पर अपनी पत्नी दीक्षा परमार और करीबी रिश्तेदार कांता परमार, शुभम परमार और बबीता परमार के खातों में 27 लाख रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की. वहीं, जगदीश मेवाड़ा पर भी करीब 18 लाख रुपये से अधिक की राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने का आरोप है. बताया जा रहा है कि 440 पृष्ठों की ट्रांजेक्शन सूची में इन लेन-देन का विस्तृत विवरण दर्ज है.
जांच जारी, अधिकारियों का बयान
जांच टीम का कहना है कि जिन अपात्र व्यक्तियों के खातों में आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि स्थानांतरित हुई है, उन्हें 6 मार्च तक बैंक पासबुक स्टेटमेंट के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है. जांच के बाद ही पूरे मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल, पूरे प्रकरण की जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.



