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    Home»छत्तीसगढ़»छत्तीसगढ़ में बाघों की सुरक्षा के लिए बाघ मित्र योजना लागू होगी, सरकार ने हाई कोर्ट में पेश किया जवाब
    छत्तीसगढ़

    छत्तीसगढ़ में बाघों की सुरक्षा के लिए बाघ मित्र योजना लागू होगी, सरकार ने हाई कोर्ट में पेश किया जवाब

    Chhattisgarh RajyaBy Chhattisgarh RajyaApril 17, 2025
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    बाघों
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    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बाघों और हाथियों जैसे संरक्षित वन्यजीवों की लगातार मौत के मामलों को लेकर हाई कोर्ट गंभीर है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई।

    इस दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने जवाबी शपथपत्र पेश किया, जिसमें वन विभाग द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई। शपथपत्र में यह भी बताया गया कि 17 मार्च को इस मुद्दे पर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें बाघों की सुरक्षा और संरक्षण पर गहन चर्चा की गई। बाघों की लगातार हो रही मौतों को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के बाघ मित्र मॉडल का अध्ययन किया गया।

    इस अध्ययन के तहत छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ वन विभाग अधिकारियों की टीम ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न बाघ अभयारण्यों और वहां के सीमावर्ती गांवों का दौरा किया। उन्होंने यूपी के सफल प्रयासों को समझा और अब छत्तीसगढ़ में भी इसी मॉडल के तहत बाघ मित्र योजना लागू करने की तैयारी है।

    इस योजना का उद्देश्य मानव-बाघ संघर्ष को कम करना और वन्यजीवों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। गौरतलब है कि 8 नवंबर 2024 को कोरिया जिले के गुरु घासीदास नेशनल पार्क के पास एक बाघ का शव मिला था, जिसमें नाखून, दांत और आंख गायब थे, जिससे इसे शिकार की घटना माना गया। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर की पुष्टि नहीं हुई और बीमारी को संभावित कारण बताया गया।

    इस घटना पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था, “जंगल और वन्यजीव नष्ट हो रहे हैं, अब बचा क्या?” कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अब तक किए गए ठोस प्रयासों का हलफनामा पेश करें। पिछले हलफनामे में राज्य सरकार ने वन्यजीवों के संरक्षण के लिए उठाए गए उपायों का विवरण दिया था। इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2025 को होगी।

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