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    Home»लेख-आलेख»बजट से जुड़े पूर्वानुमान…
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    बजट से जुड़े पूर्वानुमान…

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJanuary 28, 2026
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    उद्योग जगत के प्रतिभागियों ने आगामी बजट के लिए इनोवेशन और अनुसंधान एवं विकास और निर्यात उन्मुख क्षेत्रों को समर्थन, रोजगार सृजन और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को शीर्ष प्राथमिकताएं बताया है। सर्वे में शामिल लोगों ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भू-राजनीतिक जोखिम, रोजगार सृजन और निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्रमुख चुनौतियों के रूप में भी चिन्हित किया है। 2025-26 में नए टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपए तक की सालाना कमाई को टैक्स फ्री कर दिया गया था, जिससे आम आदमी को बड़ी राहत मिली। कृषि क्षेत्र में पिछले बजट के कई ऐलान अभी लागू नहीं हुए हैं। पिछले साल कृषि को अर्थव्यवस्था का पहला इंजन बताया गया था। किसान क्रेडिट कार्ड से लोन की सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख की गई थी…

    एक फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट 2026-27 पेश करेंगी, जो उनका लगातार नौवां बजट होगा। खास बात यह है कि इस बार बजट रविवार को पेश होगा, जो पिछले कुछ सालों में कम ही हुआ है। पिछले साल सरकार ने 12 लाख रुपए तक की आय को टैक्स फ्री करके आम लोगों को बड़ी राहत दी थी, और इस बार उम्मीदें और बड़ी हैं। माननीय राष्ट्रपति जी ने सरकार की सलाह पर संसद के दोनों सदनों को बजट सत्र के लिए बुलाया है। यह सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। सत्र दो हिस्सों में होगा जिसमें पहला हिस्सा 28 जनवरी से 13 फरवरी तक और दूसरा 9 मार्च से 2 अप्रैल तक। इस दौरान बजट के अलावा कई महत्वपूर्ण चर्चाएं और कई महत्वपूर्ण बिल पास होने की उम्मीद है। बड़े नामों से ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड उनके नाम होगा। पिछले बजटों में उन्होंने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं और क्या इस बार भी देश की आर्थिक दिशा तय करने में यह बजट अहम भूमिका निभाएगा? देश की आर्थिक स्थिति 2026-27 में गति पकडऩे की उम्मीद पकड़ सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट में पूंजीगत व्यय, राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने वाले सुधारों पर जोर बने रहने की संभावना है। आगामी केंद्रीय बजट में रोजगार सृजन और कौशल विकास को प्रमुख प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य युवाओं के लिए अधिक रोजगार अवसर पैदा करना और स्किल ट्रेनिंग को मजबूत करना होगा। बजट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर भी जोर रहने की उम्मीद है।

    खास तौर पर छोटे और निर्यात आधारित उद्योगों के लिए समर्थन बढ़ाया जा सकता है। कृषि क्षेत्र को लेकर भी सरकार की ओर से समन्वित सहायता की संभावना है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सके। इसके अलावा, शोध एवं विकास और इनोवेशन को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है, जिससे लंबी अवधि की आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिले। बजट में विनियमन कम करने और कारोबार करने में आसानी को और बेहतर बनाने के लिए भी अहम कदम उठाए जाने की उम्मीद है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू 9.6 फीसदी की दर से बढ़ेगा। यह वृद्धि 10.1 फीसदी की अनुमानित नॉमिनल जीडीपी वृद्धि के लगभग अनुरूप है, लेकिन पहले के औसत से कम रहेगी। अप्रत्यक्ष करों पर दबाव बने रहने की संभावना है। इसके बावजूद फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पादों पर बढ़ाई गई उत्पाद शुल्क दरों से उत्पाद शुल्क कलेक्शन को कुछ सहारा मिलने का अनुमान है। नॉन टैक्स रेवेन्यू के मोर्चे पर, भारतीय रिजर्व बैंक से मिले ज्यादा डिविडेंड ने वित्त वर्ष 2026 में सरकार को बड़ी राहत दी है। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में नॉन टैक्स रेवेन्यू बजट अनुमान से ज्यादा रह सकता है। हालांकि, वित्त वर्ष 2027 में आरबीआई से मिलने वाला डिविडेंड घटकर 2 से 2.5 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026 में 2.7 लाख करोड़ रुपए रहा था। पूंजीगत व्यय केंद्र सरकार की विकास रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026 के पहले आठ महीनों में 28.2 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज करने के बाद, वित्त वर्ष 2027 में पूंजीगत व्यय के 10 फीसदी बढक़र 12.3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। व्यय की गुणवत्ता भी मजबूत बने रहने की उम्मीद है, जहां पूंजीगत व्यय और राजस्व व्यय का अनुपात वित्त वर्ष 2026 और 2027 दोनों में लगभग 0.3 रहने का अनुमान है। हालांकि, वित्त वर्ष 2026 में अब तक राजस्व व्यय की वृद्धि सुस्त रही है, जिसका एक कारण व्यय युक्तिकरण के कदम हैं। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में राजस्व व्यय में करीब 1.7 लाख करोड़ रुपए की कटौती की जा सकती है, जिससे राजकोषीय घाटे को काबू में रखने में मदद मिलेगी। वित्त वर्ष 2026 में राजकोषीय घाटा राशि के लिहाज से बजट लक्ष्य से थोड़ा अधिक रहने का अनुमान है, लेकिन यह जीडीपी के 4.4 फीसदी के स्तर पर सीमित रह सकता है। वित्त वर्ष 2027 के लिए उम्मीद है कि राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.2 से 4.3 फीसदी के बीच बजट में तय किया जाएगा, जो राजकोषीय अनुशासन को जारी रखने का संकेत देता है।

    वित्त वर्ष 2027 में सकल बाजार उधारी 16 से 17 लाख करोड़ रुपए केदायरे में रहने का अनुमान है। कर्ज भुगतान के दबाव को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक बॉन्ड स्विचिंग कर सकता है। विनिवेश सरकार के लिए एक ध्यानयोग पक्ष बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026 के पहले आठ महीनों में विनिवेश से सिर्फ 49 अरब रुपए की प्राप्ति हुई है, जो बजट लक्ष्य से काफी कम है। अनुमान है कि गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों में कमी रहेगी। उद्योग जगत के प्रतिभागियों ने आगामी बजट के लिए इनोवेशन और अनुसंधान एवं विकास और निर्यात उन्मुख क्षेत्रों को समर्थन, रोजगार सृजन और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को शीर्ष प्राथमिकताएं बताया है। सर्वे में शामिल लोगों ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भू-राजनीतिक जोखिम, रोजगार सृजन और निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्रमुख चुनौतियों के रूप में भी चिन्हित किया है। 2025-26 में नए टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपए तक की सालाना कमाई को टैक्स फ्री कर दिया गया था, जिससे आम आदमी को बड़ी राहत मिली। कृषि क्षेत्र में पिछले बजट के कई ऐलान अभी लागू नहीं हुए हैं। पिछले साल कृषि को अर्थव्यवस्था का पहला इंजन बताया गया था।

    किसान क्रेडिट कार्ड से लोन की सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख की गई थी। कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन और हाई यील्डिंग सीड्स पर नेशनल मिशन जैसे कई कदम घोषित किए गए थे। ये 7.7 करोड़ किसानों, मछुआरों और डेयरी वालों को फायदा पहुंचाने वाले थे, लेकिन अभी इनका पूरा अमल नहीं हुआ है। सरकार आने वाले बजट में भी ऐसे प्रावधान करे जिससे देश के मध्यम वर्ग को ताकत मिले। सरकार लगातार श्रमिकों, किसानों, व्यापारियों को आगे बढ़ाने और उनकी आर्थिक शक्ति को मजबूत करने के लिए अहम उपाय करे, टैक्स दरों में बदलाव के साथ-साथ सस्ता कर्ज देकर उन्हें प्रगति करने के अवसर दिए गए हैं। बजट 2026-27 में भी केंद्र सरकार इसी तरह के उपाय कर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के कदम उठा सकती है। हर बार की तरह इस बार भी टैक्सपेयर्स को और छूट की आस है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इनकम टैक्स में और आसानी आए, नियम सरल हों और अलग-अलग सेक्टरों के लिए खास फायदे मिलें। इसके लिए स्वीकार होने वाली प्रार्थना की जरूरत रहेगी-डा. वरिंद्र भाटिया

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