लेख-आलेख
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नेताओं के विवादित बयान, विकसित भारत’ की राह में बाधाएं
भारत ने अभी-अभी वल्र्ड आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस (ए.आई.) इम्पैक्ट समिट होस्ट किया है और हमारे नेता अपनी आजादी की 100वीं सालगिरह तक ‘विकसित भारत’ या एक डिवैल्प्ड देश बनने की बात कर रहे हैं लेकिन हमारी राष्ट्रीय कहानी देश को उल्टी दिशा में ले जा रही है। ऐसा लगता है कि हम डिवैल्प्ड या डिवैल्पिंग देशों से नहीं, बल्कि रिग्रैसिव और…
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कार्नी के भारत दौरे में पंजाब दरकिनार…
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत दौरे का ऐलान किया है। वह भारत में मुंबई और नई दिल्ली में बिजनैसमैन और पॉलिटिकल लीडर्स से मिलेंगे, जहां कनाडा और भारत के बीच ट्रेड और एनर्जी एग्रीमैंट को बढ़ावा देने पर बातचीत होगी। कनाडा और भारत के बीच 2010 से चल रहे सी.ई.पी.ए. फ्री ट्रेड एग्रीमैंट की द्विपक्षीय बातचीत को और करीब…
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…खुद को बेपर्दा करती कांग्रेस
कहते हैं ‘घर का भेदी लंका ढाए’- आज जब दुनिया भारत को एक उभरती हुई आॢथक, डिजिटल और कूटनीतिक शक्ति के रूप में देख रही है, तब देश के भीतर का एक राजनीतिक वर्ग जैसे हर राष्ट्रीय उपलब्धि और अपनी जड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने पर आमादा दिखाई देता है। भारत की अर्थव्यवस्था, डिजिटल संरचना और कूटनीतिक सक्रियता में हाल के…
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पाणिनि से एआई स्टैक तक: दिल्ली का एआई गौरव और राष्ट्रीय क्षमता का लक्ष्य-हरदीप एस पुरी
आर्टिकल- जब पाणिनि ने बोली जाने वाली भाषा की अव्यवस्था को एक संक्षिप्त, गणनीय व्याकरण में परिवर्तित किया, तो उन्होंने एक बात साबित की, जो आज भी प्रासंगिक है: बुद्धिमत्ता सबसे शक्तिशाली तब होती है, जब इसे संरचना के रूप में व्यक्त किया जाता है। नालंदा इस सहज प्रवृत्ति को संस्थानों तक ले गया और बहस करने, संरक्षित करने और…
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ए.आई दे रहा नए हुनर सीखने का अवसर…
दिल्ली के भारत मंडपम में पहला ‘इंडिया ए.आई. इम्पैक्ट समिट’ आयोजित करने का भारत का फैसला केवल तकनीकी या कूटनीतिक नहीं, बल्कि यह एक गहरे बदलाव का संकेत है। यह बदलाव इस बात से जुड़ा है कि आने वाले समय में काम कैसे होगा। नौकरियां कैसे मिलेंगी? लोग अपने करियर को कैसे आगे बढ़ाएंगे? आज आम धारणा यह बन रही…
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कहर एपस्टीन फाइल्स…
पिछले हफ्ते तक इंगलैंड के युवराज रहे प्रिंस एंड्रयू की गिरफ्तारी ने एपस्टीन फाइल्स में उल्लेखित विश्व की मशहूर हस्तियों और राजनेताओं के दिल की धड़कन बढ़ा दी है। यह एक ऐसा जिन्न है, जो फैलता ही जा रहा है। हर रोज नए-नए नाम और उनके काले कारनामे उजागर हो रहे हैं। आश्चर्य की बात है कि अमरीका के न्यायिक…
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महात्मा गांधी और पंडित नेहरू आज की राजनीति में ‘विलेन’ क्यों?…
स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के योगदान को कम करके नहीं देखा जा सकता। पता नहीं आज के तथाकथित राजनेता उन्हें गालियां क्यों देने लगे हैं? आज की पीढ़ी तो इन दोनों महापुरुषों के नाम और काम को भूल चुकी थी, देश के तथाकथित नेताओं ने उन्हें पुन: जिंदा कर दिया,…
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ट्रेड यूनियनवाद का बदलता चेहरा…
12 फरवरी को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा बुलाया गया ‘भारत बंद’ संगठित श्रम की स्थायी ताकत को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से एक राष्ट्रव्यापी बंद के रूप में प्रस्तुत किया गया था। वास्तव में, इस दिन ने यह दिखाया कि राष्ट्रीय प्रभाव कितना कम हो गया है। यूनियन नेताओं ने बड़े पैमाने पर भागीदारी का दावा किया,…
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छत्तीसगढ़ मे आदिवासी नेतृत्व गढ़ रहा है विकास के नए सोपान-छगन लाल लोन्हारे
छगन लाल लोन्हारे(उप संचालक जनसंपर्क ) रायपुर- छत्तीसगढ़ की खूबसूरत वादियों में स्थित जशपुर जिला के ग्राम बगिया में 21 फरवरी को जन्म लेने वाले मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सज्जनता और सहृदयता की एक मिसाल है। दो वर्ष के अपने मुख्यमंत्रित्व काल में छत्तीसगढ़ राज्य में विकास का एक नया आयाम गढ़ने वाले तथा प्रदेश के नागरिकों के दिलों में राज…
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क्या ‘विशेषाधिकार की भावना’ से ग्रस्त हैं राहुल ?
समय कई बार ऐसी चौंकाने वाली समानताएं हमारे सामने रख देता है, जो राजनीतिक-जीवन को नए तरीके से समझने का अवसर देती हैं। आज की उथल-पुथल भरी वैश्विक राजनीति में 2 ऐसे व्यक्तित्व-अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और देश के नेता प्रतिपक्ष (लोकसभा) राहुल गांधी-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय होने के बावजूद दोनों का बदलते भारत को देखने का दृष्टिकोण…
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