नई दिल्ली। फ्रांस में हुए दंगे और भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए युवाओं के प्रदर्शन में कुछ संबंध सामने आए हैं। ये दावा विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से किया जा रहा है।
फ्रांस में महंगाई और बेहतर शिक्षा संबंधी मांगों को लेकर युवा सड़कों पर उतरे। वहीं भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी पार्टियों के साथ कई संगठन के युवा सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इन दोनों ही प्रदर्शनों में तालमेल बैठाने के काम में कुछ संगठन जुटे हैं।
101 संगठनों की हुई पहचान
फॉक्स न्यूज की वरिष्ठ संपादक असरा नोमानी ने अपनी जांच में ऐसे ही 101 संगठनों की पहचान की है। इस जांच में इन संगठनों की पहुंच नौ देशों तक बताई जा रही है। इन संगठनों को रेड-ग्रीन इकोसिस्टम ( इस्लामी और कम्युनिस्ट समूहों का तंत्र) बताया जा रहा है।
क्या है इन समूहों का काम
रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार ये समूह यूरोप में विरोध प्रदर्शन को कराने से लेकर उनके बीच सही से तालमेल बैठाने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा इन समूहों के सदस्य इसे बढ़ाने पर भी जोर दे रहे हैं। इसके लिए जो भी उन्हें उचित लग रहा वो कदम उठा रहे हैं।
किस नाम से प्रकाशित है रिपोर्ट
ये रिपोर्ट “ग्लोबल केओस इंक ग्रोज़ टू 101 ग्रुप्स” (वैश्विक अराजकता का तंत्र 101 समूहों तक फैला) नाम से प्रकाशित है। नोमानी की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है ये फ्रांस और भारत में हो रहे प्रदर्शनों के संदेशों को जोड़ने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा ये संगठन मैनहट्टन में पीपल्स फोरम से साथ भी रिश्ता रखता है।
कौन कर रहा फंडिंग
उनकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसे शंघाई में रहने वाले अमेरिकी मूल के तकनीकी क्षेत्र के शक्तिशाली उद्योगपति नेविल रॉय सिंघम से फंडिंग और समर्थन मिल रहा है। उन्होंने ये भी दावा किया कि यूरोप में हुए प्रदर्शन से फैली अशांति को कम्युनिस्ट-समर्थक संगठनों के एक नेटवर्क ने भी बढ़ावा दिया। इसमें ‘ब्रेकथ्रू न्यूज़’, ‘कोडपिंक’ (CODEPINK) और ‘पार्टी फॉर सोशलिज्म एंड लिबरेशन’ जैसे संगठन हैं।

