Diabetes, हार्ट-किडनी के साथ- साथ आपके कानों पर भी डाल सकती है असर !…

डेस्क: डायबिटीज (मधुमेह) को आमतौर पर दिल, किडनी, आंखों और नसों से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सुनने की क्षमता (Hearing) को भी प्रभावित कर सकती है? डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से कान के अंदर की नाजुक संरचनाओं को नुकसान पहुंच सकता है।
डायबिटीज इस तरह सुनने की क्षमता को करती है प्रभावित
हमारे कान के अंदर मौजूद कोक्लिया (Cochlea) में बहुत ही बारीक रक्त वाहिकाएं होती हैं। हाई ब्लड शुगर इन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे कान तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुंच पाता। डायबिटीज नसों को भी नुकसान पहुंचाती है (डायबिटिक न्यूरोपैथी)। जब सुनने से जुड़ी नसें प्रभावित होती हैं, तो आवाज को सही तरीके से दिमाग तक पहुंचाने में समस्या हो सकती है। रिसर्च बताती है कि जिन लोगों को डायबिटीज है, उनमें सुनने की क्षमता कम होने का खतरा ज्यादा होता है, खासकर उच्च फ्रीक्वेंसी की आवाजें सुनने में दिक्कत हो सकती है।
इन लक्षणों पर दे ध्यान
-बातचीत समझने में कठिनाई
-फोन पर सुनने में परेशानी
-बार-बार लोगों से बात दोहराने को कहना
-कानों में घंटी बजने जैसी आवाज (टिनिटस)
कैसे करें बचाव?
ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें, नियमित हेल्थ चेकअप और हियरिंग टेस्ट करवाएं। संतुलित आहार और व्यायाम अपनाएं, धूम्रपान और अत्यधिक शोर से बचें। ध्यान रखें कि डायबिटीज सिर्फ दिल या नसों की बीमारी नहीं है, बल्कि यह सुनने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए अगर आपको मधुमेह है, तो अपने कानों की सेहत को भी नजरअंदाज न करें और समय-समय पर जांच जरूर करवाएं।
ये टेस्ट करवाना जरूरी
इसके अलावा, डायबिटीज़ के लंबे समय तक रहने और खराब ग्लाइसेमिक कंट्रोल से रिस्क बढ़ जाता है। हालांकि सबूत ज़्यादातर ऑब्ज़र्वेशनल हैं और शुरुआती बदलाव नजरअंदाज़ हो सकते हैं। यही वजह है कि A1C (जिसे HbA1C भी कहते हैं, यह एक ब्लड टेस्ट है जो पिछले 3 महीनों में आपके ब्लड ग्लूकोज़ के औसत लेवल को दिखाता है) को कम करना बहुत ज़रूरी है। और सबसे अच्छे तरीकों में से एक यह समझना है कि असल में आपका ग्लूकोज़ किस वजह से बढ़ता है।
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.)



