उत्तराखंड के एक कार्यक्रम के दौरान गायक दलेर मेहंदी (Daler Mehndi) को राज्यमंत्री द्वारा अपमानित करने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना के बाद जहां एक तरफ मीका सिंह, बादशाह और अनुपम खेर जैसे तमाम कलाकार दलेर मेहंदी के समर्थन में उतर आए हैं, वहीं अब मशहूर गायिका सोना महापात्रा (Sona Mohapatra) ने एक अलग और बेहद गंभीर मुद्दा उठाया है। उन्होंने एक सवाल किया कि क्या दिग्गज और पुराने कलाकारों का सम्मान उनकी पेशेवर जवाबदेही की कीमत पर किया जाना चाहिए? साथ ही उन्होंने कहा कि जो जनता अच्छे पैसे देकर आई है उसका क्या?
“दिल्ली के सूफी फेस्टिवल में दिल तोड़ने वाला था नजारा”- सोना महापात्रा
सोना महापात्रा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबी पोस्ट शेयर की है। उन्होंने बताया कि वह दिल्ली में आयोजित सूफी हेरिटेज फेस्टिवल के दूसरे एडिशन में दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस देखने के लिए रुकी थीं। उन्होंने साफ किया कि उनका मकसद किसी लेजेंड्री कलाकार की बेइज्जती करना नहीं है, लेकिन उत्तराखंड की घटना के बाद उन्हें अपना निजी अनुभव बताना जरूरी लगा।
सोना ने उस रात के अनुभव को याद करते हुए लिखा, “हम सच में एक लेजेंड को परफॉर्म करते हुए देखने के लिए एक्साइटेड थे… लेकिन जो हुआ वह दिल तोड़ने वाला था। जहां से हमने देखा, दलेर जी कन्फ्यूज़्ड लग रहे थे, एक नोट पकड़ने में संघर्ष कर रहे थे और एक ही म्यूजिकल फ्रेज दोहरा रहे थे। ओवरऑल प्रोडक्शन भी बहुत डिसअपॉइंटिंग था। हमने ऑडियंस मेंबर्स को धीरे-धीरे जाते देखा, वह लोग जिन्होंने अच्छे पैसे दिए थे और बड़ी उम्मीदों के साथ आए थे।”
गायिका ने कहा कि उस समय उन्होंने और उनकी टीम ने कलाकार के सम्मान में चुप्पी साधे रखी, लेकिन अब उन्हें लगता है कि इस बारे में बात होनी चाहिए कि दर्शकों और आयोजकों की भी कुछ उम्मीदें और अधिकार होते हैं।
“क्या विरासत और उम्र हमें प्रोफेशनल जवाबदेही से छूट देती है?”- सोना महापात्रा
सोना महापात्रा ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही पुराने कलाकार अपने जीवनभर के योगदान के लिए सम्मान और हमदर्दी के हकदार हैं, लेकिन दर्शकों को भी एक ईमानदार परफॉर्मेंस की उम्मीद रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई कलाकार अस्वस्थ है, तो इसे जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ क्यों नहीं संभाला जाना चाहिए?
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि उम्र, विरासत और रुतबा सम्मान के लायक जरूर हैं, लेकिन ये किसी भी कलाकार को पेशेवर जवाबदेही से छूट नहीं देते और दर्शक एक ईमानदार परफॉर्मेंस के हकदार हैं, या कम से कम, जब यह मुमकिन न हो तो ईमानदारी से माना जाना चाहिए। अगर कोई बीमार है, तो दया दिखानी चाहिए और स्थिति को संभालने का एक जिम्मेदार तरीका होना चाहिए। जो बात मंजूर नहीं हो सकती, वह यह है कि दर्शक और ऑर्गनाइजर बार-बार नतीजे भुगतें जबकि कलाकार के आस-पास के सभी लोग नजरें फेर लें।”
उत्तराखंड में दलेर मेहंदी के परफॉर्मेंस के दौरान क्या हुआ?
दलेर मेहंदी रविवार को नई टिहरी में ऐतिहासिक सिद्धपीठ मां कुंजापुरी टूरिज्म एंड डेवलपमेंट मेले में परफॉर्म कर रहे थे, तभी उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने उन्हें टोका और उनकी परफॉर्मेंस को लेकर डांटा। इसके बाद ऑनलाइन आरोप सामने आए कि सिंगर शराब के नशे में थे और उन्हें गाने में दिक्कत हो रही थी। इन आरोपों की इंडिपेंडेंटली वेरिफिकेशन नहीं हुई है।
इवेंट के दौरान, मंत्री ने सिंगर की परफॉर्म करने की काबिलियत पर सवाल उठाया और उन्हें यह कहते हुए सुना गया, “तुम तो बोल भी नहीं पा रहे, तो तुम गाओगे कैसे? हमने तुम्हें इसलिए बुलाया ताकि हमारे लोग एंटरटेन हो सकें। तुम हमें बेवकूफ बना रहे हो। यह गलत है। यह गलत है। तुम्हारा बड़ा नाम है। हमें उसकी इज्जत करनी चाहिए।”

