HighLights
- बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा पर सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भारी मुठभेड़।
- मुठभेड़ में नक्सलियों को बड़ा नुकसान, सर्च ऑपरेशन जारी।
- संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर नक्सलियों को जंगल में घेरा।बीजापुर-कांकेर नक्सल मुठभेड़: 22 नक्सली ढेर, एक जवान शहीद, सर्च ऑपरेशन जारी
छत्तीसगढ़ के बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले की सीमा पर गंगालूर थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें 18 नक्सली मार गिराए गए। वहीं, कांकेर जिले में भी सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ के दौरान 4 नक्सलियों को ढेर कर दिया। इस ऑपरेशन में बीजापुर डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के एक जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं। इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है, और मारे गए नक्सलियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
भारी मात्रा में हथियार बरामद
मुठभेड़ स्थल से सुरक्षाबलों ने बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया है। संयुक्त पुलिस बल ने इस अभियान की शुरुआत की थी, जिसके तहत गुरुवार सुबह करीब सात बजे से दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई। बीजापुर में 18 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि कांकेर में 4 नक्सलियों को मार गिराया गया है।
स्थिति तनावपूर्ण, सुरक्षाबलों की सतर्क निगरानी
बीजापुर मुठभेड़ में एक जवान बलिदान हुए हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा गहन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इलाके में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है, और सुरक्षाबल हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।
गृहमंत्री अमित शाह: 31 मार्च 2026 तक देश होगा नक्सलमुक्त
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस बड़ी कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया—
“नक्सलमुक्त भारत अभियान के तहत हमारे जवानों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में सुरक्षा बलों के दो अलग-अलग अभियानों में 22 नक्सली मारे गए। मोदी सरकार नक्सलियों के खिलाफ कठोर नीति अपना रही है। समर्पण और पुनर्वास की सुविधाओं के बावजूद जो नक्सली आत्मसमर्पण नहीं कर रहे, उनके खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। अगले साल 31 मार्च से पहले देश नक्सलमुक्त होने वाला है।”बीजापुर: कभी नक्सलियों का सबसे मजबूत गढ़
गंगालूर थाना क्षेत्र का यह इलाका दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला पहाड़ी से सटा हुआ है, जिसे कभी नक्सलियों का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था। सुरक्षाबलों ने सूचना के आधार पर जब इलाके में अभियान चलाया, तो नक्सलियों ने घेराबंदी देखकर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में जवानों ने भीषण जवाबी कार्रवाई की।
नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार सिमट रहा प्रभाव
पीडिया क्षेत्र में नए सुरक्षा कैंप खुलने के बाद से नक्सलियों के प्रभाव में कमी आई है। पहले यह क्षेत्र नक्सलियों के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता था। आसपास के गांव—मिरगान घोटुल, डोडी तुमनार, इडेनार, गमपुर, तामोडी, अंडरी और कुएम—भी नक्सलियों के गढ़ माने जाते थे, लेकिन अब यहां सुरक्षाबलों की उपस्थिति मजबूत हो चुकी है।
कांकेर नक्सल मुठभेड़: 4 नक्सली ढेर
कांकेर-नारायणपुर सीमा पर नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना के बाद सुरक्षाबल सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना हुए थे। डीआरजी और बीएसएफ की संयुक्त टीम पर नक्सलियों ने हमला कर दिया। जवाबी कार्रवाई में चार नक्सली मारे गए। सुरक्षाबलों ने इनके पास से ऑटोमैटिक हथियार और अन्य सामग्री जब्त की है।

अबूझमाड़ में आईईडी धमाका, दो जवान घायलअबूझमाड़ क्षेत्र में ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट किया, जिसमें डीएसपी समेत एक जवान घायल हो गए। हालांकि, उनकी हालत गंभीर नहीं है, और उन्हें तत्काल उपचार के लिए ऑपरेशन क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

नक्सलवाद के खात्मे की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़लगातार मिल रही सफलताओं से सुरक्षाबलों का मनोबल ऊंचा है। राज्य और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलियों का प्रभाव तेजी से सिमट रहा है। सुरक्षाबलों का यह अभियान जारी रहेगा, जिससे 2026 तक बस्तर और छत्तीसगढ़ पूरी तरह से नक्सलमुक्त हो सके।

