Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग डिजिटल नवाचारों के माध्यम से सुशासन सशक्त
    • कौन हैं सोनिया सहरावत? RAF असिस्टेंट कमांडेंट जिन्होंने CJP प्रोटेस्ट कोसा तो महुआ मोइत्रा बोलीं…
    • Chhattisgarh news:चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड, बीएड और डीएलएड की प्रवेश की काउंसिलिंग अगस्त के पहले सप्ताह से हो जाएगी शुरू…
    • तबीयत ठीक नहीं होने के बावजूद मौन आंदोलन में शामिल अन्ना हजारे फफक-फफक कर रोए
    • अनियंत्रित होकर घर में घुसी तेज रफ्तार स्कॉर्पियो, 2 की मौके पर मौत; छह घायल
    • शिवरीनारायण:मोबाइल गेम की लत ने ली किशोर की जान, दो बार सांप ने काटा, फिर भी नहीं छोड़ा फोन…
    • बोड़ला थाना क्षेत्र में हुए एक अंधे हत्याकांड का महज सात दिनों के भीतर खुलासा…
    • रायपुर के मुजगहन थाना क्षेत्र में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में लाश मिलने से इलाके में सनसनी
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Thursday, July 23
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»‘हर छात्र आंदोलन लोकतंत्र के लिए नहीं’, तसलीमा नसरीन की चेतावनी
    लेख-आलेख

    ‘हर छात्र आंदोलन लोकतंत्र के लिए नहीं’, तसलीमा नसरीन की चेतावनी

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJuly 23, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर बांग्लादेश की लेखिका तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा कि जंतर-मंतर पर जुटे “कॉकरोच” आंदोलन के प्रदर्शनकारियों को देखकर उन्हें बांग्लादेश के जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन की याद आ गई। उन्होंने कहा कि उस आंदोलन की शुरुआत आरक्षण और मेरिट के मुद्दे से हुई थी, लेकिन बाद में वह सरकार बदलने की मांग तक पहुंच गया।

    तसलीमा नसरीन ने दावा किया कि बांग्लादेश आज भी उस आंदोलन के बाद की स्थिति की कीमत चुका रहा है। उनके मुताबिक, वहां कट्टरपंथी ताकतें मजबूत हुईं और देश में हिंसा, सांप्रदायिकता, धार्मिक कट्टरता, महिलाओं के खिलाफ अपराध, आतंकवाद और अराजकता बढ़ी। यह उनकी व्यक्तिगत राय है, जिसे उन्होंने अपने X पोस्ट में साझा किया।

    जंतर-मंतर के आंदोलन पर जताई चिंता

    तसलीमा नसरीन ने लिखा कि जंतर-मंतर पर “कॉकरोच” आंदोलन के प्रदर्शनकारियों को देखकर उन्हें जुलाई 2024 के बांग्लादेश आंदोलन की याद आ गई। उन्होंने दोनों घटनाओं के बीच अपनी आशंका का जिक्र करते हुए कहा कि छात्र आंदोलनों को अब वह पहले की तरह आसानी से भरोसे की नजर से नहीं देख पाती हैं।

    बांग्लादेश के आंदोलन का किया जिक्र

    उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में छात्र आंदोलन की शुरुआत “कोटा या मेरिट, मेरिट- मेरिट” के नारे से हुई थी, लेकिन बाद में आंदोलन का लक्ष्य सरकार को हटाना बन गया था। नसरीन के अनुसार, उसके बाद देश की स्थिति बिगड़ गई और कई गंभीर समस्याएं सामने आईं।

    ‘हर छात्र आंदोलन लोकतंत्र के लिए नहीं होता’

    तसलीमा नसरीन ने लिखा कि जुलाई 2024 की घटनाओं ने उन्हें यह सिखाया कि हर छात्र आंदोलन लोकतंत्र के लिए नहीं होता, हर सरकार विरोधी आंदोलन आजादी नहीं लाता और हर क्रांति वास्तव में क्रांति नहीं होती। उनके अनुसार, कुछ क्रांतियां पुरानी व्यवस्था को हटाकर उससे भी ज्यादा डरावनी स्थिति पैदा कर देती हैं। यह टिप्पणी उन्होंने भारत में चल रहे छात्र आंदोलन के संदर्भ में अपनी आशंका व्यक्त करते हुए की।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    उद्यमी कर रहे आत्मनिर्भर भारत का निर्माण…

    July 23, 2026

    बलूचिस्तान में स्वघोषित आजादी

    July 21, 2026

    स्मार्ट मीटर : बिजली मीटर के विकास का अगला स्वाभाविक कदम

    July 20, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.